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यूपी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले : घर बनवाने, मरम्मत कराने, विस्तार के लिए अब जीपीएफ से 75 हजार निकाल सकेंगे कर्मचारी 

Wed, 09 Jun 2021 12:48 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 09 Jun 2021 12:48 AM IST
सार

किसी स्थल, घर, फ्लैट के पूरी तरह से खरीद के लिए या इन कार्यों के लिए ऋण के भुगतान के लिए एक किस्त के रूप में भी धनराशि निकालने की अनुमति दी जा सकती है।

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Important decisions of UP cabinet: Now 75 thousand employees will be able to withdraw from GPF for house construction, repair, expansion
cm yogi - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को घर बनवाने, पुनर्निर्माण कराने, वृद्धि या बदलाव आदि के लिए जीपीएफ से 75 हजार रुपये तक निकालने की सुविधा देने से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वर्तमान में कार्मिक 40 हजार रुपये तक ही निकाल सकते हैं। सरकार ने मंगलवार को यह फैसला कैबिनेट बाई सर्कुलेशन किया है।

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प्रदेश के सरकारी कार्मिकों को तय समय की सरकारी सेवा पूरी करने के बाद विभिन्न कार्यों के लिए अपने सामान्य भविष्य निधि खाते से धनराशि निकालने की सुविधा मिलती है। सामान्य भविष्य निधि (उत्तर प्रदेश) नियमावली-1985 के नियम-17(1) (क) के अंतर्गत पहले से स्वामित्व में रखे गए या अर्जित किए गए घर/फ्लैट के पुनर्निर्माण या उसमें परिवर्धन (वृद्धि) या परिवर्तन करने के लिए खाताधारक वर्तमान में 40 हजार रुपये निकाल सकता है। पैतृक गृह के  पुनरुद्धार, परिवर्तन व परिवर्धन या अनुरक्षण के लिए भी इतनी ही धनराशि निकालने की सुविधा है। प्रदेश के कर्मचारी भवन निर्माण सामग्री व श्रम आदि की दरों में हुई वृद्धि तथा लंबे समय से इस सीमा को बढ़ाए जाने की मांग कर रहे थे।
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प्रदेश सरकार ने इन कार्यों के लिए जीपीएफ से धनराशि निकालने की सीमा बढ़ाकर 75 हजार रुपये कर दिया है। घर निर्माण के मामले में यदि ली जाने वाली धनराशि 40 हजार से अधिक हो तो सामान्यत: दो किस्तों में निकालने की अनुमति होगी। हालांकि यदि कार्मिक पूरी राशि एकमुश्त निकालाना चाहता है तो स्वीकृति प्राधिकारी औचित्य से संतुष्ट होकर अनुमति दे सकेगा।
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जमीन, घर व फ्लैट खरीदने, किस्त देने में भी निकाल सकेंगे धनराशि
किसी स्थल, घर, फ्लैट के पूरी तरह से खरीद के लिए या इन कार्यों के लिए, लिए जा रहे ऋण के भुगतान के लिए एक किस्त के रूप में भी धनराशि निकालने की अनुमति दी जा सकती है। खरीदी गई जमीन, घर या फ्लैट के लिए या किसी योजना के अंतर्गत किसी विकास प्राधिकरण, आवास परिषद, स्थानीय निकाय या गृह निर्माण सहकारी समिति की स्ववित्त पोषित योजना में बनाए गए घर या फ्लैट के लिए किस्तों के भुगतान के लिए भी धनराशि स्वीकृत की जा सकेगी। 

एआईसीटीई के मानकों के आधार पर होगी पॉलीटेक्निक में शिक्षकों की भर्ती

राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति अब अखिल भारतीय प्राविधिक शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के मानकों के मुताबिक होगी। अब तक यह उप्र प्राविधिक शिक्षा परिषद के मानकों के आधार पर होती थी। इसमें कई विसंगतियां थी। इसे दूर करने के लिए सरकार ने एआईसीटीई के मानकों को प्रदेश में लागू करने का फैसला किया है।

बता दें, एआईसीटीई ने देश के सभी राज्यों में प्राविधिक शिक्षा (डिप्लोमा सेक्टर) में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए वर्ष 2019 में ही नया मानक लागू किया था। अधिकांश राज्यों ने इस मानक को लागू कर दिया था, लेकिन यूपी में इसे लागू नहीं किया गया था। शिक्षकों की मांग को देखते हुए सरकार ने पिछले साल ही एआईसीटीई के मानक लागू करने की सैद्धांतिक सहमति दे दी थी। अब इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है।

पीपीपी मोड पर दिए जाएंगे 6 पॉलीटेक्निक व 6 आईटीआई
प्रदेश सरकार राजकीय पॉलीटेक्निक और राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) का संचालन पीपीपी मोड पर करने का फैसला किया है। इस क्रम में सरकार ने 6 पॉलीटेक्निक और 6 आईटीआई को पीपीपी मोड पर देने का फैसला किया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को भी कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है। 

प्रधानाचार्य आवास को ध्वस्त करने को मंजूरी
कानपुर के राजकीय चर्म संस्थान परिसर स्थित प्रधानाचार्य आवास को ध्वस्त करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है। यह आवास काफी दिनों से जीर्णशीर्ण अवस्था में पड़ा था।

अयोध्या में विकास के लिए दी जाएगी नजूल की जमीन

सरकार ने अयोध्या के विकास में जमीन की उपलब्धता की समस्या का समाधान करने का रास्ता निकाल लिया है। सरकार ने तय किया है कि जरूरत के मुताबिक नजूल की भूमि संबंधित विभागों को उपलब्ध कराई जाएगी। ताकि विभाग जरूरत के मुताबिक व्यावसायिक कांप्लेक्स, भूमिगत पार्किंग और बहुउद्देश्यीय हॉल आदि का निर्माण करा सकें। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी गई है।

प्रस्ताव के मुताबिक कैबिनेट ने फिलहाल नजूल की 14 भूमि को दूसरे विभागों को देने को मंजूरी दी है। इसमें मछरहटा में 9586.79 वर्गमीटर जमीन नगर निगम को व्यावसायिक कांप्लेक्स व बहुउद्देश्यीय हॉल व भूमिगत पार्किंग के लिए दी जाएगी। टेड़ी बाजार में स्थित 3416.07 वर्गमीटर भूमि व्यावसायिक कांप्लेक्स, बहुउद्देशीय हॉल व भूमिगत पार्किंग के लिए दी जाएगी। जबकि यहीं स्थित 750 वर्गमीटर विशेष शाखा अभिसूचना विभाग अयोध्या को और बाग बिजेसी में 1750 वर्गमीटर भूमि विद्युत उपकेंद्र बनाने के लिए दी जाएगी। बाग बिजेसी में ही 2823.99 वर्गमीटर थाना कोतवाली परिसर, कार्यालय व आवासीय भवन और 5200 वर्गमीटर जमीन अग्निशमन केंद्र व उसके कर्मचारियों के लिए आवास और कार्यालय के लिए देने का फैसला किया गया है।

प्रस्ताव के मुताबिक सिविल लाइंस में 300 वर्ग मीटर जमीन विधिक माप विज्ञान विभाग, वजीरगंज में 1600 वर्गमीटर जमीन मध्यांचल विद्युत वितरण निगम और 1500 वर्गमीटर जमीन स्थापना सहायक अभिसूचना ब्यूरो को देने का फैसला किया गया है। जबकि रेतिया में 3600 वर्गमीटर नगर निगम को जलाशय व भूमिगत जलाशय के लिए और 100 वर्गमीटर जमीन नगर निगम को ट्यूबवेल लगाने के लिए दिया जाएगा।  वजीरगंज में भी नगर निगम को ट्यूबवेल लगाने के लिए 60.70 वर्गमीटर और 900 वर्गमीटर जमीन जलाशय व भूमिगत जलाशय के लिए दी जाएगी। इसी प्रकार चक्रतीरथ में भी 429.09 वर्गमीटर जमीन को नगर निगम को जलाशय के लिए दिया गया है।

जलेसर में डिपो और शिकारपुर में बस स्टेशन बनाए जाने को सीएम की हरी झंडी

विधानसभा क्षेत्र जलेसर में रोडवेज डिपो एवं बुलंदशहर स्थित शिकारपुर में  बस अड्डा बनाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। बाईसर्कुलेशन से इसे हरी झंडी देेते हुए सीएम ने संबंधित विभाग के मंत्री के पास प्रस्ताव को अभिमत के लिए भेजा जिस पर मंत्री ने भी सहमति जता दी।

प्रमुख सचिव परिवहन राजेश कुमार के मुताबिक परिवहन विभाग से संबंधित दो प्रस्ताव शासन को भेजे गए थे। एक जलेसर में रोडवेज डिपो तथा दूसरा शिकारपुर में बस अड्डा बनाए जाने का था। जलेसर में डिपो बनाने की मांग काफी समय से चल रही थी। उधर शिकारपुर में भी इसके लिए लोगों ने स्थानीय प्रतिनिधियों को कई बार ज्ञापन दिया था। दरअसल इन दोनों ही प्रस्तावों में परिवहन विभाग को निशुल्क जमीन देना प्रस्तावित था। 

स्थानीय प्रशासन ने जमीन का चिह्ननांकन कर प्रस्ताव प्रेषित कर दिया था। लगभग डेढ़ - डेढ़ एकड़ जमीन का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। मंगलवार को इन प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई। सीएम के निर्देश पर इन प्रस्तावों को अभिमत के लिए संबंधित विभाग के मंत्री के पास भेजा गया । परिवहन मंत्री अशोक कटारिया ने बताया कि उनका अभिमत इसके लिए स्पष्ट है और दोनों ही प्रस्ताव स्वीकार हो गए हैं।

प्रयागराज की जीईटीएंडडी इंडिया तेलंगाना के शिरडी साईं इलेक्ट्रिकल्स के हवाले

प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में जीईटीएंडडी इंडिया लि. (पूर्व नाम जीईसी इंडिया लि.) को लीज पर दी गई 21.15 एकड़ भूमि समान नियमों व शर्तों पर बकाया अवधि के लिए शिरडी साईं इलैक्ट्रिकल्स लि. हैदराबाद तेलंगाना को ट्रांसफर किए जाने पर सहमति दे दी है। सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। 

राम मंदिर तक बनेगा चौड़ा मार्ग

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर मंदिर तक पहुंच मार्ग बनाया जाएगा। प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को बाई सर्कुलेशन मंदिर तक बनने वाले मार्ग के एलाइनमेंट, चौड़ीकरण और निर्माण की मंजूरी दे दी। सौंदर्यीकरण के लिए वहां स्थित निजी भूमि एवं भवनों को खरीदा जाएगा। कैबिनेट ने मंगलवार को भूमि एवं भवन खरीदने का प्रस्ताव मंजूर किया है। 

नोएडा में स्थापित होगा स्टार्टअप का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति के तहत नोएडा में इंटेलीजेंस एंड इनोवेशन ड्रिवेन एंटरप्रेन्योरशिप सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा। प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को बाई सर्कुलेशन आईआईटी कानपुर और फिक्की के सहयोग से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापना की मंजूरी दी।

प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि स्टार्टअप नीति-2020 के तहत प्रदेश में तीन स्टेट ऑफ आर्ट उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना किया जाना है। सेंटर पर शोध एवं विकास के मापदंड और इनक्यूबेशन के अनुभव से युक्त होंगे। यहां पर उद्यमिता के पोषण के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। उत्कृष्टा केंद्रों में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की योजना है।

उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर और फिक्की के सहयोग से नोएडा में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। इससे प्रदेश में नवाचार, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी सुविधा, व्यवसायीकरण करण की बेस्ट प्रेक्टिस को लागू कराना है। उन्होंने बताया कि उत्कृष्टता केंद्र में प्रति वर्ष 50 स्टार्टअप को सहयोग दिया जाएगा। इससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
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