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मोदी नहीं, सपाई बढ़ा रहे मुलायम की टेंशन

Sat, 12 Jul 2014 08:28 AM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 12 Jul 2014 08:28 AM IST
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internal conflict in Samajwadi Party

वर्तमान राजनीतिक हालात में यही माना जा रहा है कि सपा को भाजपा से चुनौती मिल रही है, पर सच्चाई तो कुछ और है, जो अब सामने आने लगी है। सपा में अध्यक्ष पद को लेकर कार्यकर्ताओं में आंतरिक कलह कम होने का नाम नहीं ले रही है।

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वहीं लोकसभा चुनाव में हार के बाद संगठन के पुनर्गठन में भी समाजवादी पार्टी की गुटबंदी नहीं थम रही है। पिछले दिनों नामित किए गए जिलाध्यक्षों के खिलाफ कई जिलों में लामबंदी शुरू हो गई है।
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कुछ जगह तो धरना, प्रदर्शन तक हुए हैं। बागपत में 13 दिन में ही अध्यक्ष को हटाने के बाद भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमा नहीं है।

सपा ने लोकसभा चुनाव में हार की समीक्षा के बाद आठ जून को फीरोजाबाद, मैनपुरी, कन्नौज, बदायूं, आजमगढ़, अमेठी और रायबरेली को छोड़कर पार्टी की सभी जिला एवं महानगर इकाइयां और प्रकोष्ठ भंग कर दिए थे। अब इन सभी जिलों में अध्यक्ष नामित कर दिए गए हैं।

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मुलायम से सलाह लेकर की गई तैनाती

internal conflict in Samajwadi Party

अध्यक्षों के मनोनयन के बाद जिलों में सपा की राजनीति गरमा गई है। ज्यादातर जिलों में अध्यक्षों की तैनाती प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी मुखिया मुलायम सिंह से सलाह मशविरा करके की है।

इनमें पुराने और वफादार लोगों को तरजीह दी गई है। कुछ जिलों में ऐसे नेताओं को भी संगठन की कमान मिल गई है जो लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी में शामिल हुए थे।

बागपत में नगर पालिका के चेयरमैन राजुद्दीन ने लोकसभा चुनाव के समय अखिलेश की सभा में सपा का दामन थामा था। उन्हें जिलाध्यक्ष बनाए जाने का जिले के कई सपा नेताओं ने विरोध किया।

नाराजगी देखते हुए 13 दिन में ही राजुद्दीन को हटाकर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ओमकार यादव को जिला अध्यक्ष बना दिया गया। अब राजुद्दीन खेमा उनका विरोध कर रहा है। यादव के खिलाफ प्रदर्शन हो चुके हैं, उनके पुतले जलाए जा चुके हैं।

यहां भी गुटबंदी

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घोषित जिलाध्यक्षों के विरोध का सिलसिला बागपत तक ही सीमित नहीं है।

बिजनौर, बुलंदशहर, मेरठ, अलीगढ़, अमरोहा समेत पश्चिमी यूपी के ज्यादातर जिलों में जिलाध्यक्षों के खिलाफ लामबंदी हो रही है।

कई नेता लखनऊ पहुंचकर विरोध जता रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पूर्वांचल के कई जिलों में भी अध्यक्ष पद पर मनोनयन को लेकर गुटबंदी दिखाई पड़ रही है। कुछ जगह तो मुखर भी हो चुकी है।

नजर प्रदेश की टीम पर

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जिलाध्यक्ष पद के दावेदार रहे कई जिलों के पुराने नेताओं की नजर अब प्रदेश कार्यकारिणी के गठन पर है। उन्हें उम्मीद है कि जिले में नजरअंदाज किए जाने के बाद उन्हें प्रदेश की टीम में समायोजित किया जा सकता है। ऐसे नेता जोड़तोड़ में जुटे हुए हैं।

पुनर्गठन में लगेगा अभी वक्त

सपा ने भले ही जिला अध्यक्षों की घोषणा कर दी हो लेकिन अभी प्रदेश इकाई का गठन होना बाकी है। प्रदेश स्तर पर पांच प्रकोष्ठों में भी अध्यक्ष नामित किए जाने हैं।

जिला स्तर पर 14 प्रकोष्ठों का गठन भी होना बाकी है। ऐसी संभावना है कि इस माह के अंत तक ही संगठन को फिर से खड़ा करने का काम पूरा हो सकेगा।

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