पहली बोगी और इंजन के बीच छिपा रेल हादसे का राज!
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हादसे का शिकार हुई जनता एक्सप्रेस में ब्रेक प्रेशर बहुत कम था। उसके इंजन और इससे लगी पहली बोगी तक ब्रेक लग ही नहीं सके। वहीं पीछे की सारी बोगियों में भी प्रेशर इतना कम था कि ब्रेक लग ही नहीं पाई। जनता एक्सप्रेस की चार बोगियों में सफर कर रहे रेलकर्मियों ने बछरावां से धड़धड़ाते आगे बढ़ रही ट्रेन को रोकने के लिए चेन भी खींची थी जिसके निशान पहियों में पड़े हैं।
इसके बावजूद जनता एक्सप्रेस अनियंत्रित होकर सैंडम (ठोकर) को तोड़ते हुए दुर्घटनाग्रस्त हो गई। घटनास्थल पर जांच करने पहुंचे दक्षिण मध्य परिक्षेत्र के रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) डीके सिंह के स्थलीय परीक्षण में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए।
बछरावां रेलवे स्टेशन पर बीती 20 मार्च की सुबह हादसे का शिकार हुई जनता एक्सप्रेस की जनरल बोगी 04445 इंजन से सटी हुई थी। इसी बोगी में सवार 36 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
पुष्पक एक्सप्रेस से सोमवार सुबह लखनऊ पहुंचे सीआरएस सड़क मार्ग से सुबह करीब 9:30 बजे बछरावां रेलवे स्टेशन पहुंचे। उनके साथ दिल्ली और लखनऊ के डिप्टी सीआरएस के अलावा मुख्य संरक्षा अधिकारी नवीन शुक्ल और रेलवे बोर्ड के कई अधिकारी भी थे। सीआरएस ने घटनास्थल और इससे जुड़े स्थानों का करीब दो घंटे तक निरीक्षण किया।
इस तरह की गई जांच
-सीआरएस सबसे पहले इंजन में पहुंचे और इसकी ड्राइवर केबिन में जाकर उसकी स्थिति देखी। इमरजेंसी सहित सभी चारों तरह के ब्रेक लगाने को लेकर अपने साथ आए एक्सपर्ट से बातचीत भी की।
-इंजन में लगी माइक्रोप्रॉसेसर चिप की जांच के आदेश दिए। इस चिप की मदद से ट्रेन की अंतिम स्पीड और उसे कंट्रोल के लिए इस्तेमाल हुए ब्रेक का रिकॉर्ड मिलेगा।
-सैंडम से जहां तक इंजन पहुंचा, उसकी दूरी नापी जाएगी जिससे यह पता लगाया जा सकेगा कि लाइन छोड़कर ट्रेन कितनी स्पीड से अंतिम छोर तक जा पहुंची।
-इंजन में लगे नॉन वर्किंग कॉक, एंगल कॉक, हौज पाइप और वॉल्व का सीआरएस ने निरीक्षण किया। इनको सील कर उसे नंबरिंग करते हुए डीजल शेड जांच के लिए भेजा जाएगा।
-इंजन के नॉन वर्किंग कंट्रोल सिस्टम पर एपी पाया गया। इसे खोलकर जांच के लिए भेजा जाएगा।
ब्रेक लॉक ढीला मिला, चेन पुलिंग के भी निशान मिले
-इंजन से सटी जो पहली बोगी क्षतिग्रस्त की जांच हुई उसका ब्रेक लॉक ढीला पाया गया। उसका प्रेशर भी रिलीज होेने की दशा में था। इसका मतलब यह है कि पहली बोगी में ब्रेक लगा ही नहीं।
-इंजन से दूसरी बोगी के पहिये के निरीक्षण में स्केटिंग के निशान मिले हैं। यह साफ इशारा करती है कि हादसे से पहले चेन पुलिंग की गई थी। माना जा रहा है कि कम प्रेशर होने के कारण ट्रेन की गति कम नहीं हो सकी।
इन तकनीकी बिंदुओं के तलाशे जा रहे जवाब
-बोगी का पीपीसी देहरादून, हरिद्वार और मुरादाबाद में 100 था तो कैसे यह लखनऊ से बछरावां पहुंचने तक 90 से भी कम हो गया?
-बोगी की ट्रॉली के लीवर की पोजिशन ठीक नहीं मिली, वह कैसे टेढ़ा हुआ?
ट्रॉली की रॉड 27 सेंटीमीटर से घटकर 17 सेंटीमीटर कैसे रह गई?
-.8 किलो का प्रेशर पड़ने पर ही बोगी की ट्रॉली का स्प्रिंग अपने स्थान से कैसे हट गया?
...तो खतरनाक है इंजन का एंगल कॉक
मौके पर इंजन के पिछले हिस्से वाला एंगल कॉक नीचे की ओर झुका पाया गया। यह एंगल कॉक बंद था। सीआरएस ने पूछा तो रेलवे अफसरों ने बताया कि मोहनलालगंज स्टेशन का प्लेटफॉर्म बहुत नीचे है। ऐसे में कोई भी चलता-फिरता व्यक्ति इस इंजन के एंगल कॉक को बंद कर सकता है।
सीआरएस को यह भी बताया गया कि चलती ट्रेन में ड्राइवर इमरजेंसी की हालत में एंगल कॉक को बंद कर सकता है। सीआरएस ने सुझाव दिया कि एंगल कॉक को सील रखा जाना चाहिए जिससे जब भी इसका कोई इस्तेमाल हो तो ड्राइवर और रेलवे को साफ पता चल सके।
बिछेगी हादसा स्थल पर एक लाइन
सैंडम के ठीक बगल में उसके पॉइंट से इंजन तक के लिए एक और लाइन बिछाई जाएगी जिसपर इंजन को रखा जाएगा। इंजन को उस लाइन पर रखकर फिर उसका परीक्षण किया जाएगा। सीआरएस ने जल्द से जल्द रेलवे को इस काम को पूरा करने का आदेश दिया है।
आरडीएसओ की भी ली जाएगी मदद
जांच में अनुसंधान अभिकल्प व मानक संगठन (आरडीएसओ) के विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी। रेलवे अधिकारियों ने मौके पर लोकोमोटिव निदेशालय के अधिकारियों से जांच में सहयोग के लिए संपर्क किया है। यह विशेषज्ञ ब्रेक फेल होने के कारणों और ट्रेन के नियंत्रित न होने का पता लगाएंगे।
काम नहीं आई चेन पुलिंग
रेलवे ने पहली बार माना कि हादसे से चंद सेकंड पहले बोगियों में चेन पुलिंग कर ट्रेन को रोकने का भी प्रयास किया गया था। सीआरएस ने पूछा तो रेलवे अफसरों ने यह जरूर बताया कि इस ट्रेन से कुछ रेलकर्मी भी सफर कर रहे थे। जब ट्रेन प्लेटफॉर्म को पार हुई तब इसकी चार बोगियों में इन कर्मियों ने चेन पुलिंग भी की थी। जिसके निशान पहियों में पाए गए हैं। हालांकि चेन पुलिंग का भी कोई असर नहीं हुआ।
मिट गए कई सुबूत
इंजन से सटी पहली बोगी इतनी अधिक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है कि सीआरएस को मौके पर उससे जुड़े साक्ष्य जुटाने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इंजन की वैक्यूम लाइन भी कहीं नजर नहीं आई। सीआरएस ने इस बोगी की हौज पाइप और एंगल कॉक निकालने के आदेश दिए।
अब होगी जनता की बोगियों की जांच
जिस जनता एक्सप्रेस से बछरावां में हादसा हुआ था, उसकी बची हुई सभी बोगियों की जांच मंगलवार को लखनऊ में होगी। सोमवार को यह बोगियां यात्रियों को लेकर देहरादून से लेकर लखनऊ होते हुए वाराणसी को रवाना हुई है। देर शाम यात्रियों को वहां उतारकर ट्रेन की खाली बोगियां लखनऊ के पुराना किला वॉशिंग लाइन में खड़ी की जाएंगी। सीआरएस डीके सिंह मंगलवार सुबह इन बोगियों की भी जांच करेंगे।
बनेगा जॉइंट नोट
इस मामले में उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के सहायक परिचालन अधिकारी, एएसटी और एडीएमई मिलकर अपना जॉइंट नोट तैयार करेंगे। जॉइंट नोट के आधार पर एक संयुक्त रिपोर्ट बनेगी जिसे सीआरएस के समक्ष पेश किया जाएगा।
15 से 20 दिन में सौंप दी जाएगी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट
जांच पर दक्षिण मध्य परिक्षेत्र के रेल संरक्षा आयुक्त डी के सिंह का कहना है कि अभी हादसे के कारणों को बता पाना जल्दबाजी होगा। स्थलीय निरीक्षण में दुर्घटनाग्रस्त इंजन और बोगियों की मैकेनिकल पहलुओं की जांच की गई है।
जांच सही दिशा में जाए इसके लिए विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी। कर्मचारियों के बयान के आधार पर उनसे पूछताछ की जाएगी। जांच में देहरादून से लेकर बछरावां तक के 50 से 60 कर्मचारियों को शामिल किया गया है। हादसे का जिम्मेदार कौन है, यह विस्तृत जांच के बाद ही पता चलेगा।