INS Gomti: 34 साल बाद सेवामुक्त हुए आईएनएस गोमती को लाने में प्रशासन की सांसें फूलीं, अब उपकरण आएंगे
नौसेना में 34 साल की सेवाएं देने के बाद सेवामुक्त हुए आईएनएस गोमती जहाज को लखनऊ नहीं लाया जा सकेगा। 125 मीटर लंबे, 4200 टन वजनी जहाज को जल व सड़क मार्ग से लाने में प्रशासन की सांसें फूल गई हैं। अब इसके उपकरण लाए जाएंगे जो कि म्यूजियम की शोभा बढ़ाएंगे।
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राजधानी लखनऊ के पर्यटन में चार चांद लगाने वाला आईएनएस गोमती अब यहां नहीं लाया जा सकेगा। 125 मीटर लंबे और 4200 टन वजनी जहाज को लखनऊ लाने में प्रशासन की सांसें फूल गई हैं। लिहाजा, अब इसके उपकरण रडार, मशीन गन, तोपें, नेविगेशन सिस्टम आदि ही लाकर छतर मंजिल परिसर के म्यूजियम में लगाए जाएंगे। जहाज के उपकरण लाने को लेकर सरकार व नौसेना के बीच एमओयू हुआ है।
नौसेना में 34 वर्ष की गौरवशाली सेवा देने के बाद आईएनएस गोमती शनिवार को सेवामुक्त हो गया। इसे लेकर मुंबई में कार्यक्रम भी हुआ। गौरतलब है कि छतर मंजिल परिसर में नदी किनारे गोमती शौर्य स्मारक बनना है। इसमें आईएनएस गोमती को लाकर लगाने की योजना थी, ताकि देशप्रेम व पर्यटन को बढ़ावा मिले। इसे लेकर पर्यटन, एलडीए सहित विभिन्न विभागों की नौसेना अधिकारियों के साथ कई चरणों में बैठक भी हुई।
मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने पुरातत्व, पर्यटन, संस्कृति, एलडीए, नौसेना के अधिकारियों के साथ छतर मंजिल परिसर का गहन निरीक्षण भी किया था। वहीं, जहाज के सेवामुक्त होने से पहले अधिकारियों ने इसे लखनऊ लाने के हर रूट पर मंथन किया। जलमार्ग से जहाज को लखनऊ लाने व सड़क मार्ग से इसे टुकड़ों में लाना नामुमकिन है, ऐसे में योजना में बदलाव कर दिया गया है। अब आईएनएस की जगह रडार, मशीन गनें, तोपें, नेविगेशन सिस्टम ही लाकर छतर मंजिल में बनने वाले म्यूजियम में लगाया जाएगा। ऐसे कई म्यूजियम कोच्चि में भी हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
...इसलिए मुश्किल हुआ जहाज लाना
योजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इतने बड़े जहाज को सड़क मार्ग से नहीं लाया जा सकता। ऐसे में इसे जलमार्ग से लाने पर मंथन हुआ, लेकिन नदी की गहराई कम होने व अन्य जलमार्गों से कनेक्टिविटी के चलते यह योजना भी काम न आ सकी। वहीं, ग्लोबमास्टर जैसे मालवाहक विमानों व ट्रेन से भी विमान को समूचा नहीं लाया जा सकता था। वहीं, जहाज को टुकड़ों में लाने का मकसद नहीं है।
बेहद खास है आईएनएस गोमती
आईएनएस गोमती की कमांड संभालने वाले कैप्टन सुदीप मलिक ने बताया कि 16 अप्रैल 1988 को आईएनएस गोमती तत्कालीन रक्षामंत्री केसी पंत की ओर से मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड से नौसेना में कमीशन हुआ था। यह गोदावरी श्रेणी का तीसरा और ऐसा पहला जहाज है, जिसमें सोवियत संघ व पश्चिमी देशों की तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। ऑपरेशन रेनेबो, ऑनरेशन द्वीप ऑफ लक्षद्वीप, ऑपरेशन नेवला में इसने अहम योगदान निभाया। कोंकण क्षेत्र में वर्ष 2005 में आई बाढ़ में भी इसने राहत पहुंचाने का काम किया।
उपकरण लाने के लिए हुआ एमओयू
पर्यटन एवं संस्कृत विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम का कहना है कि आईएनएस गोमती नौसेना से सेवामुक्त हो गया है। इसे लखनऊ लाकर नदी में डिस्प्ले करना मुश्किल है। लिहाजा छतर मंजिल परिसर में ओपेन एयर म्यूजियम बनाकर वहां जहाज के हिस्सों को प्रदर्शित किया जाएगा। जहाज के उपकरण लाने के लिए सरकार व नौसेना के बीच एमओयू हुआ है।