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मोदी 'महाभारत' में हारे जोशी, पर चिंगारी बाकी

Mon, 10 Mar 2014 01:57 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 10 Mar 2014 01:57 PM IST
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internal dispute over assembly seats in bjp

भाजपा नेतृत्व अपने ही दांव में उलझ गया। घर का झगड़ा चौराहे पर आ गया। एक-दूसरे को निपटाने के चक्कर में पार्टी के निपटने का खतरा खड़ा हो गया।

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भले ही मुरली मनोहर जोशी शांत हो गए हों लेकिन पार्टी की समस्या यहीं खत्म नहीं हो जाती। यह आशा भी नहीं दिखाई दे रही है कि पार्टी के भीतर सुलगी अंसतोष व गुटबाजी की चिंगारी पूरी तरह बुझ गई है।

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जिस तरह की स्थितियां बन गई है। उसके चलते पार्टी नेताओं के झगड़े आसानी से खत्म होते नहीं दिखते।

और ऐसे आया झगड़ा चौराहे पर

internal dispute over assembly seats in bjp

सवाल यह भी उठने लगे हैं कि पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व का क्या डॉ. जोशी व टंडन जैसे नेताओं के साथ भी संवाद नहीं है।

भाजपा की केंद्रीय टीम के एक सदस्य जो कुछ बताते हैं, उससे पार्टी में टिकटों पर घमासान की पूरी कहानी पर से परदा उठ जाता है।

कहानी के अनुसार, सारी समस्या अपनी पसंद को थोपने और दूसरों को निपटाने के लिए चली गई गोटों के कारण खड़ी हुई है।

पार्टी के भीतर कई नेता विरोध में खड़े हो गए और हालात ऐसे उत्पन्न हो गए कि घर का झगड़ा चौराहे पर सार्वजनिक होने लगा।

हालात ने ऐसा दिलचस्प मोड़ लिया कि कभी राजनाथ सिंह के संरक्षक माने जाने वाले डॉ. जोशी ही अपने पुराने शिष्य के विरोध में मुखर हो गए।

दिल्ली बैठक में कुछ इस तरह शुरू हुआ विवाद

internal dispute over assembly seats in bjp

जानकारी के मुताबिक, डॉ. जोशी को आपत्ति इस पर थी कि उनकी वाराणसी सीट पर टिकट बदलने की चर्चाएं कहां से शुरू होती हैं।

वह इस बात से भी नाराज दिखे कि उनसे अभी तक इस विषय में पार्टी की तरफ से कोई बात नहीं की गई और संघ के एक पदाधिकारी को उनके पास समझाने के लिए भेज दिया गया।

उन्होंने कहा कि उनसे सीधे बात क्यों नहीं की जाती और विवाद खड़ा करके उनकी छवि खराब की जा रही है। इस पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि आज की बैठक का यह एजेंडा नहीं है।

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और दूसरे सीटों पर भी बवाल

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भले ही डॉ. जोशी ने तेवर ठंडे कर लिए हों। पर, असंतोष की चिंगारी सिर्फ वाराणसी और लखनऊ में ही नहीं सुलग रही है। अन्य कई सीटों को लेकर भी हालात कुछ इसी तरह के बना दिए गए हैं।

लोकसभा के पिछले चुनाव में मिर्जापुर सीट से पार्टी के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश सिंह के पुत्र अनुराग चुनाव लड़े थे। अपना दल से समझौते में इस सीट को भी देने की बात कही जा रही है।

संतकबीरनगर सीट से पिछले चुनाव में पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमापति राम त्रिपाठी के पुत्र शरद त्रिपाठी मैदान में उतरे थे।

वह बहुत कम अंतर से चुनाव हारे। पर, इस सीट पर अभी एक सप्ताह पहले पार्टी के एक उपाध्यक्ष का नाम आगे बढ़ा दिया गया।

चालें यहां भी चलीं गईं

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पार्टी का हर आदमी जानता है कि केसरीनाथ त्रिपाठी इलाहाबाद से टिकट के दावेदार है।

पर, इस सीट पर पार्टी के कुछ नेता बसपा के नंदगोपाल नंदी को लाकर चुनाव लड़ाने की कोशिश में लगे हैं। कलराज मिश्र कानपुर से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। पर, कानपुर का एक गुट उनका विरोध कर रहा है।

इस गुट को पार्टी की राष्ट्रीय टीम के एक सदस्य का संरक्षण भी बताया जा रहा है। जो स्थिति है उससे टिकटों के बाद की स्थिति जटिल हो सकती है।

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