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खुलासा: क्यों और कैसे हुए सहारनपुर में दंगे

Sun, 17 Aug 2014 11:43 AM IST
राजेन्द्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेन्द्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 17 Aug 2014 11:43 AM IST
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investigative team reveals about Saharanpur riots

सहारनपुर में प्रशासनिक अधिकारी सूझबूझ से काम लेते तो सांप्रदायिक हिंसा को टाला जा सकता था। यह निष्कर्ष है दंगे की जांच के लिए लोकनिर्माण एवं सिंचाई मंत्री की अध्यक्षता में गठित जांच दल का।

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जांच दल ने दंगा भड़कने के पीछे प्रशासनिक चूक को मुख्य वजह माना है। दल ने कहा है कि हिंसा से पहली रात न तो भीड़ को एकत्र होने देना चाहिए था और न ही विवादित स्थल पर रात में लिंटर डालने की अनुमति दी जानी चाहिए थी। सहारनपुर में 26 जुलाई को तड़के सांप्रदायिक संघर्ष हो गया था।

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पांच सदस्यीय दल ने की जांच

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समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस दंगे की जांच के लिए लोक निर्माण, सिंचाई सहकारिता एवं राजस्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच दल का गठन किया था।

इसमें प्राविधिक शिक्षा मंत्री शिवाकांत ओझा, ग्राम्य विकास राज्यमंत्री अरविन्द सिंह गोप, युवा कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष आशू मलिक और मुरादाबाद के जिला अध्यक्ष हाजी इकराम कुरैशी शामिल थे।

जांच दल ने तीन अगस्त को सहारनपुर जाकर श्री गुरु सिंह सभा में सिख समाज के लोगों से तथा शहर काजी के निवास पर मुस्लिम समाज के नुमाइंदों से बातचीत की थी।

इसके अलावा सर्किट हाउस में अलग-अलग लोगों से मिले थे। पूरे घटनाक्रम पर अधिकारियों से भी वार्ता की।

दो-तीन अफसरों की लापरवाही रही

investigative team reveals about Saharanpur riots

जांच दल ने मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। दल ने माना है कि यदि अधिकारी सजग होते तो हिंसा न भड़कती। हालांकि दंगे के बाद प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता दिखाई गई। इसी कारण दोपहर बाद हिंसा थम गई थी।

जांच दल की अगुवाई करने वाले शिवपाल सिंह यादव ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि उन्होंने सहारनपुर दंगे की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है। उन्होंने माना कि शुरुआत में दो-तीन अधिकारियों की लापरवाही रही। हालांकि उन्होंने उनके नामों का खुलासा नहीं किया।

उन्होंने कहा, जब दंगा हुआ, तब रमजान चल रहे थे। ईद से पहले का माहौल था। प्रशासन को रात में विवादित स्थल पर लिंटर नहीं डालने देना चाहिए था। दूसरे पक्ष के लोगों को भी रात में एकत्र होने से रोका जाना चाहिए था।

जो भी काम होना था, उसे दिन में कराना चाहिए था। इन दोनों घटनाओं ने तनाव का माहौल बनाया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

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शिवपाल ने स्‍थानीय सांसद पर लगाए आरोप

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सहारनपुर में यदि भीड़ जमा होने और लिंटर डालने के घटनाक्रमों को रोक लिया जाता तो हिंसक घटनाओं, तोड़फोड़ और आगजनी की अप्रिय स्थिति से बचा जा सकता था। रात में भी स्थिति की नाजुकता को उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया।

शुरू में प्रशासनिक चूक रही लेकिन बाद में अधिकारियों ने स्थिति को संभाल लिया। 26 जुलाई को दोपहर में ही हिंसा को नियंत्रित कर लिया गया। सूत्रों के मुताबिक जांच टीम ने आपसी सहमति और अदालत के निर्देशों के मुताबिक विवादित जमीन के झगड़े का हल निकालने और दोनों ही पक्षों के जख्मों पर मरहम लगाकर सांप्रदायिक सौहार्द बहाली पर जोर दिया है। दंगे में हुए नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने समेत कई सिफारिशें की हैं।

सांसद की भूमिका पर सवाल
जांच दल ने सहारनपुर के कुछ सियासी नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इनमें भाजपा सांसद राघव लखनपाल भी शामिल हैं। शिवपाल सिंह यादव का कहना है कि स्थानीय सांसद ने शहर में निकलकर दंगाइयों को उकसाया। उनके उकसावे पर दुकाने जलाने की कोशिशें हुईं।

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