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कैंसर के इलाज में स्वदेशी थेरेपी लाएगी बड़ा बदलाव : प्रो. राहुल पुरवार
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प्रो. राहुल पुरवार
लखनऊ। केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान में नवीनतम औषधि अनुसंधान प्रवृत्तियों पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण शोधों पर चर्चा की। इनमें से कई शोधों का क्लीनिकल ट्रायल पूरा हो चुका है, लेकिन अभी आम लोगों तक पहुंचने में इन्हें कई चरण पार करने होंगे।
आईआईटी बॉम्बे के प्रो. राहुल पुरवार ने बताया कि कैंसर वैश्विक स्वास्थ्य संकट बना हुआ है और यह देश में मृत्यु दर का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि अपने देश में विकसित पहली सीएआर- टी सेल थेरेपी कैंसर उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। यह सेल थेरेपी प्रभावी, लेकिन अत्यधिक महंगी तकनीक है, जो भारत में उपलब्ध नहीं थी। उनकी टीम ने सुरक्षित एवं किफायती तकनीक विकसित की है, जिससे 300 से अधिक मरीजों को लाभ मिला है।
औरंगाबाद के वॉकहार्ट रिसर्च सेंटर से आए डॉ. सचिन एस भागवत ने एंटीबायोटिक्स के तेजी से बेअसर होने पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने नई तकनीक विकसित की है, जिससे प्रारंभिक स्तर पर 45 से अधिक मरीजों की जान बचाने में मदद मिली है।
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स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ जिनेवा के प्रो. डोमिनिक सोल्डाटी-फेवरे ने परजीवियों से होने वाले गंभीर रोगों पर अपनी शोध के बारे में बताया। फरीदाबाद के रीजनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी से आए प्रो. सुधांशु व्रति ने गंभीर वायरल संक्रमणों के उपचार से संबंधित शोध पर चर्चा की।
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आईआईटी बॉम्बे के प्रो. राहुल पुरवार ने बताया कि कैंसर वैश्विक स्वास्थ्य संकट बना हुआ है और यह देश में मृत्यु दर का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि अपने देश में विकसित पहली सीएआर- टी सेल थेरेपी कैंसर उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। यह सेल थेरेपी प्रभावी, लेकिन अत्यधिक महंगी तकनीक है, जो भारत में उपलब्ध नहीं थी। उनकी टीम ने सुरक्षित एवं किफायती तकनीक विकसित की है, जिससे 300 से अधिक मरीजों को लाभ मिला है।
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औरंगाबाद के वॉकहार्ट रिसर्च सेंटर से आए डॉ. सचिन एस भागवत ने एंटीबायोटिक्स के तेजी से बेअसर होने पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने नई तकनीक विकसित की है, जिससे प्रारंभिक स्तर पर 45 से अधिक मरीजों की जान बचाने में मदद मिली है।
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स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ जिनेवा के प्रो. डोमिनिक सोल्डाटी-फेवरे ने परजीवियों से होने वाले गंभीर रोगों पर अपनी शोध के बारे में बताया। फरीदाबाद के रीजनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी से आए प्रो. सुधांशु व्रति ने गंभीर वायरल संक्रमणों के उपचार से संबंधित शोध पर चर्चा की।