यूपी में आसान नहीं मोदी की सौभाग्य योजना का सफल होना, ये हैं बड़ी चुनौतियां
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यूपी में 2018 तक हर घर को रोशन करना आसान नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही ‘सौभाग्य’ योजना के तहत अगले साल तक देश के सभी घरों तक बिजली पहुंचा देने का टास्क रखा हो, पर यूपी के लिए इसे पूरा करना बहुत बड़ी चुनौती है। हालांकि केंद्र सरकार के साथ पावर फॉर ऑल का एमओयू करने के बाद राज्य सरकार ने इस मोर्चे पर काम शुरू तो किया है लेकिन केंद्र सरकार की ओर से तय की गई समय सीमा में जरूरत भर बिजली का इंतजाम करना और हर घर तक बिजली पहुंचाने के लिए नेटवर्क का विस्तार करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
प्रदेश में अभी भी 1.50 करोड़ से ज्यादा घरों में बिजली का कनेक्शन नहीं है। महज 15 महीने में इतनी बड़ी संख्या में कनेक्शन के साथ-साथ अतिरिक्त बिजली का इंतजाम करना और नेटवर्क की क्षमता वृद्धि करना आसान नहीं है।
पावर कॉर्पोरेशन के अभियंताओं के मुताबिक 2011 की जनगणना के मुताबिक प्रदेश में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर कुल घरों की संख्या 3 करोड़ 29 लाख 24 हजार 266 है। इनमें से 1 करोड़ 21 लाख 20 हजार 221 घरों में बिजली के कनेक्शन हैं। बीते छह वर्षों में 20 लाख से ज्यादा घरों की संख्या बढ़ी है।
पावर कार्पोरेशन नए सिरे से घरों और कनेक्शनों की संख्या के बारे में सर्वे करा रहा ताकि वास्तविक स्थिति का पता चल सके। राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से तैयार कराए गए आंकड़ों के अनुसार मौजूदा समय में प्रदेश में कुल घरों की संख्या 3.50 करोड़ से ज्यादा है जिनमें से करीब 1.85 करोड़ कनेक्शन हैं। यानी 1.65 करोड़ से ज्यादा घरों में बिजली के कनेक्शन नहीं हैं। इनमें सवा करोड़ से ज्यादा घर गांवों में हैं।
नियामक आयोग पिछले कई वर्षों से बना रहा है दबाव
प्रदेश के सभी घरों को बिजली कनेक्शन के दायरे में लाने के लिए नियामक आयोग पिछले कई वर्षों से बिजली कंपनियों पर दबाव बना रहा है। आयोग ने हर साल 36 लाख नए कनेक्शन देने का लक्ष्य भी तय किया था लेकिन बिजली कंपनियों की उदासीनता के चलते इस पर अमल नहीं किया जा सका। पावर फॉर आल के तहत अगले एक साल में 1.23 करोड़ नए कनेक्शन देने की बात कही जरूर गई लेकिन बाद में इसे घटाकर 50 लाख कर दिया गया।
पीएम के एलान के बाद अब राज्य सरकार के सामने अगले 15 महीने में करीब 1.50 करोड़ घरों तक बिजली कनेक्शन पहुंचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हालांकि शासन के आला अफसरों का दावा है कि इस दिशा में काम शुरू हो गया है और तय समय सीमा के भीतर इससे संबंधित सारी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी।
आपूर्ति का सिस्टम भी पर्याप्त नहीं
विशेषज्ञों की मानें तो प्रदेश में हर घर तक 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए पर्याप्त सिस्टम भी नहीं है। बिजली कंपनियों की ओर से नियामक आयोग में दाखिल आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या करीब 1.85 करोड़ है जिनका कुल कनेक्टेड लोड करीब 4.65 लाख किलोवाट है।
वहीं 33 केवी स्तर पर ट्रांसफार्मरों की कुल क्षमता सिर्फ 44,677 एमवीए यानी लगभग 3.79 लाख किलोवाट है। यानी सिस्टम में 1 करोड़ किलोवाट की कमी है। कनेक्शन बढ़ने पर इसमें और इजाफा होगा। उपभोक्ताओं की संख्या में होने वाली बढ़ोतरी के हिसाब से ट्रांसमिशन व वितरण नेटवर्क तैयार कराने का काम चल रहा है लेकिन सवा साल में जरूरत भर का सिस्टम तैयार हो पाना मुश्किल नजर आ रहा है।
15000 करोड़ रुपये से ज्यादा की दरकार
अभियंताओं के अनुसार पावर फॉर ऑल के तहत ट्रांसमिशन व वितरण नेटवर्क तैयार कराने के लिए फौरी तौर पर 15000 करोड़ रुपये से ज्यादा की जरूरत पड़ेगी। चूंकि महज सवा साल का वक्त है इसलिए युद्ध स्तर पर काम कराना होगा। हालांकि जानकारों का कहना है कि सबको बिजली देने के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा तैयार कराने को 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की जरूरत होगी।
बिजली कंपनियों की खस्ता माली हालत को देखते हुए भी यह बहुत आसान नहीं दिखाई दे रहा। हर घर तक बिजली पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए काफी कुछ दारोमदार केंद्र से मिलने वाली सहायता पर निर्भर करेगा। अभी सर्वे चल रहा है। अक्तूबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह तक केंद्र को इसके लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।
रहेगी बिजली की कमी
- बिजली विशेषज्ञों का कहना है कि 2018 तक हर घर तक बिजली पहुंचाने में सबसे बड़ी बाधा बिजली की उपलब्धता होगी। अभी जब महज 1.85 करोड़ कनेक्शन और आपूर्ति के रोस्टर के बावजूद बिजली की मांग 20 हजार मेगावाट से ऊपर पहुंच गई है तो 3.50 करोड़ कनेक्शन और 24 घंटे आपूर्ति के लिए 25000 मेगावाट से ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ेगी।
- खुद ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा भी मानते हैं कि अगले साल तक प्रदेश में बिजली की मांग 24000 मेगावाट से ऊपर पहुंच जाएगी।
- ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे का कहना है कि अगले साल तक प्रदेश के बिजलीघरों का अधिकतम उत्पादन 9,000 मेगावाट के आसपास रहेगा। अगले एक साल में मेजा को छोड़कर किसी अन्य परियोजना के शुरू होने की उम्मीद भी नहीं है।
- 15000 मेगावाट बिजली बाहर से लानी पड़ेगी। इंटरस्टेट (दूसरे राज्यों) ट्रांसमिशन क्षमता 9000 मेगावाट के आसपास ही है। ऐसे में सवा साल के भीतर इंटरस्टेट ट्रांसमिशन क्षमता में 6000 मेगावाट की वृद्धि नामुमकिन सी नजर आती है। इंट्रास्टेट (राज्य के भीतर) ट्रांसमिशन क्षमता भी 17,000 मेगावाट ही है। अगर किसी तरह बाहर से अतिरिक्त बिजली आ भी जाती है तो पर्याप्त इंट्रास्टेट ट्रांसमिशन क्षमता न होने की वजह से लोगों तक बिजली नहीं पहुंच पाएगी।
यूपी के लिए आसान नहीं टास्क : शैलेंद्र दुबे
आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेंद्र दुबे का कहना है कि प्रदेश में 71 फीसदी आवास बिना कनेक्शन हैं। प्रदेश में बिजली की कमी है। पर्याप्त नेटवर्क भी नहीं है। 2018 तक ये सारी व्यवस्थाएं होना मुश्किल नजर आता है। यूपी में सौभाग्य योजना का क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती है।
कनेक्शन ही नहीं, बिजली दर भी अहम : उपभोक्ता परिषद
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि हर घर तक बिजली पहुंचाने की मंशा तो अच्छी है, लेकिन यह अभियान तभी सफल होगा जब लोगों को सस्ती बिजली मिले। लोग कनेक्शन ले लें और बिजली का बिल न दे पाएं तो इसका क्या फायदा। बिजली सस्ती होगी तभी लालटेन युग खत्म होगा।
सौभाग्य योजना के लिए यूपी तैयार : आलोक कुमार
प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार का कहना है कि प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुसार प्रदेश में सौभाग्य योजना के क्रियान्वयन की तैयारी चल रही है। जुलाई से ही सर्वे शुरू करा दिया गया है। सभी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सर्वे पूरा होने के बाद अक्तूबर में जरूरी कार्यों के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेज दिया जाएगा। इसके क्रियान्वयन में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।