अगर ठीक से नहीं बैठता बच्चा तो उसको हो सकती है गंभीर बीमारी
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बच्चा समय से बैठ न पाए, चलने के समय हिलता रहे तो ये भी मस्तिष्क की किसी बीमारी के कारण हो सकता है। ब्रेन के सेरीबलम पार्ट में ट्यूमर, संक्रमण या फिर अनुवांशिक कारणों से यह दिक्कत हो सकती है।
समय पर बीमारी की पहचान हो जाए तो इलाज से इस पर काबू पाया जा सकता है। केजीएमयू के बाल रोग विभाग द्वारा आयोजित पीडियाट्रिक न्यूरोकॉन-2016 में रविवार को यह जानकारी डॉ. नवीन ने दी।
साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित सीएमई में डॉ. नवीन ने बताया कि बच्चों की इस समस्या को एक्सटासिया कहा जाता है। समय पर यदि इस बीमारी का पता लग जाए तो इलाज संभव है।
यही नहीं भविष्य में किसी अन्य बच्चों में इस बीमारी को होने से रोका जा सकता है। केजीएमयू की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांता ने बताया कि इस बीमारी का पता लगाने के लिए बच्चे की एमआरआई जांच कराई जाती है।
संक्रमण,विटामिन बी-12 या विटामिन ई की कमी से होती है दिक्कत
संक्रमण, विटामिन बी-12 या फिर विटामिन ई की कमी से ये दिक्कत हो सकती है। मिर्गी की दवाओं के साइड इफेक्ट से भी दिक्कत हो सकती है।
दिल्ली से आईं डॉ. मोनिका जुनेजा ने बताया कि बच्चा उदास या रहे या हाइपर एक्टिव है तो कोई न कोई न्यूरोलॉजिकल समस्या जरूर होती है।
ऑटिज्म जहां बच्चों को एकाकी बनता हैं वहीं 5 से 8 फीसदी बच्चों में अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिव डिसआर्डर पाया जाता है।
ये विकार बचपन से शुरू होकर किशोरावस्था और फिर वयस्क जीवन में जाता है, जिससे स्कूल, व्यवसायिक, वित्तीय, पारिवारिक और सामाजिक पहलू भी प्रभावित होते हैं।
बच्चों को दौरे पड़ने के 40 कारण
बच्चों को दौरे पड़ने के 40 से अधिक कारण हो सकते हैं। दिमाग का संक्रमण, मेनेंजाइटिस, इंसेफेलाइटिस, न्यूरोसिस्टीसरकोसिस, दिमाग में ट्यूमर, बच्चे को जन्म के दौरान दिमाग को ऑक्सीजन न मिलना, दिमाग में खून का थक्का जम जाना, दवाओं का रिएक्शन, अनुवांशिक कारणों से मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं।
इनमें न्यूरोसिस्टीसरकोसिस बीमारी के कारण मिर्गी के दौरे आम बात हैं। मल से दूषित पानी में उगाई गई सब्जियां खाने से, गंदे हाथों से खाना खाने से,सलाद और चाउमिन में पड़ी अधकच्ची सब्जियों से फीता कृति का अंडा पेट में पहुंच जाता है।
यह अंडा खून के साथ मस्तिष्क में पहुंचता है और वहां एक सिस्ट बना देता है। इसी सिस्ट के कारण मिर्गी के दौरे पड़ते हैं। दवाओं से इस सिस्ट को ठीक किया जा सकता है।