लखनऊ में दिल के रोगियों को मिलेगा सस्ता इलाज
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केंद्र सरकार की ओर से दिल के इलाज में इस्तेमाल होने वाले स्टेंट का दाम तय किए जाने के बाद इलाज का खर्च सीधे आधा हो गया है। अब मरीजों को सस्ती दर पर स्टेंट लगाया जा सकेगा।
सरकारी चिकित्सा संस्थानों में इस सुविधा को लागू करने की तैयारी चल रही है। लोहिया संस्थान में सस्ती दर पर एंजियोप्लास्टी शुरू हो गई है जबकि पीजीआई और केजीएमयू में जल्द ही इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा।
वहीं डॉक्टरों का यह भी मानना है कि स्टेंट के दाम तय होने के बाद प्राइवेट अस्पताल प्रोसीजर फीस बढ़ा सकते हैं। इसमें डॉक्टर की फीस, ओटी फीस और अन्य मदों में खर्च होने वाली रकम शामिल है ऐसे में सरकार को निजी अस्पतालों पर सख्त निगरानी भी करनी होगी।
लोहिया संस्थान के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भुवन चंद्र ने बताया कि पहले मरीजों को लगाए जाने वाले ड्रग इल्यूटिंग स्टेंट (डीईएस) की कीमत करीब 70 हजार रुपये थी।
स्टेंट की कीमत 29, 600 रुपये तय करने के बाद किसी मरीज को एक स्टेंट लगाया जाता है तो उसके पूरे प्रोसीजर पर करीब 45 हजार रुपये खर्च आता है। वही पहले इसपर 85 हजार रुपये तक खर्च होते थे। संस्थान में सस्ती दर पर केस किए जा रहे हैं। इसके लिए स्टेंट मुहैया कराने वाली कंपनी को निर्देशित कर दिया गया है।
केजीएमयू-पीजीआई में जल्द मिलेगी सहूलियत
लारी कार्डियोलॉजी के डॉ. ऋषि सेठी ने बताया कि केजीएमयू में छूट के बाद अब तक ये स्टेंट 45 से 50 हजार रुपये के मिलते थे। प्रोसीजर का पूरा खर्च करीब 80 हजार था। अब ये घटकर करीब 45 से 50 हजार रुपये हो जाएगा।
पीजीआई के निदेशक डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि स्टेंट के दाम घटने के बाद सस्ती दर पर एंजियोप्लास्टी के लिए निर्देशित कर दिया गया है। मरीजों को इसकी सुविधा जल्द मिलने लगेगी।
डॉ. भुवन चंद्र तिवारी ने बताया कि ड्रग इल्यूट स्टेंट को मेडिकेटेड स्टेंट के नाम से जाना जाता है। ये स्टेंट मरीज को लगाया जाता है तो उसमें दवा की कोटिंग होती हैं जो धमनियों में आने वाले समय में ब्लॉकेज की स्थिति को रोकती हैं।
एंजियोप्लास्टी के दौरान इस्तेमाल किए गए इस स्टेंट में मरीज को पोस्ट प्रोसीजर खर्च काफी कम हो जाता है। इसी तरह बायो एब्जॉर्बेबल स्टेंट एंजियोप्लास्टी के कुछ समय बाद पूरी तरह डिसॉल्व हो जाता और सामान्य तरह की दवाएं चलती हैं।
...लेकिन मुश्किल होगा बेस्ट क्वालिटी का स्टेंट मिलना
दिल के डॉक्टरों की मानें तो सरकार ने जिस बेयर मेटल स्टेंट की कीमत 7,260 रुपये तय की है, वो स्टेंट बेहद कम इस्तेमाल होता है। डॉक्टरों ने बताया कि ये स्टेंट प्रोसीजर के दौरान बहुत कम इस्तेमाल होता है।
ये स्टेंट कोबाल्ट क्रोम का बना होता है जिसके लगाने के बाद मरीज को ताउम्र दवा खानी पड़ती है। ऐसे में पोस्ट प्रोसीजर इलाज महंगा होता है। ऐसे में मरीज ड्रग इल्यूटिंग स्टेंट लगवाने में अधिक दिलचस्पी रखता है।
हृदय रोग विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां महंगे बायो एब्जॉर्बेबल स्टेंट की आपूर्ति पूरी तरह बाधित कर देंगी, क्योंकि इन स्टेंट की कीमत करीब डेढ़ से दो लाख रुपये है।
वहीं कंपनियां वही स्टेंट सप्लाई करेंगी। जिनकी कीमत इसके आसपास होगी। डॉक्टरों की मानें तो स्टेंट की क्वालिटी हर तीन से चार महीने में बदलती रहती है। ऐसे में अब कंपनियां क्वालिटी मेंटनेंस पर जोर नहीं देंगी।