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Lucknow News: इमिडाजोल से होगा कैंसर, टीबी और तंत्रिका रोगों का निदान

Mon, 27 Oct 2025 02:29 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Oct 2025 02:29 AM IST
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Imidazole will cure cancer, tuberculosis and nerve diseases
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रगति कुशवाहा।
लखनऊ। दवा निर्माण और ग्रीन केमिस्ट्री की दुनिया में राजधानी से एक नई उम्मीद जगी है। लखनऊ विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रगति कुशवाहा ने शोध में पाया है कि इमिडाजोल नाम का यौगिक भविष्य की कई असरदार दवाओं की कुंजी साबित हो सकता है।
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इमिडाजोल यौगिकों में कैंसर, बैक्टीरिया, फंगल संक्रमण और सूजन से लड़ने की अद्भुत क्षमता पाई गई है। इस परिणाम से उत्साहित डॉ. प्रगति अब कैंसर, अल्जाइमर, टीबी और तंत्रिका रोगों जैसी जटिल बीमारियों के इलाज के लिए नई पीढ़ी की दवाओं पर शोध में लगी हैं।
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समुद्री जीवों में पाया गया इमिडाजोल

डॉ. प्रगति ने बताया कि इमिडाजोल केवल प्रयोगशाला में बने यौगिकों में ही नहीं, बल्कि समुद्री जीवों जैसे स्पंज, कोरल और ट्यूनिकेट्स आदि में भी पाया जाता है। उनके विभिन्न प्रयोगों में एजेलाडिन ए, फेकलिन्स, ग्रोसुलरीन और क्रिब्रोस्टैटिन-6 नामक समुद्री यौगिकों ने प्रयोगों में कैंसर और संक्रमण दोनों के खिलाफ असरदार परिणाम दिखाए हैं। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल केमिस्ट्री सेलेक्ट के अक्टूबर अंक में प्रकाशित हुआ है।
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कई दवाओं में होता है इस्तेमाल

इमिडाजोल कई दवाओं में इस्तेमाल होता है। सर्जरी से पहले नींद लाने के लिए, दवा की ओवरडोज में राहत देने के लिए, खून में प्लेटलेट्स नियंत्रित करने के लिए, एलर्जी से राहत के लिए, चिंता और बेचैनी दूर करने के लिए बनने वाली दवाओं में इसी का इस्तेमाल होता है।

छोटी रिंग, बड़े काम- जानें, क्या है इमिडाजोल

इमिडाजोल एक छोटी रासायनिक रिंग है, जिसमें दो नाइट्रोजन परमाणु शामिल रहते हैं। इसकी यही बनावट इसे शरीर के एंजाइम, प्रोटीन और धातु आयनों से जुड़ने में सक्षम बनाती है। इस वजह से यह रोग प्रतिरोधक क्षमता, तंत्रिका संदेशों के संचार और एंजाइम की क्रिया जैसे कई जरूरी जैविक कार्यों में भूमिका निभाता है। यानी इमिडाजोल ऐसी चाबी है, जो शरीर की कई प्रक्रियाओं के ताले खोल सकती है। डॉ. प्रगति का कहना है कि इमिडाजोल आधारित यौगिक प्राकृतिक (ग्रीन केमिस्ट्री) और कृत्रिम रसायनों के बीच पुल की तरह है। ये विज्ञान को प्रकृति से जोड़ते हुए सुरक्षित और प्रभावी दवाओं का भविष्य तय करेंगे।
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