एनआरसी पर सियासत देश के लिए खतरनाक, राष्ट्रहित पर किसी के दबाव में नहीं आएंगे: गृहमंत्री राजनाथ
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केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि असम में एनआरसी के मुद्दे पर सियासत करना देश की सुरक्षा के लिए घातक है। देशहित के मुद्दों पर सरकार किसी दबाव में नहीं आने वाली। एनआरसी का गठन 1951 में ही हो गया था लेकिन वोट बैंक की राजनीति करने वाले इसे टालते रहे। इस मुद्दे पर असम के प्रचंड आंदोलन को देखकर राजीव गांधी ने बतौर पीएम यह फैसला किया था। डॉ. मनमोहन सिंह ने भी 2005 में इस पर सहमति जताई थी। विरोध करने वालों के सियासी स्वार्थ हैं। देश की सुरक्षा से जुड़े सवालों पर केंद्र सरकार सियासी विरोध की परवाह नहीं करने वाली। सिंह ने यह बातें रविवार को यहां ‘अमर उजाला’ से बातचीत में साझा की। बातचीत के प्रमुख अंश...
सवाल- एनआरसी पर विरोध शुरू हो गया है। खासतौर से पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के जो तेवर हैं, उससे क्या देश में संघर्ष का माहौल नहीं बनेगा?
जवाब- वोट बैंक की राजनीति करने वाले विरोध कर रहे हैं। यह मुद्दा देश की सुरक्षा का है। पर, कुछ लोगों को देश से ज्यादा वोट की चिंता है, वही लोग इसका विरोध कर राजनीति कर रहे हैं। असम के नागरिकों की मांग पर एनआरसी लागू हुआ है। पूरी प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही है। कई बार कहा जा चुका है कि यह ड्राफ्ट है अभी अंतिम रजिस्टर नहीं बना है। लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने का पूरा मौका दिया जा रहा है। फिर भी अगर कहीं किसी को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से हटाया गया तो वह विदेशी न्यायाधिकरण में अपील कर सकता है।
'असमी व बंगाली संघर्ष होने के दूर-दूर तक आसार नहीं'
सवाल- कहीं इससे असमी बनाम बंगाली संघर्ष तो नहीं शुरू हो जाएगा?
जवाब- इसकी दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है। बंगाल के लोग और बांग्लाभाषियों का भी देश की सुरक्षा, स्वाभिमान और सम्मान के प्रति दूसरे नागरिकों की तरह ही नजरिया है। केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क है। ऐसा नहीं हो पाएगा। कुछ नेता डर फैलाना चाहते हैं लेकिन सरकार असम और बंगाल दोनों ही जगह के लोगों की सुरक्षा को लेकर सतर्क है।
सवाल- पाकिस्तान में इमरान खान के नेतृत्व में सरकार बनने से कश्मीर पर क्या असर पड़ेगा?
जवाब- कश्मीर की स्थिति पहले से काफी बेहतर है। रोज आतंकी मारे जा रहे हैं। मानता हूं कि अभी वहां बहुत कुछ करने की जरूरत है। जहां तक इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार का सवाल है तो उम्मीद करता हूं कि वह सेना के इशारे पर काम नहीं करेगी। कश्मीर में आतंकियों का समर्थन नहीं करेगी।
सवाल- कई बार सरकार ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को चेताया लेकिन उसका असर नहीं दिखा?
जवाब- ऐसा नहीं है। पीएम मोदी के नेतृत्व में काम कर रही सरकार की नीतियों से दुनिया में भारत की साख बढ़ी है। पाकिस्तान अलग-थलग पड़ा है। आतंकियों के समर्थन पर दुनिया के कई देश पाकिस्तान पर उंगली उठा रहे हैं।
'जो अपना नेता नहीं तय कर सके ऐसे गठबंधन को जनता नहीं मानेगी'
जवाब- रणनीति को सार्वजनिक नहीं किया जाता। पर, हम महागठबंधन को लेकर बिल्कुल चिंतित नहीं हैं। नरेन्द्र मोदी पर लोगों का भरोसा पहले से बढ़ा है। चार वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था जिस तरह मजबूत हुई है। केन्द्र और प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लोगों को लाभ मिला है। लोग महसूस कर रहे हैं कि मोदी के नेतृत्व वाली सरकार गुड गवर्नेंस देने वाली है। राज्य में योगी सरकार का कामकाज भी जबर्दस्त है। इसका लाभ भाजपा को मिलेगा। जो गठबंधन अभी तक अपना एक नेता नहीं तय कर सका उसे जनता एक कैसे मानेगी।
एससी व एसटी एक्ट ओर प्रमोशन में आरक्षण पर ये है राजनाथ के विचार
सवाल- पर, एससी व एसटी एक्ट और प्रमोशन में आरक्षण क्या अगड़ों व पिछड़ों में नाराजगी नहीं बढाएगी?
जवाब- ऐसा नहीं है। मोदी सरकार ने सभी के सम्मान और सरोकारों की चिंता की है। पिछड़ों और सामान्य वर्ग के लोगों के लिए योजनाएं शुरू की गई हैं। सरकार इन वर्गों के कमजोर लोगों को भी संरक्षण और मदद पर विचार कर रही है। भाजपा के लोग पूरी परिस्थिति जनता को बताएंगे। जहां तक मुस्लिम ध्रुवीकरण का सवाल है तो महागठबंधन होने के बावजूद इस बार विरोधी दलों की दाल गलने वाली नहीं है।