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अयोध्या मुद्दा अब ग्रीक और लैटिन जैसा आउटडेटेड: सरेशवाला

Sun, 27 Dec 2015 01:19 PM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 27 Dec 2015 01:19 PM IST
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 Interview of Jafar Saresh wala.

मुसलमानों के लिए ‘तालीम की ताकत’ अभियान चला रहे मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के चांसलर, जाने-माने बिजनेसमैन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नजदीकी समझे जाने वाले जफर सरेशवाला अयोध्या मुद्दे को आउटडेटेड मानते हैं।

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वे कहते हैं, यूपी के 65 फीसदी वोटर 1990 के बाद पैदा हुए हैं। वे हिंदू हों या मुसलमान, उनके लिए अयोध्या ग्रीक और लैटिन की तरह है। आने वाले समय में राजनीतिक ध्रुवीकरण हिंदू-मुस्लिम नहीं, गरीबी-अमीरी के आधार पर होगा।
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सरेशवाला मानते हैं कि पाकिस्तान का अचानक दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का क्लासिक मास्टर स्ट्रोक है। यदि पहले और दूसरे विश्व युद्ध में एक करोड़ लोगों के हताहत होने के बावजूद यूरोप एक हो सकता है तो भारत-पाक बॉर्डरलैस क्यों नहीं हो सकते।
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राजधानी आए सरेशवाला ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कई मुद्दों पर बेबाकी से राय रखी। पेश हैं प्रमुख अंश :

तालीम के बिना हुनर का फायदा नहीं उठा पाते मुस्लिम

 Interview of Jafar Saresh wala.

सवाल-  ‘तालीम की ताकत’ का मकसद क्या है? क्या आप अपने प्रयास में कामयाब होंगे?

जवाब-
अब तक के अपने तजुर्बे, देश के अधिकतर राज्यों और 20-25 साल से यूपी से जुड़ा होने से समझा हूं कि मुसलमानों के सैकड़ों मसले हैं, लेकिन तालीम पा लेने से सभी का हल किया जा सकता है। मुसलमानों में हुनर है, लेकिन तालीम के बिना उसका फायदा नहीं उठा सकते।

10-12 साल तालीम के लिए मेहनत कर ली जाए तो पूरी जिंदगी बदल जाती है। अब साक्षर होने या शिक्षित होने भर से काम नहीं चलेगा। ‘तालीम की ताकत’ अभियान का मकसद मुसलमानों को एजुकेशन में एक्सीलेंस के लिए जागरूक करना है।

मुसलमान बिजनेसमैन कैसे आगे बढ़ें, दुकानदार कैसे बैंकिंग इंडस्ट्री का फायदा उठाएं, यह इस अभियान का हिस्सा है। मेरा अभियान बहुत कामयाब रहा है। लोगों में तालीम की भूख है। रविवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह मुसलमानों को संबोधित करने आ रहे हैं। मुसलमानों की तालीम पर केंद्रित कार्यक्रम में देश के किसी गृहमंत्री का यह पहला संबोधन होगा।

एएमयू, देवबंद व नदवा का मिल रहा है पूरा सपोर्ट

 Interview of Jafar Saresh wala.

सवाल-  अभियान को क्या अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, देवबंद और नदवा का सपोर्ट मिल रहा है ?

जवाब-
पूरा सहयोग और समर्थन है। रविवार के कार्यक्रम में एएमयू, देवबंद, नदवा, इंट्रीगल यूनिवर्सिटी, सभी जगह से लोग आ रहे हैं। हम मुसलमानों के बीच एजुकेशन को जनांदोलन बनाना चाहते हैं। उनके घरों में चर्चा होनी चाहिए कि आईएएस बनना  है या आईपीएस। जेईई देना है मेडिकल एंट्रेंस, बीकॉम के बाद कैट निकालना है या जीमैट।

सवाल-  पिछली बार आप नदवा में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष राबे हसन नदवी से मिलकर गए थे। यहां संदेश यह था कि आप उन्हें प्रधानमंत्री से मिलवाना चाहते थे लेकिन उन्होंने इन्कार कर दिया?

जवाब-
मैं तो कल (शुक्रवार को) भी नदवा गया था। वहां का नजरिया बड़ा पॉजिटिव है। मैं किसी को व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री से मिलवाना नहीं चाहता। मेरा कहना है कि मुसलमानों के सभी प्रभावशाली ग्रुपों को प्रधानमंत्री से मिलना चाहिए। किसी ने इससे इन्कार नहीं किया है। पर्सनल लॉ बोर्ड में 300 मेंबर हैं। मेजॉरिटी इस पक्ष में है कि पीएम से मिलना चाहिए। फिर हम अपने मसले प्रधानमंत्री के सामने नहीं रखेंगे तो उनका हल कैसे निकलेगा।

मोदी की पाक यात्रा से क्या होगा

 Interview of Jafar Saresh wala.

सवाल-  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल पाकिस्तान यात्रा करके बड़ा सरप्राइज दिया है, क्या इससे दोनों मुल्कों के रिश्ते सुधरेंगे?

जवाब-
यह मोदी का क्लासिक मास्टर स्ट्रोक है। आने वाली नस्लें इसका फायदा देखेंगी। लाहौर जाकर मोदी ने डिप्लोमेसी की नई इबारत लिखी है। वे आउट ऑफ बॉक्स सोचते हैं। वे लकीर के फकीर नहीं हैं। सरकारी सिस्टम को तोड़ना उनकी सोच में है। अपने अमन-चैन के लिए पड़ोसी से बेहतर ताल्लुक होने चाहिए और पड़ोसी दुखी भी नहीं होना चाहिए। पहले और दूसरे विश्व युद्ध में एक करोड़ लोग मारे गए थे, फिर भी यूरोप एक है। भारत और पाकिस्तान के बीच तो इतने लोग नहीं मारे गए, फिर हम बॉर्डरलैस क्यों नहीं हो सकते।

सवाल- मोदी की छवि को लेकर मुसलमानों में जो डर है, उसमें बदलाव आएगा ?

जवाब-
मुसलमानों में कहां डर है। मुसलमानों में मोदी की छवि के सवाल अब अप्रासंगिक हो गए हैं। गुजरात, देश और दुनिया के स्तर पर उन्होंने इसे साबित कर दिया है।

सवाल- आरोप लगते हैं कि आप मुसलमानों के बीच मोदी के लिए माहौल बना रहे हैं ?

जवाब-
मोदी को अब माहौल की जरूरत नहीं है। एक मुलाकात के दौरान बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के पिता सलीम खान ने मोदी से कहा था कि वे पॉलीटिशियन नहीं, लीडर हैं। मैं भी यही मानता हूं। सियासी लोग किसी काम को करने से पहले 25 बातें सोचते हैं। मोदी पाक गए तो क्या कुछ सोचा। ऐसा सिर्फ लीडर कर सकता है। पाकिस्तान से संबंध क्रिकेट खेलने, छोटी-मोची वार्ता से नहीं सुधरेंगे। जब ऊपर वाले (मोदी व नवाज शरीफ) सीधे मिलेंगे तभी संबंध सामान्य होंगे। मोदी ने इसी की शुरुआत की है।

मुसलमानों के लिए योजना की दी जानकारी

 Interview of Jafar Saresh wala.

सवाल- यूपी में मुसलमानों की स्थिति आपके सामने है, क्या उनके लिए आपकी खास योजना है?

जवाब-
यूपी के मुसलमानों के लिए मेरा कोई और एजेंडा या योजना नहीं है। केवल और केवल तालीम पर फोकस है। इसमें साधनहीनता आड़े नहीं आनी चाहिए। तालीम नहीं हासिल की तो मुसलमान हज कमेटी, वक्फ बोर्ड, और अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम तक सीमित रह जाएंगे। या फिर कोटे के तहत जगह भरने के लिए उनका उपयोग होता रहेगा।

सवाल- यूपी में आजम खां जैसे मुस्लिम लीडर हैं, उन्होंने जौहर विश्वविद्यालय बनाया है। आपके और उनके बीच तालमेल मुमकिन है?

जवाब-
  ‘तालीम की ताकत’ में हम किसी तरह का भेदभाव नहीं करेंगे। यदि आजम खां सहयोग लेना चाहेंगे तो उन्हें पूरा सहयोग करेंगे। आजम और मेरे बीच 10 मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन पांच मुद्दों पर हम एकराय हो सकते हैं। उन्हीं पांच मुद्दों पर बैठना चाहिए।

'धर्म के नाम पर अब ध्रुवीकरण नहीं होगा'

 Interview of Jafar Saresh wala.

सवाल- यूपी में राम मंदिर मुद्दा फिर गरमाने की कोशिश है। यह ध्रुवीकरण का खास हथियार है। आपको क्या लगता है?

जवाब-
अयोध्या में 25 साल से पत्थर तराशे जा रहे हैं। सूबे में जो वोटर हैं, उनमें 65 फीसदी 1990 के बाद पैदा हुए हैं। वे चाहे हिंदू हों या मुसलमान, उनके लिए अयोध्या मुद्दा ग्रीक और लैटिन की तरह है। मुझे हंसी आती है जब अयोध्या मुद्दे पर ध्रुवीकरण की बात कही जाती है। यह मुद्दा आउटडेटेड है, यूं कहें कि यह 1990 में ही आउटडेटेड हो गया था। इस मुल्क में अब धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण नहीं होगा। ध्रुवीकरण होगा तो अमीर-गरीब के नाम पर होगा।

सवाल- दादरी मामले में मोदी की चुप्पी रही, क्या आपको नहीं लगता कि उन्हें कुछ बोलना चाहिए था?

जवाब-
मोदी का मिजाज मैं जानता हूं। वे बोलते नहीं, करते हैं। 12 साल हमने गुजरात में इसे देखा है। दादरी कांड में शामिल लोग तो कुछ भी नहीं, उन्होंने बड़े-बड़े तीसमार खां को ठीक किया है। उन्होंने बिना नाम लिए बड़े-बड़ों को गुजरात में अप्रांसगिक बना दिया।

सवाल- क्या आपका इशारा प्रवीण भाई तोगड़िया और कुछ अन्य नेताओं की तरफ है?

जवाब-
खुद ही उनका हाल देख लीजिए, तरक्की की राह पर चलने के दौर में ऐसे लोग अप्रासंगिक हो जाते हैं।

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