{"_id":"647feb6fab6d84d20a0eaa18","slug":"investigation-against-10-district-program-officers-dpos-accused-of-corruption-is-pending-for-many-years-2023-06-07","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: भ्रष्टाचार के आरोपी कई डीपीओ की जांच पर शासन की कुंडली, फंसे होने के बाद भी प्रमोशन देने का खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: भ्रष्टाचार के आरोपी कई डीपीओ की जांच पर शासन की कुंडली, फंसे होने के बाद भी प्रमोशन देने का खेल
Wed, 07 Jun 2023 08:56 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 07 Jun 2023 08:56 AM IST
सार
यूपी में भ्रष्टाचार के आरोपी 10 जिला कार्यक्रम अधिकारियों के खिलाफ जांच चल रही है। जांच में फंसे होने के बाद भी प्रोन्नति देने का खेल चल रहा है। कई मामलों में जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी जा चुकी है लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हो पाई है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
विस्तार
भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और महिला सहकर्मी के उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोपों से घिरे बाल विकास विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के करीब 10 जिला कार्यक्रम अधिकारियों (डीपीओ) के खिलाफ जांच वर्षों से लंबित है। कुछ डीपीओ ऐसे भी हैं, जिनके खिलाफ पिछले 12 वर्ष से अधिक समय से जांच चल रही है।
ऐसे ही कई डीपीओ के जांच में फंसे होने के बावजूद उन्हें प्रमोशन दे दिया गया है। वहीं, कई मामलों में जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी जा चुकी है लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हो पाई है। दरअसल, आईसीडीएस निदेशालय से लेकर शासन तक बाबुओं व अधिकारियों के कॉकस की जड़ें इतनी गहरी हैं कि इनके स्तर पर हो रही घालमेल की जानकारी की भनक तक विभाग के बड़े अधिकारियों को नहीं लग पाती है।
इस कॉकस के प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मातहतों से वसूली करने, सहायिकाओं से प्रोन्नति के नाम पर धन वसूली और महिला सहकर्मी से छेड़छाड़ करने जैसे गंभीर आरोप से घिरे डीपीओ के खिलाफ हुई जांच में हुई कार्रवाई का किसी को पता तक नहीं चल पाया।
विज्ञापन
लखनऊ और कानपुर में तैनात रहे डीपीओ के खिलाफ मंडलायुक्त से जांच कराई गई थी लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। कई डीपीओ के खिलाफ जांच करने की मियाद दो वर्ष पहले ही पूरी हो चुकी है। पर, जांच रिपोर्ट कहां गई और उस पर क्या कार्रवाई हुई, कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं।
विज्ञापन
ऐसे ही कई डीपीओ के जांच में फंसे होने के बावजूद उन्हें प्रमोशन दे दिया गया है। वहीं, कई मामलों में जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी जा चुकी है लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हो पाई है। दरअसल, आईसीडीएस निदेशालय से लेकर शासन तक बाबुओं व अधिकारियों के कॉकस की जड़ें इतनी गहरी हैं कि इनके स्तर पर हो रही घालमेल की जानकारी की भनक तक विभाग के बड़े अधिकारियों को नहीं लग पाती है।
विज्ञापन
इस कॉकस के प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मातहतों से वसूली करने, सहायिकाओं से प्रोन्नति के नाम पर धन वसूली और महिला सहकर्मी से छेड़छाड़ करने जैसे गंभीर आरोप से घिरे डीपीओ के खिलाफ हुई जांच में हुई कार्रवाई का किसी को पता तक नहीं चल पाया।
विज्ञापन
लखनऊ और कानपुर में तैनात रहे डीपीओ के खिलाफ मंडलायुक्त से जांच कराई गई थी लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। कई डीपीओ के खिलाफ जांच करने की मियाद दो वर्ष पहले ही पूरी हो चुकी है। पर, जांच रिपोर्ट कहां गई और उस पर क्या कार्रवाई हुई, कोई मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं।
कई मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान लेने पर जांच शुरू हुई थी लेकिन इन मामलों को भी शासन में दबा दिया गया है। मुरादाबाद की डीपीओ के खिलाफ वित्तीय अनियमितता की शिकायत पर वर्ष 2011 में ही जांच शुरू हुई थी। ऐसे ही भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता व कदाचार के मामले में एक डीपीओ के खिलाफ वर्ष 2016 से ही जांच चल रही है लेकिन उनका तबादला करके मामले को दबा दिया गया।
इन डीपीओ के खिलाफ चल रही जांच
भरत प्रसाद, राजीव सिंह, मनोज राव, शैलेंद्र राय, आदर्श मिश्रा, अखिलेंद्र दूबे, अनुपमा शांडिल्य, शुभांगी कुलकर्णी, विजयश्री और आरुति यादव।
भरत प्रसाद, राजीव सिंह, मनोज राव, शैलेंद्र राय, आदर्श मिश्रा, अखिलेंद्र दूबे, अनुपमा शांडिल्य, शुभांगी कुलकर्णी, विजयश्री और आरुति यादव।
हमारी सरकार की जीरो टालरेंस की नीति है। लिहाजा जांच लटकाए रखना गंभीर मामला है। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री को दूंगी ताकि भ्रष्टाचार से घिरे डीपीओ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके। -प्रतिभा शुक्ला, महिला एवं बाल कल्याण राज्यमंत्री