बाल विकास सेवा निदेशालय में बड़े खेल का खुलासा, पद 2015 में बना, प्रमोशन 2001 से ही बंटे
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बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार निदेशालय (आईसीडीएस) में लिपिक संवर्ग के कर्मियों को वरिष्ठ सहायक बनाने में बड़ा खेल सामने आया है। यह पद 2015 में बना, पर चहेते कर्मियों को इस पद पर 2001 से ही प्रमोशन दिया जाता रहा। आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा की विशेष जांच रिपोर्ट में यह गोलमाल सामने आया है। रिपोर्ट में मुख्यालय के 31 कर्मियों को काल्पनिक पद पर प्रमोशन का ब्यौरा दिया गया है।
रिपोर्ट बताती है कि लिपिकीय संवर्ग की सेवा नियमावली-1992 में कनिष्ठ लिपिक से वरिष्ठ लिपिक के ही पद पर प्रमोशन दिए जाने का प्रावधान था। 15 अक्तूबर, 2015 को शासनादेश के जरिये लिपिक संवर्ग को पुनर्गठित कर कनिष्ठ लिपिक को वरिष्ठ सहायक के पद पर प्रमोशन दिए जाने का प्रावधान किया गया। पर, मुख्यालय स्तर पर करीब 31 लिपिकों को वरिष्ठ सहायक के पद का प्रावधान होने से पहले ही पिछली तिथियों से प्रमोशन दे दिया गया।
इनमें से ज्यादातर को 2001 व 2002 से प्रमोशन दिया गया तो कुछ को 2008 व 2009 में वरिष्ठ सहायक बनाया गया। इसी तरह का खेल वरिष्ठ सहायक से प्रधान सहायक के पदों पर हुए प्रमोशन में किए जाने की बात कही जा रही है।
एक ही दिन में दे दिए गए दो प्रमोशन
सबसे चौंकाने वाला मामला अजीत कुमार यादव का है। अजीत को 1 सिंतबर, 2012 को कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक और इसी दिन वरिष्ठ सहायक से प्रधान सहायक के पद पर प्रोन्नति दे दी गई। एक ही आदेश में दोनों पदों पर प्रमोशन देने के साथ ही 4200 का ग्रेड वेतन और 9300-34800 का वेतन बैंड स्वीकृत कर दिया गया और किसी अफसर ने कुछ नहीं कहा।
कुलदीप सिंह, गिरीश चंद्र डिमरी, राजेश काके, नीलम शुक्ला और सरिता सिंह को भी मनमाने तरीके से प्रमोशन दिया गया। इससे सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।