कुशीनगर को बड़ा तोहफा, 80 करोड़ मंजूर
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बौद्ध सर्किट में शामिल कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए शासन ने पहली किस्त के रूप में 80 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं। पहले रन-वे बनेगा और फिर टर्मिनल का निर्माण होगा। निर्माण एजेंसी को एनओसी की कार्यवाही प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं।
बुद्धिस्ट सर्किट का महत्वपूर्ण स्थल होने के कारण पर्यटन विभाग ने कुशीनगर में पीपीपी मॉडल पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण का काम शुरू किया था। शासन ने छह माह पूर्व इसे बनाने की जिम्मेदारी नागरिक उड्डयन विभाग को दे दी। एयरपोर्ट निर्माण के लिए 569 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है।
पहले चरण में एयरपोर्ट का निर्माण, सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार का काम होगा। सचिव नागरिक उड्डयन एसके रघुवंशी ने बताया कि मेसर्स राइट्स लिमिटेड ने टर्मिनल बिल्डिंग को छोड़कर अन्य कामों के लिए 211 करोड़ 97 लाख 21 हजार रुपये लागत का एस्टीमेट तैयार किया था।
व्यय वित्त समिति ने अक्तूबर में निर्माण लागत घटाकर 199 करोड़, 41 लाख 83 हजार रुपये करते हुए इसका अनुमोदन कर दिया था। इसमें 11 फीसदी की दर से कंसल्टेंसी फीस और उस पर 14 प्रतिशत की दर से सर्विस टैक्स भी शामिल है।
ये जारी किए गए आदेश
रघुवंशी ने बताया कि शासन ने एस्टीमेट लागत की पहली किस्त के रूप में 80 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए हैं। उन्होंने उड्डयन निदेशक को निर्देश दिए हैं कि सभी अनापत्तियां एवं पर्यावरणीय क्लीयरेंस प्राप्त करके निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाए। प्रोजेक्ट का मानचित्र लोकल अथारिटी से स्वीकृत कराया जाए।
उन्होंने कहा कि कंपनी ने लिफ्ट, स्ट्रीट लाइट्स, नेविगेशनल और कम्युनिकेशन सिस्टम, रन-वे, एप्रोच व एप्रन लाइटिंग की दरें बजटरी ऑफर/कोटेशन के आधार पर प्रस्तावित की हैं।
इसलिए इनके निर्माताओं से प्रतिस्पर्धा के आधार पर लागत दरें प्राप्त की जाएं। उन्होंने एयरपोर्ट के निर्माण के लिए विभिन्न मदों में खर्च की गई धनराशि का विवरण हर माह की 7 तारीख तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
राजकीय निर्माण निगम बनाएगा टर्मिनल
रन-वे के बाद एयरपोर्ट के टर्मिनल का निर्माण होगा। यह काम राजकीय निर्माण निगम को सौंपा गया है। एयरपोर्ट के विभिन्न काम एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के समन्वय से होंगे। यहां एयरपोर्ट बनने से कुशीनगर राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पयर्टन के नक्शे पर आएगा। खासतौर से एशिया के बौद्ध मतावलंबी देशों के लोगों का आवागमन बढ़ेगा। उड्डयन सेवाओं का भी विस्तार होगा।