यूपी जिला पंचायत सदस्य चुनाव: सपा-भाजपा पर भारी रहे निर्दलीय बनेंगे निर्णायक... पर वो भी असमंजस में
राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने का एलान कर दिया है। जिला पंचायत की 3050 सीटों पर हुए चुनाव के लिए तीन दिन तक चली मतगणना के बाद सामने आई तस्वीर में सपा को करीब 700 सीटें मिली हैं जबकि भाजपा को 600 के अंदर ही सब्र करना पड़ा है जबकि निर्दलीयों ने 950 के करीब सीटों पर कब्जा जमाया है।
विस्तार
यूपी के जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार सतारुढ़ दल भाजपा और सपा पर भारी रहे है। प्रदेश की 75 में से 74 जिला पंचायतों में अध्यक्ष की कुर्सी पर किस दल के सदस्य की ताजपोशी होगी उसमें निर्दलीय ही निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने का एलान कर दिया है। जिला पंचायत की 3050 सीटों पर हुए चुनाव के लिए तीन दिन तक चली मतगणना के बाद सामने आई तस्वीर में सपा को करीब 700 सीटें मिली हैं जबकि भाजपा को 600 के अंदर ही सब्र करना पड़ा है जबकि निर्दलीयों ने 950 के करीब सीटों पर कब्जा जमाया है।
भाजपा और सपा को जिलों में अपने जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने के लिए निर्दलीयों को ही मनाना पड़ेगा। प्रदेश के कुछ जिलों में निर्दलीय सदस्य भी जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हो सकते है।
निर्दलीय भी असमंजस में
नवनिर्वाचित निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य भी फिलहाल असमंजस की स्थिति में है। बड़ी संख्या में ऐसे निर्दलीय सदस्य हैं जो सतारुढ़ दल भाजपा को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहते है। वे सतारुढ़ दल के साथ ही रहकर आगामी नौ महीने तक सत्ता सुख का आनंद लेना चाहते हैं।
वहीं, कुछ ऐसे प्रभावशाली सदस्य भी हैं जो मानते हैं कि अभी तन, मन और धन लगाकर यदि भाजपा के बैनर पर जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद यदि 2022 में सत्ता का ऊंट दूसरी करवट बैठा तो उनकी कुर्सी भी तलवार लटक सकती है।