लखनऊ: अमेरिकन राजदूत बोले- सामरिक शक्ति के विस्तार में भारत का करेंगे सहयोग
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अमेरिकन राजदूत कैनेथ जस्टर ने सोमवार को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारत की सामरिक शक्ति के विस्तार में पूरा सहयोग देने का भरोसा जताया है। जस्टर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सस्ती के बजाज लंबी चलाने वाले उत्पादों पर ज्याजा ध्यान देना चाहिए।
इस दौरान जस्टर ने बिना नाम लिए चीन के उत्पादों पर भी निशाना साधा। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि चीन को कोरोना वायरस से निबटाने के लिए अमेरिका हर संभव मदद कर रहा है।
जस्टर ने डिफेंस प्रदर्शनी के 11 संस्करण को लेकर कहा कि मुझे इस कार्यक्रम में बुलाए जाने पर सरकार और रक्षा मंत्रालय को धन्यवाद देना चाहता हूं। यह भारत के रक्षा उद्योग की प्रतिभा और नवाचार को देखने का एक शानदार अवसर है। उन्होंने कहा कि हम अपने सहयोग का विस्तार करने के अवसरों के लिए तत्पर हैं क्योंकि, भारत सरकार उत्तर प्रदेश के साथ-साथ तमिलनाडु में भी रक्षा औद्योगिक गलियारे भी स्थापित करना चाहती है।
दूर होनी चाहिए बाधाएं
जस्टर ने कहा कि दोनों देशों के उद्योगों के बीच प्रगाढ़ रिश्तों के बीच यह भी जरूरी है कि जो बाधाएं हैं, वे दूर की जानी चाहिए। यह हमारा उद्देश्य है कि औद्योगिक सहयोग में आने वाली बाधाएं चिह्नित हों। भारत और अमेरिका सरकार समस्याओं का समाधान निकाले, ताकि दोनों ही देशों के रक्षा संबंधी औद्योगिक रिश्ते और भी मजबूत हो सकें।
भारत में पैदा हो रहीं नौकरियां
जस्टर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधी सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। दोनों देशों की कंपनियों के बीच रक्षा व्यापार से भारत में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। हम रक्षा क्षेत्र में भारत के साथ उत्तरोत्तर सहयोग बढ़ाना चाहते हैं।
कम होनी चाहिए ऑफसेट दायित्व की कैपिंग
रक्षा सौदों में ऑफसेट दायित्व पर उन्होंने कहा कि भारत में यह नियम है, जिसे कंपनियां पंसद नहीं करती हैं। ऑफसेट दायित्व के तहत कंपनियां खुद निर्णय लेती हैं। इसमें हमारी सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है। उन्होंने ऑफसेट दायित्व के तहत निवेश करने की कैपिंग जितनी कम होगी, उतना ही ज्यादा निवेश आएगा। ज्यादा निवेश आने के लिए नियम-कायदे कम से कम होना चाहिए।
मैन्युफैक्चरिंग हब के लिए बढ़ाएं सहयोग
जस्टर ने कहा कि भारतीय रक्षा कंपनियों में आगे बढ़ने की काफी संभावनाएं हैं। भारत को वैश्विक विनिर्माण हब बनाया जा सकता है। लेकिन, यह काम रातोंरात नहीं हो सकता है। इसके लिए भारत को अमेरिका के साथ साझेदारी करनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक निवेश आ सके। उन्होंने कहा कि भारत का स्वेदशीकरण पर काफी जोर है। इसकेलिए जितना निवेश चाहिए, वो अकेले संभव नहीं है। इसलिए अमेरिका ने भारत को अधिकाधिक साझेदारी का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के रक्षा उत्पाद लंबे समय चलने वाले होते हैं।
80 बिलियन डॉलर पहुंचाना चाहते हैं रक्षा कारोबार
भारत में अमेरिका के राजदूत ने कहा कि भारत का अमेरिकी रक्षा उत्पाद कंपनियों के साथ 18 बिलियन डॉलर का कारोबार है। संवाददाताओं ने पूछा एट्टीन (18) या एट्टी (80)? इस पर जस्टर ने हंसते हुए कहा कि इसे हम 80 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना चाहते हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिकन सरकार कोई भी एमओयू साइन नहीं करती है। अमेरिकन कंपनियां ही किसी अन्य देश में ये समझौते करती हैं।
ट्रंप की भारत यात्रा के बारे में आधिकारिक जानकारी नहीं
एक सवाल के जवाब में जस्टर ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्तों को नई बुलंदियों पर पहुंचाना चाहता है। ट्रंप की भारत यात्रा के बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
कोरोना वायरस से निपटने के लिए दे रहे हरसंभव मदद
जस्टर ने कहा कि कोरोना वायरस के मामले में छवि खराब करने के चीन के अमेरिका पर आरोप ठीक नहीं हैं। हम उन्हें इस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए हरसंभव मदद दे रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीफ ऑफिसर ऑफ डिफेंस कॉर्पोरेशन कैप्टन डैनियल फिलियन और डिफेंस अटैशी आईलीन लॉबाकर भी मौजूद रहे।