'सरकारी दामाद' का रसूख, मिल चुकी है क्लीन चिट
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यह यादव सिंह का दबदबा ही था जो आयकर छापे से पहले उनके खिलाफ कोई दोष साबित नहीं हुआ था। बसपा शासनकाल में सर्वशक्तिशाली रहे अभियंता यादव सिंह पर हालांकि, सपा सरकार ने सत्ता में आते ही कार्रवाई की और मुकदमा दर्ज कर सीबीसीआईडी की जांच भी बैठा दी थी। लेकिन कुछ ही दिनों में सपा सरकार में भी अपने समीकरण फिट कर चुके यादव सिंह को जांच एजेंसी ने क्लीन चिट दे दी।
जांच के नाम पर सीबीसीआईडी की टीम ने एक बार नोएडा का दौरा किया और वापस लौट आई। इस मामले में टेक्निकल कमेटी की रिपोर्ट को आधार बनाकर फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई।
सरकार ने यादव सिंह को निलंबित करते हुए नोएडा में उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया था। मुकदमा लिखने के बाद पुलिस ने यादव सिंह के घर पर दबिश भी दी पर वह नहीं मिले थे। ऐसे ही नोएडा विकास प्राधिकरण ने भी यादव सिंह के घर पर उन्हें निलंबित किए जाने का नोटिस चस्पा कराया था।
नोएडा में गड़बड़ी की जांच लखनऊ सेक्टर से कराई गई पुलिस से हटाकर मामले की जांच को सीबीसीआईडी स्थानांतरित कर दिया गया।
ऊपर से आये मामले को लटकाए रखने के आदेश
सरकार ने कहने को तो जांच सीबीसीआईडी को दी, लेकिन कुल दो बिंदुओं पर जांच करने के निर्देश थे। वह यह कि यादव सिंह ने सड़क और बिजली की भूमिगत लाइन बिछाने के जो काम कराए, उसमें आ रही शिकायत की जांच हो।
सूत्रों के मुताबिक सीबीसीआईडी को जांच दिए जाने साथ ही ऊपर से इशारा हो गया था कि अभी मामले को लटकाए रखना है। बाद में जैसे निर्देश दिए जाएं वैसा करना होगा। इसी वजह से सीबीसीआईडी के नोएडा या मेरठ सेक्टर के बजाय यादव सिंह पर लगे आरोप की जांच सीबीसीआईडी के लखनऊ सेक्टर ने की।
सड़क देखकर वापस लौट आई जांच टीम
जैसे ही उनका निलंबन वापस हुआ, सीबीसीआईडी की कागजी जांच शुरू हो गई। दिखावे के तौर पर डीएसपी आरके सिंह समेत कुछ अन्य निरीक्षकों को टीम में लगाया गया।
मामले की तफ्तीश से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मौके पर एक टीम गई भी थी और वहां मौके पर सड़क बनी देख वापस लौट आई। जांच के नाम पर सीबीसीआईडी ने इतना ही किया।
लीपापोती कर लगा दी फाइनल रिपोर्ट
सीबीसीआईडी ने इस मामले में लीपापोती करते हुए जांच समाप्त कर अपनी अंतिम आख्या अप्रैल 2014 में लगा दी थी। तफ्तीश से जुड़े अफसरों का कहना है जांच दो बिंदुओं पर हुई। पहला सड़क निर्माण और दूसरा भूमिगत केबिल डालने का काम। सड़क निर्माण का भौतिक परीक्षण कर लिया गया। लेकिन भूमिगत केबिल का निरीक्षण करने के लिए सड़क खोदनी पड़ती। आखिर कितनी सड़क खोदी जाती।
इसलिए नोएडा अथारिटी द्वारा कराए गए कार्य में जो टेक्निकल कमेटी की रिपोर्ट थी, उसका अध्ययन किया गया। टेक्निकल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में भूमिगत केबिल के कार्य पर संतोष जताया था। उसी आधार पर जांच पूरी कर फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई।
लगातार बना रहा यादव सिंह का हस्तक्षेप
असलियत यह थी कि चूंकि, यादव सिंह के खिलाफ जांच चल रही थी, इसलिए उन्हें वापस नोएडा, ग्रेटर नोएडा व एक्सप्रेस-वे का चार्ज नहीं मिल पा रहा था, फिर भी वे मुख्यालय में बैठते हुए सारे निर्णयों में हस्तक्षेप रख रहे थे।
यही कारण था कि सीबीसीआईडी ने अपनी जांच के नाम पर कागजी कार्रवाई के अलावा तब तक कुछ नहीं किया जब तक कि ऊपर से इशारा नहीं हुआ।
जांच करने वाले को करवा दी उम्रकैद
यादव सिंह के खिलाफ जांच करने वाले रविंदर कुमार सिंह को पंजाब के युवक को आतंकी बताकर फर्जी मुठभेड़ में मार गिराने के मामले में सोमवार को पटियाला की विशेष सीबीआई अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई है।
रविंदर फिलहाल सीतापुर में डीएसपी तैनात था। उसे इंसपेक्टर से सीओ पर आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मुठभेड़ के कारण ही मिला था। सामने आया कि जिसे आतंकी बताकर मारा गया उसे रविंदर अपनी टीम के साथ पंजाब से उठा लाया था।
बहरहाल जांच को लेकर सवाल उठा तो बचाव में विभाग के अपर पुलिस महानिदेशक जग मोहन यादव आ गए। वह यह कह चुके हैं कि जांच एज़ेंसी ने मौके पर हुए कार्यों का निरीक्षण भी किया था। उन पर लगे आरोप सही नहीं पाए गए थे।