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इंडिया गठबंधन: कांग्रेस के चुनाव न लड़ने के गहरे हैं सियासी अर्थ, कम सीटें मिलने के साथ हैं दूसरी वजहें भी

Fri, 25 Oct 2024 07:51 AM IST
रोहित मिश्र चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 25 Oct 2024 07:51 AM IST
सार

India Alliance: यूपी के उपचुनावों में कांग्रेस के प्रत्याशी मैदान में नहीं होंगे, कांग्रेस प्रत्याशी न उतारने का फैसला सोची-समझी रणनीति के तहत कर रही है। समझिए पूरा मामला...

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India Alliance: There are deep political implications of Congress not contesting the elections, apart from bei
यूपी में चुनाव नहीं लड़ेगी कांग्रेस। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन का दावा किया जा रहा है। लेकिन, असल में दिलों के मिलने पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। कांग्रेस के उपचुनाव नहीं लड़ने के फैसले से साफ है कि सपा से मिली दो सीटों से पार्टी संतुष्ट नहीं थी। दरअसल, कांग्रेस यूपी विधानसभा उपचुनाव में मझवां, फूलपुर, गाजियाबाद, खैर और मीरापुर सीट मांग रही थी। सपा ने गाजियाबाद और खैर सीट छोड़ी। कांग्रेस ने असंतुष्टि जताई। इस बीच सपा की ओर से कहा गया कि फूलपुर सीट भी दे सकते हैं, लेकिन बुधवार को यहां से सपा के मुज्तबा सिद्दीकी ने पर्चा दाखिल कर दिया।

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इसके बाद दिल्ली पहुंचे कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने शीर्ष नेतृत्व को पूरी स्थिति बताई। देर रात सपा ने सोशल मीडिया पर एलान किया कि पार्टी सभी नौ सीट पर चुनाव लड़ेगी। बृहस्पतिवार दोपहर बाद दिल्ली में कांग्रेस ने कहा कि भाजपा को हटाने के लिए सीट नहीं, जीत जरूरी है।
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सपा का प्रदेश नेतृत्व भले ही गठबंधन कायम होने की बात कह रहा है, लेकिन हालात कुछ और ही हैं। फूलपुर सीट से कांग्रेस के सुरेश यादव का पर्चा दाखिल करना इसका प्रमाण है। सपा की ओर से सीटें नहीं मिलने से कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय नेता ही नहीं, बल्कि कई सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करने वाले भी खफा हैं।
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लखनऊ समेत कई जगह पर संविधान बचाओ सम्मेलन करने वाले पूर्व जिला जज बीडी नकवी कहते हैं कि आपसी सामंजस्य बनाए रखने के लिए कांग्रेस को सीटें मिलनी चाहिए थीं। सामाजिक चेतना फाउंडेशन न्याय के सचिव महेंद्र मंडल कहते हैं कि कांग्रेस को सीटें नहीं देना सपा की हठधर्मिता है।

सीटें छोड़ने का 2027 में मिलेगा फायदा

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राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा - फोटो : ANI

जानकारों के मुताबिक, अब कांग्रेस नए सिरे से विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी करेगी ताकि गठबंधन की जरूरत पड़ने पर सपा से आमने-सामने बैठकर बात कर सके। ये सपा के लिए खतरे की घंटी हो सकता है।

इंडिया गठबंधन के भविष्य पर संकट
लोकसभा चुनाव में गठबंधन के साथ खड़े दल अब मैदान में हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी तीन उम्मीदवार उतार चुकी है। राष्ट्रीय जनवादी पार्टी, अपना दल कमेरावादी समेत कई दल अलग राह पर चल पड़े हैं। ऐसे में गठबंधन के भविष्य पर संशय है।

महाराष्ट्र फैक्टर का भी असर

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महाराष्ट्र विधानसभा चुुनाव। - फोटो : अमर उजाला।

कांग्रेस के यूपी में विधानसभा उपचुनाव से किनारा करने के पीछे महाराष्ट्र फैक्टर भी माना जा रहा है। महाराष्ट्र चुनाव को लेकर महा विकास अघाड़ी में सीट बंटवारे पर सहमति बन गई है। कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना (ठाकरे) के बीच 85-85 सीट पर रजामंदी बनी है। वहीं, सपा समेत अन्य सहयोगी दलों को 18 सीटें देने की बात हुई है। यहां सपा 12 सीटें मांग रही है और पांच पर उम्मीदवार उतार चुकी है।

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