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Lucknow News: इंस्पेक्टर सआदतगंज और चौकी प्रभारी कश्मीरी मोहल्ला निलंबित
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हत्या के आरोपी।
लखनऊ। सआदतगंज के नौबस्ता में सोमवार को हुए तिहरे हत्याकांड ने पुलिस की कार्यशैली को एक बार फिर सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। पुलिस की लापरवाही के कारण पार्किंग और चबूतरा बनाने के मामूली विवाद ने तीन लोगों की जान ले ली। मंगलवार को बवाल बढ़ने पर पुलिस आयुक्त तरुन गाबा ने इंस्पेक्टर सआदतगंज संतोष कुमार आर्य और चौकी प्रभारी कश्मीरी मोहल्ला दरोगा अजय कुमार चौरसिया को निलंबित कर दिया।
मोहल्ले के लोगों ने स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि वारदात के एक दिन पहले शिवाजी तिवारी थाने गए थे। उस दौरान ऋषभ का चाचा राजेश शुक्ला मौजूद था। उसके खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई हुई थी। आरोप है कि वापस आने के बाद राजेश थाने में पुलिसवालों के साथ बैठा रहता था। लोगों ने उस पर पुलिस के लिए मुखबिरी करने का भी आरोप लगाया।
पड़ोस में रहने वाली मंजू शुक्ला ने आरोप लगाया कि ऋषभ ने कुछ समय पहले उनके बेटे अंशू पर हमला किया था। इसकी शिकायत लेकर वह थाने गई थीं। आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर उनसे 20 हजार रुपये वसूले गए पर सुनवाई नहीं की गई। रकम जुटाने के लिए मंजू को अपनी चेन भी बेचनी पड़ी थी।
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नाराज लोगों ने इंस्पेक्टर और चौकी इंचार्ज का भी नाम एफआईआर में बढ़ाने की मांग की। साथ ही पूरे थाने को बर्खास्त करने की मांग की। हालांकि, डिप्टी सीएम के पहुंचने के बाद लोगों की नाराजगी कम हुई। पुलिस आयुक्त का कहना है कि लापरवाही बरतने पर इंस्पेक्टर और चौकी इंचार्ज को निलंबित कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर इन पर विभागीय कार्रवाई होगी। हत्यारोपी ऋषभ समेत छह आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। प्रभारी सीजीएम एकलव्य सरोज ने सभी को सात नवंबर तक के लिए जेल भेज दिया।
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मोहल्ले के लोगों ने स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि वारदात के एक दिन पहले शिवाजी तिवारी थाने गए थे। उस दौरान ऋषभ का चाचा राजेश शुक्ला मौजूद था। उसके खिलाफ जिलाबदर की कार्रवाई हुई थी। आरोप है कि वापस आने के बाद राजेश थाने में पुलिसवालों के साथ बैठा रहता था। लोगों ने उस पर पुलिस के लिए मुखबिरी करने का भी आरोप लगाया।
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पड़ोस में रहने वाली मंजू शुक्ला ने आरोप लगाया कि ऋषभ ने कुछ समय पहले उनके बेटे अंशू पर हमला किया था। इसकी शिकायत लेकर वह थाने गई थीं। आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर उनसे 20 हजार रुपये वसूले गए पर सुनवाई नहीं की गई। रकम जुटाने के लिए मंजू को अपनी चेन भी बेचनी पड़ी थी।
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नाराज लोगों ने इंस्पेक्टर और चौकी इंचार्ज का भी नाम एफआईआर में बढ़ाने की मांग की। साथ ही पूरे थाने को बर्खास्त करने की मांग की। हालांकि, डिप्टी सीएम के पहुंचने के बाद लोगों की नाराजगी कम हुई। पुलिस आयुक्त का कहना है कि लापरवाही बरतने पर इंस्पेक्टर और चौकी इंचार्ज को निलंबित कर दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर इन पर विभागीय कार्रवाई होगी। हत्यारोपी ऋषभ समेत छह आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। प्रभारी सीजीएम एकलव्य सरोज ने सभी को सात नवंबर तक के लिए जेल भेज दिया।