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अदालत में थी अभेद्य सुरक्षा, फैसला आते ही परिसर के बाहर अफरातफरी

Wed, 30 Sep 2020 07:38 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 30 Sep 2020 07:38 PM IST
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Improtential security in court, chaos outside the premises as soon as the verdict comes
court - फोटो : सोशल मीडिया
विवादित ढांचे पर फैसला सुनाए जाने से पहले ही अदालत परिसर को किले में तब्दील कर दिया गया था। चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात थी। कुछ ऐसी सुरक्षा कि परिंदा भी पर न मार सके। सिवाय उनके जो अंदर जाने के लिए अधिकृत थे। जैसे ही फैसला आया, माहौल में रामभक्तों के जय श्रीराम के नारे गूंज उठे। बरी हुए आरोपियों को बाहर निकालने में पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। अदालत परिसर से निकलकर बाहर आए आचार्य धर्मेंद्र के साथ धक्का-मुक्की हुई तो उनका धैर्य जवाब दे गया।
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पुराने हाईकोर्ट की बिल्डिंग में ही विशेष न्यायालय, अयोध्या की फैसला सुनाने तक की पूरी कार्यवाही हुई। इस परिसर के सभी गेट पहले से ही सील कर दिए गए थे। यहां तक कि सेशन कोर्ट की तरफ से पुराने हाईकोर्ट भवन को जोड़ने वाला रास्ता तो खुला था, पर इसके जिस हिस्से में विशेष न्यायालय, अयोध्या था, उस तरफ जाने वाले रास्ते बैरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिए गए थे। सिर्फ अधिकृत व्यक्तियों के लिए ही अंदर आने की अनुमति थी, वो भी पहले से तय एंट्री प्वाइंट से। हालांकि, परिसर के बाहर मीडिया कर्मियों के अलावा मामले में नामजद रहे संत-महात्माओं, नेताओं और रामभक्तों के समर्थकों का भारी जमावड़ा था।
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अदालत का फैसला आते ही सबसे पहले कुछ अधिवक्ता मीडिया को इसकी जानकारी देने बाहर आए। करीब 12:45 बजे से बरी हुए आरोपी एक-एक करके बाहर आने शुरू हुए। मीडिया कर्मियों ने उनसे बात करने के लिए रोका तो फिर पीछे लंबा जाम लगना प्रारंभ हो गया। गेटों पर समर्थकों के आने, उनके उत्साह और नारेबाजी से और मुश्किल हो गई। लखनऊ के संयुक्त आयुक्त, कानून-व्यवस्था नवीन अग्रवाल को कई बार मौके पर पुलिस टीम की तैनाती की अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ा। वे समय-समय पर मातहत अधिकारियों को इधर से उधर जवानों को भेजने के निर्देश देते रहे।
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दिन में करीब 1:05 बजे आचार्य धर्मेंद्र अदालत परिसर से बाहर निकले। वे मीडिया कर्मियों से बात करने के लिए रुके, तो लोगों की धक्कामुक्की के शिकार हो गए। इस पर उन्होंने नाराजगी भी जताई। तत्काल पुलिस कर्मी उन्हें कुछ फासले पर एक पेड़ के नीचे ले गए, जहां उन्होंने मीडिया कर्मियों से बात की। उसके बाद वह ‘अभी तो यह झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है।’ नारा लगाते हुए अपने गंतव्य को चले गए।


उनके तत्काल बाद साध्वी ऋतंभरा कोर्ट परिसर से बाहर निकलीं तो पुलिस कर्मियों ने उनसे कार से बाहर न उतरने और अपनी गाड़ी आगे बढ़ाने का अनुरोध किया। इस पर वे मान गईं। उन्होंने कार में बैठे-बैठे ही मीडिया से कहा कि जीत तो हमारी उसी दिन हो गई थी, जिस दिन अयोध्या में राममंदिर के लिए भूमि पूजन हुआ था। उसके बाद तो न्याय की तलाश थी और वो भी मिल गया। करीब डेढ़ बजे तक अदालत परिसर के बाहर इसी तरह का अफरातफरी का माहौल रहा। प्रमुख लोगों के वहां से चले जाने के बाद ही स्थिति सामान्य हुई।
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