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तस्वीरों में नजर आई आडवानी की भाजपा से दूरी
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Sat, 28 Sep 2013 02:19 AM IST
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आडवाणी के चार घंटा के लखनऊ दौरे में भी भाजपा के भीतर की कहानी बाहर आ ही गई। दरारें भी दिखीं तो दिलों की दूरियां भी। रही-सही कसर पूरी कर दी, कार्यक्रम स्थल कन्वेंशन सेंटर पर लगी तस्वीरों ने।
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बाकी जो बचा नेताओं के भाषणों ने पूरा कर दिया। इससे साफ हो गया कि सामूहिक नेतृत्व व फैसले का दावा करने वाली भाजपा में कम से कम यूपी में लोग एक साथ नहीं हैं। मोदी के फैक्टर का प्रभाव भी कार्यक्रम में दिखा।
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भाजपा के शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी लखनऊ कन्वेंशन सेंटर का लोकार्पण करने आए तो हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने वालों में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी भी थे।
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पर कार्यक्रम में वह नहीं दिखे। कार्यक्रम के बाद में आडवाणी को वापस छोड़ने वालों में फिर वह शामिल थे। आडवाणी जैसे बड़े नेता के आने पर जैसा माहौल दिखना चाहिए था, वह नहीं दिखा।
एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा भी कि लखनऊ ने आज निराश कर दिया। आडवाणी को विदा करने सिर्फ पांच लोग हवाई अड्डे पर पहुंचे।
वहीं, कन्वेंशन सेंटर के लोकार्पण के लिए छपा कार्ड भी अपने आप में बहुत कुछ कह रहा था। कार्ड में एक तरफ अटल बिहारी वाजपेयी की फोटो के नीचे स्वप्नद्रष्टा तो दूसरी तरफ लालजी टंडन की फोटो के नीचे साकारकर्ता लिखा हुआ है।
इन फोटुओं पर पार्टी के भीतर खींचतान इस बात को लेकर है कि इस भवन के निर्माण के लिए भाजपा के ही कई अन्य विधायकों व सांसदों ने भी अपनी निधि से धन दिया है।
इसलिए अकेले टंडन अटल की विरासत का उत्तराधिकारी होने का दावा नहीं कर सकते। कार्यक्रम स्थल पर लगे चार बैनरों में दो पर अगल-बगल आडवाणी व डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और दूसरे पर टंडन ने अटल बिहारी के साथ अपना फोटो वाला बैनर लगवाया था।
हालांकि टंडन ने अपने भाषण में कन्वेंशन सेंटर के लिए धन देने वाले तमाम उन लोगों के नाम लिए जिनके नाम कार्ड, पोस्टर या उद्घोषक की जुबान पर नहीं दिख रहे थे। पर इससे लोग संतुष्ट नहीं हो पाए।