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क्या आप जानते हैं, यूपी फायर ब्रिगेड में क्यों नहीं दिखाई देती लड़कियां?

Tue, 08 Nov 2016 11:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 08 Nov 2016 11:36 AM IST
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in uttar pradesh women entry is banned in fire brigade
डेमो प‌िक - फोटो : अमर उजाला

देश में एक से बढ़कर एक जोखिम भरा कॅरिअर अपनाने वाली बेटियां उत्तर प्रदेश में फायर सर्विस जॉइन नहीं कर सकतीं। हालांक‌ि मुंबई, तमिलनाडु और चंडीगढ़ में महिलाएं इस भूमिका को निभा रही हैं लेकिन यूपी के लिए 1944 में बने फायर सर्विस एक्ट में केवल पुरुषों की ही भर्ती के नियम हैं। 

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अग्निशमन को खतरनाक सेवा मानते हुए इसमें महिलाओं की एंट्री पर पाबंदी है। एक्ट बनने से अब तक इसमें कई संशोधन हुए लेकिन महिलाओं को सेवा में लेने के लिए कभी पहल नहीं की गई।
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यूपी में फायर सर्विस का इतिहास काफी पुराना है। 1925 में सूबे के कवाल टाउन (कानपुर, आगरा, वाराणसी, इलाहाबाद व लखनऊ) में यह सेवा शुरू हुई थी। 1939 के अंत में जब द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ, तब पूरे देश में सुव्यवस्थित फायर सर्विस की जरूरत महसूस की गई। 
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26 जुलाई 1944 को सूबे में उत्तर प्रदेश फायर सर्विस पूरी तरह शुरू हो गई। इसके लिए जो एक्ट बना, उसमें इस सेवा को जोखिम भरा मानते हुए केवल पुरुषों की ही भर्ती के नियम बनाए गए। तब से ये नियम चले आ रहे हैं जबकि स्थितियां काफी बदल चुकी हैं। 

बेटियां आज सेना में फाइटर प्लेन तक उड़ा रही हैं। सीमाओं पर भी बेटियां तैनात हो रही हैं। यूपी पुलिस की महिलाएं तो दुर्गम पहाड़ियों की चोटियां तक फतह कर रही हैं। इन सबके बावजूद फायर सर्विस में महिलाओं को उपेक्षित किया जा रहा है।

लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति व समाजसेविका प्रो. रूपरेखा वर्मा कहती हैं, उन्हें भी यह जानकारी नहीं थी कि प्रदेश की फायर सर्विस में महिलाओं को एंट्री नहीं दी जाती। महिला सशक्तीकरण के लिए काम करने वाली रूपरेखा वर्मा का कहना है कि अभी बहुत से दुर्ग ऐसे हैं जो महिलाओं को फतह करने हैं। चुनौतियां बहुत हैं। सरकार की कोशिशों के साथ ही पुरुषों की सोच में भी बदलाव लाने की जरूरत है।

नियमावली में होगा बदलाव, फिर भी महिलाओं को एंट्री नहीं

in uttar pradesh women entry is banned in fire brigade
डेमो प‌िक - फोटो : amar ujala

अखिलेश सरकार फायर सर्विस की नियमावली में बदलाव करने जा रही है। फिर भी इस क्षेत्र में महिलाओं की एंट्री में कोई ढील देने की योजना नहीं है। सरकार प्रोफेशनल क्वालीफिकेशन में भी बदलाव करने जा रही है। अभी केवल नागपुर के फायर इंस्टीट्यूट से डिप्लोमा व डिग्री लेने वालों को ही अग्निशमन सेवा में नौकरी दी जाती है।

प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा कहते हैं कि फायर सर्विस नियमावली जब बनी थी उस समय की जरूरतें दूसरी थीं। आज समय बदल गया है। आज मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में आग, जंगल की आग, केमिकल की आग, फैक्ट्रियों में आग जैसी नई-नई चुनौतियां हैं। 

इसलिए अब इन चुनौतियों के अनुसार नियमों को बदलकर फायर सर्विस का विस्तार करना होगा। सरकार सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल व केमिकल इंजीनियरिंग को भी प्रोफेशनल क्वालीफिकेशन में जोड़ने जा रही है। नियमावली में संशोधन के बाद इन सभी ब्रांच के इंजीनियरों को भी फायर सर्विस में रखा जा सकेगा। 

साथ ही सरकार इसकी भर्तियां भी उप्र पुलिस एवं भर्ती बोर्ड को देने की तैयारी कर रही है। अभी इसकी भर्तियां अलग से होती हैं।

फायर सर्विस एक्ट में महिलाओं को लेने पर प्रतिबंध है। यह जोखिम वाली सेवा मानी जाती है, इसलिए इसमें महिलाओं को नहीं लिया जाता। यह एक्ट 1944 का है। तब से यही व्यवस्था चली आ रही है।
-प्रवीण सिंह, महानिदेशक फायर सर्विस 

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