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भारतीय ज्ञान परंपरा को करना होगा पुनर्स्थापित : जेपी पांडेय
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कार्यक्रम में बोलते एकेटीयू के कुलपति।
लखनऊ। कालीचरण पीजी कॉलेज में भारतीय ज्ञान परंपरा: विविध आयाम पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। इसमें भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर चिंतन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एकेटीयू कुलपति प्रोफेसर जेपी पांडेय ने कहा, भारतीय ज्ञान परंपरा गुरु केंद्रित रही, लेकिन वर्तमान में हम इससे भटक गए हैं। वाह्य आक्रांताओं मुगलों, अंग्रेजों विशेषकर मैकाले ने जिस ज्ञान परंपरा को नष्ट किया हमें उसे पुनर्स्थापित करना होगा।
मुख्य वक्ता कुरूक्षेत्र विवि के पूर्व डीन प्रो. आरपी मिश्र ने कहा, भारतीय शिक्षा प्रकृति के साथ समन्वय पर आधारित थी और संवेदना के विकास पर अधिक जोर दिया जाता था। लेकिन वर्तमान शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थी संवेदनहीन बनाए जा रहे हैं। प्राचार्य प्रो. चन्द्र मोहन उपाध्याय ने कहा कि शोध की प्रक्रिया से गुजरते हुए हमें स्वयं को विश्वपटल पर स्थापित करना होगा। संगोष्ठी में देश के 15 राज्यों से लगभग 340 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन या ऑफलाइन सहभागिता की और 190 शोधपत्रों का वाचन किया गया।
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मुख्य वक्ता कुरूक्षेत्र विवि के पूर्व डीन प्रो. आरपी मिश्र ने कहा, भारतीय शिक्षा प्रकृति के साथ समन्वय पर आधारित थी और संवेदना के विकास पर अधिक जोर दिया जाता था। लेकिन वर्तमान शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थी संवेदनहीन बनाए जा रहे हैं। प्राचार्य प्रो. चन्द्र मोहन उपाध्याय ने कहा कि शोध की प्रक्रिया से गुजरते हुए हमें स्वयं को विश्वपटल पर स्थापित करना होगा। संगोष्ठी में देश के 15 राज्यों से लगभग 340 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन या ऑफलाइन सहभागिता की और 190 शोधपत्रों का वाचन किया गया।
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