पढ़े, यूपी के मुख्य सूचना आयुक्त का इंटरव्यू
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राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त पद पर चयनित सूबे के वरिष्ठतम आईएएस अधिकारी जावेद उस्मानी चाहते हैं कि लोगों को सूचना के लिए भटकना न पड़े। आम लोगों को सूचनाएं सही और समय से मिल सकें। अपनी जान को खतरे में डालकर घपले-घोटाले उजागर करने वाले व्हिसल ब्लोअर पर हमलों को लेकर भी वे बेहद गंभीर हैं।
उस्मानी मानते हैं कि व्हिसल ब्लोअर की सुरक्षा न सिर्फ सरकार, बल्कि आयोग के लिए भी चुनौती है। कहते हैं कि जरूरी हुआ तो इसके लिए सरकार से बात भी करेंगे।
प्रशासनिक सेवा के 36 साल लंबे कॅरिअर के अंतिम दिनों में तमाम उतार-चढ़ाव देखने वाले उस्मानी ने सीआईसी जैसे अहम पद पर चयनित होने के तत्काल बाद ‘अमर उजाला’ से विस्तार से बात की।
एचडी देवगौड़ा, इंद्रकुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी व डॉ. मनमोहन सिंह जैसे चार प्रधानमंत्रियों और मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव जैसे मुख्यमंत्रियों के साथ काम कर चुके राजस्व परिषद के मौजूदा चेयरमैन उस्मानी ने बातचीत में राज्य सूचना आयोग के बाबत अपनी भावी योजनाओं का खाका खींचा। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश-
मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में प्राथमिकताएं
सवाल: मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में क्या प्राथमिकताएं होंगी?
जवाब: आरटीआई को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू करेंगे। जनता को पब्लिक अथारिटी से पारदर्शी तरीके से सूचनाएं मिल सकें, यह सुनिश्चित करने का प्रयास होगा। आरटीआई एक्ट की भावना पर पूरी तरह से अमल तय करेंगे।
सवाल:सूचना आयोग में 60 हजार से ज्यादा मामले लंबित बताए जा रहे हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं। इन प्रकरणों के निस्तारण का क्या मैकेनिज्म होगा?
जवाब: आयोग में बड़ी संख्या में आरटीआई की अपीलें लंबित हैं, यह जानकारी मीडिया के जरिए पहले भी मिली है। मैं मामलों को समय से निपटाने की व्यवस्था बनाऊंगा। इसके लिए सिस्टम डवलप किया जाएगा। आरटीआई फाइल करने वाले को तय समय में सूचना मिले, उसे भटकना न पड़े तथा अपील करने पर समय से उसका निस्तारण हो, सिस्टम में इसके बंदोबस्त होंगे। इस सिस्टम की क्या शक्ल होगी, यह काम संभालने और आयोग की कार्यप्रणाली समझने के बाद तय करूंगा।
सवाल:आरटीआई में सूचना मांगने और उस पर दिए जाने वाले जवाब क्या आनलाइन किए जा सकते हैं? इस तरह की मांग काफी समय से उठ रही है?
जवाब: यदि सरकारी विभाग शासनादेश, विभाग से जुड़ी जनहित की सूचनाएं विभागों की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दें, तो मांगी जाने वाली सूचनाओं की संख्या कम हो जाएगी। सरकार स्तर पर इस ओर फोकस हुआ है। मगर, सूचनाएं अपडेट न होने की शिकायतें आती रहती हैं। सरकार से समन्वय कर इसे पूरी तरह से लागू कराया जाएगा।
इसके अलावा देखेंगे कि केंद्रीय सूचना आयोग व दूसरे राज्यों के सूचना आयोगों में किस-किस तरह की बेहतर तरीके अपनाए गए हैं। सूचना मांगने व जवाब देने के आनलाइन सिस्टम सहित जो भी बेहतर काम कहीं भी हो रहा होगा, आयोग में उसे तेजी से लागू करने का प्रयास करेंगे।
‘व्हिसल ब्लोअर’ की सुरक्षा है चुनौती
सवाल: ‘व्हिसल ब्लोअर’ की सुरक्षा चुनौती बनी हुई है। न्यायालय व केंद्र सरकार के स्तर से निर्देश के बावजूद इनकी हत्या तक की घटनाएं हो रही हैं। बतौर सीआईसी इस विषय पर क्या भूमिका निभाएंगे?
जवाब: यह बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। वजह, व्हिसल ब्लोअर खतरा मोल लेते हुए, अपना सर्वस्व दांव पर लगाते हुए आरटीआई एक्ट के तहत काम करते हैं। वास्तव में ये ही इस एक्ट के प्रहरी व सहायक हैं। उनके सवालों से कई लोग नाराज हो सकते हैं। ऐसे लोग बहुत ताकतवर होते हैं। ऐसे में व्हिसल ब्लोअर की सुरक्षा बड़ी चुनौती है। सीधे तौर पर सुरक्षा का काम सरकार का है। मगर आयोग के मुखिया के रूप में मैं अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सरकार से समन्वय करूंगा और व्हिसल ब्लोअर की सुरक्षा सुनिश्चित कराने का प्रयास करूंगा।
सवाल: सचिवालय में प्रमुख सचिवों व सचिवों के कार्यालय में आरटीआई से जुडे़ आवेदन ले लिए जाते हैं लेकिन रिसीव नहीं किए जाते। इससे आवेदक के पास सूचना मांगने का कोई प्रूफ ही नहीं रह जाता। वह भटकने को मजबूर होता है।
जवाब: सूचना अधिकार अधिनियम में आवेदन स्वीकार करने और उस पर कार्यवाही सुनिश्चित कराने के प्रावधान स्पष्ट हैं। कोई भी अधिकारी या विभाग सूचना आवेदन लेने से इन्कार नहीं कर सकता। सूचना आवेदन की रिसिविंग देना उसकी जिम्मेदारी है। अधिनियम के अनुसार सूचना आवेदन स्वीकार करना और उसकी पावती देना सुनिश्चित कराया जाएगा।
केंद्रीय सूचना आयोग से लेंगे मदद
सवाल: क्या ज्यादा मामले वाले मंडल अथवा जिलों में जाकर भी आयोग मामलों के निस्तारण पर गौर करेगा? इससे सूचना मांगने वालों को लखनऊ तक दौड़ लगाने से राहत मिलेगी?
जवाब: अधिनियम के दायरे में रहकर, सरकार से समन्वय स्थापित कर सूचना अधिकार को सशक्त बनाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। वैधानिक व्यवस्था तय है। आयोग उसे पूरी तरह से पालन कर लागू कराएगा। इसमें हर तरह के कदम शामिल हैं।
सवाल: आयोग के पास अपना भवन तक नहीं है। वादकारियों को इससे मुश्किलें पेश आती हैं। क्या इस ओर भी पहल करेंगे?
जवाब: देखेंगे कि केंद्रीय सूचना आयोग व दूसरे राज्यों के आयोग कैसे काम कर रहे हैं। यदि अलग भवन की आवश्यकता होगी तो नियमों के दायरे में उस पर गौर किया जाएगा। या, इसी कार्यालय में रहते हुए आयोग आने वाले लोगों की मुश्किलें किस तरह दूर की जा सकती हैं, उस पर काम करेंगे।
ये हैं उस्मानी के कॅरिअर की उपलब्धियां
- यूपी बोर्ड से हाईस्कूल में तृतीय व इंटरमीडिएट में पहला स्थान हासिल किया।
- अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में बीएससी में पहला स्थान।
- आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए, दोनों वर्ष में चौथी रैंक। इंडस्ट्री स्कॉलरशिप मिली।
- भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में ऑल इंडिया स्तर पर पहला स्थान।
- बुलंदशहर व गोरखपुर के डीएम रहे। तीन वर्ष तक एएमयू के रजिस्ट्रार रहे।
- दो वर्ष तक मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के सचिव रहे।
- साढ़े आठ वर्ष तक प्रधानमंत्री कार्यालय में चार प्रधानमंत्रियों के साथ संयुक्त सचिव रहे।
- 2001-04 तक काठमांडू स्थित दूतावास में मिनिस्टर (इकोनॉमिक -कोऑपरेशन) रहे।
- 2007-10 तक विश्व बैंक में तैनात रहे।
- अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसलवेनिया में विजिटंग स्कॉलर। ‘क्लाइमेट चेंज का भारत पर प्रभाव’ विषय पर अध्ययन। 2014 में इस पर किताब भी प्रकाशित हुई।
- मार्च 2012 से मई 2014 तक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार में मुख्य सचिव।
- वर्तमान में राजस्व परिषद के चेयरमैन व आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष।