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खेतों को सींचने के बजाय फसलें तबाह कर रहीं नहरें, सुल्तानपुर और रायबरेली में पानी छोड़ते ही कटीं नहरें

Tue, 22 Dec 2020 01:03 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 22 Dec 2020 01:03 PM IST
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Instead of irrigating the fields, the crops are destroying canals, the canals cut off after releasing water in Sultanpur and Rae Bareli
बर्बाद हुई फसलें - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में खेतों को सींचने के बजाय नहरें फसलें तबाह कर रही हैं। सिल्ट सफाई और ड्रेसिंग का काम ठीक से न होने के कारण ये हालात पैदा हुए हैं। राजधानी लखनऊ से सटे जिले सुल्तानपुर और रायबरेली में यह हाल है तो बाकी जिलों का अंदाजा लगा सकते हैं। वहीं, सिंचाई विभाग ने अपने रिकॉर्ड में लक्ष्य से ज्यादा काम दिखाया है। 
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गौरतलब है कि इस बार रबी से पहले 42,215 किलोमीटर लंबी नहरों की सफाई का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए 155 करोड़ रुपये बजट दिया गया। सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, अक्तूबर से लेकर 15 दिसंबर तक 43 हजार किमी नहरों की सिल्ट सफाई हो चुकी है। इसमें 15,000 किमी राजवाह (बड़ी नहरें) और 28000 किमी माइनर (छोटी नहरें) हैं। प्रदेश में 74 हजार किमी लंबा नहरों का जाल है। इसमें 25 हजार किमी राजवाह और 34 हजार किमी माइनर हैं। शेष मेन कैनाल हैं, जिनकी सिल्ट-सफाई रुटीन में नहीं की जाती हैं। विभाग का दावा है कि इस बार आधे से ज्यादा राजवाह और शत-प्रतिशत माइनर साफ हो चुकी हैं। रुटीन सफाई बजट में उन्हीं माइनर को छोड़ा गया है तो किसी न किसी अन्य योजना के तहत साफ की जा चुकी हैं।
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रायबरेली जिले में करीब 1074 किमी नहरों की सफाई रबी की फसल से पहले कराने का दावा किया गया। लेकिन वहां पानी छोड़ते ही पटरियों की कटान से गेहूं की फसल बर्बाद होने लगी। सफाई के साथ ही पटरियों की मरम्मत कराई जानी चाहिए थी। मगर यह काम नहीं हुआ। डलमऊ, राही, सलोन, जगतपुर और दीनशाह गौरा ब्लॉक क्षेत्र में पानी तो आया, पर ठीक से सफाई नहीं होने के कारण हर दिन नहरों में कटान होने से फसलें तबाह हो रही हैं। रायपुर महेरी माइनर में दो बार कटान हो चुका है। इससे अभी तक 500 बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हो चुकी है। गढ़ीखास माइनर कटने से करीब 50 बीघे फसल जलमग्न हुई। महराजगंज-रायबरेली रोड पर भी पानी भर गया। डलमऊ पंप कैनाल से निकली ब्रांच नहर की पटरी के कटान से करीब 100 बीघे फसल डूब गई। सुट्ठा हरदो माइनर में पानी छोड़े जाने से मवई गांव के पास उफना गई। इससे आसपास के करीब 50 बीघे की फसल जलमग्न हो गई। 
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इसी तरह सुल्तानपुर में नहरों में पानी छोड़े जाते ही नहर विभाग के 828 किमी सिल्ट सफाई के दावे की पोल खुल गई। कटान से करीब 700 बीघा फसल जलमग्न हो गई। चना, मटर, गेहूं और सरसों की फसल चौपट हो गई है।

साल में अब सिर्फ एक बार होती सिल्ट सफाई
पहले खरीफ और रबी दोनों ही सीजन में सिल्ट सफाई होती थी, लेकिन वर्ष 2017-18 से सिर्फ रबी से पहले साल में सिर्फ एक बार सिल्ट सफाई का फैसला किया गया। सिंचाई विभाग इस बार कराई गई सफाई का सत्यापन करवा रहा है। विभाग का कहना है कि सत्यापन के बाद ही ठेकेदारों को भुगतान किया जाएगा।

 

इनका कहना :
जहां भी नहरों की सिल्ट-सफाई ठीक से न कराने की शिकायत मिलेगी, वहां तत्काल जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सुल्तानपुर में दो जगहें से शिकायतें मिली हैं। मुख्य अभियंता शारदा सहायक को जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
-राजीव सिंह, विभागाध्यक्ष, सिंचाई



 

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