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Lucknow News: कालिंजर की राजनर्तकी पुस्तक में इतिहास के हाशिए पर छूटे किरदारों को मंच पर लाने की कोशिश
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कालिंजर की नर्तकी पुस्तक का विमोचन करते मंत्री जयवीर सिंह व अन्य। स्रोत स्वयं
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उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी में शनिवार को कालिंजर की राजनर्तकी नामक नाटक–पुस्तक का विमोचन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने किया। इस पुस्तक में इतिहास के हाशिए पर छूटे किरदारों को मंच देने की कोशिश की गई है। इस मौके पर इस नाटक के लेखक पूर्व आइएएस रमेश मिश्र, पूर्व कुलपति खैरागढ़ विश्वविद्यालय डॉ. पूर्णिमा पांडेय और पद्मश्री विद्याविंदु सिंह आदि भी मौजूद रहे।
रमेश मिश्र ने बताया कि उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव और ऐतिहासिक समझ से प्रेरित होकर यह नाटक लिखा है जो इतिहास के कई अनदेखे और अनकहे पक्ष को उजागर करता है।
उन्होंने बताया कि 'कालिंजर की राजनर्तकी' एक ऐसा ही किरदार है, जो न केवल चंदेलों के वैभवशाली इतिहास का हिस्सा थी, बल्कि वह उस समाज का दर्पण भी थी, जहां नारी को एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के रूप में देखे जाने के स्थान पर केवल उपभोग की वस्तु माना गया।
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लेखक ने इस नाटक में सिर्फ एक नर्तकी की कथा नहीं कही, बल्कि इतिहास की उस पृष्ठभूमि को भी उजागर किया है जहां हरम, विलासिता, सत्ता का दुरुपयोग और जनसामान्य की उपेक्षा जैसे यथार्थ चित्रित हैं। यह नाटक उन हजारों बेटियों की पीड़ा का दस्तावेज़ है, जो इतिहास में दर्ज नहीं हो सकीं, पर जिनका होना हमारी सभ्यता की वास्तविक तस्वीर है।
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रमेश मिश्र ने बताया कि उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव और ऐतिहासिक समझ से प्रेरित होकर यह नाटक लिखा है जो इतिहास के कई अनदेखे और अनकहे पक्ष को उजागर करता है।
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उन्होंने बताया कि 'कालिंजर की राजनर्तकी' एक ऐसा ही किरदार है, जो न केवल चंदेलों के वैभवशाली इतिहास का हिस्सा थी, बल्कि वह उस समाज का दर्पण भी थी, जहां नारी को एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के रूप में देखे जाने के स्थान पर केवल उपभोग की वस्तु माना गया।
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लेखक ने इस नाटक में सिर्फ एक नर्तकी की कथा नहीं कही, बल्कि इतिहास की उस पृष्ठभूमि को भी उजागर किया है जहां हरम, विलासिता, सत्ता का दुरुपयोग और जनसामान्य की उपेक्षा जैसे यथार्थ चित्रित हैं। यह नाटक उन हजारों बेटियों की पीड़ा का दस्तावेज़ है, जो इतिहास में दर्ज नहीं हो सकीं, पर जिनका होना हमारी सभ्यता की वास्तविक तस्वीर है।