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Lucknow News: मदीना छोड़कर दीन-ए-खुदा बचाने कर्बला आ गए इमाम
Sun, 29 Jun 2025 01:57 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Sun, 29 Jun 2025 01:57 AM IST
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कर्बला दियानुतदौला में काफिला-ए-हुसैनी की जियारत करते अकीदतमंद। -अमर उजाला
लखनऊ। ...आई सवारी आज शहे मशरकैन की, आमद है कर्बला में इमाम-ए-हुसैन की। कर्बला में हजरत इमाम हुसैन के काफिले की आमद का मंजर पेश हुआ तो हाथों को उठाए अपने इमाम के काफिले का इस्तक्बाल कर रहे अजादारों की आंखें नम हो गईं।
मुहर्रम की दूसरी तारीख शनिवार को इमाम हुसैन के काफिले के कर्बला पहुंचने का मंजर कर्बला दियानतुददौला में दिखाई दिया। अकीदतमंदों ने काफिले में शामिल अलम व दूसरे तबर्रुकात की जियारत कर आंसुओं का नजराना पेश किया।
इदारा-ए-सक्काए सकीना की ओर से रुस्तम नगर स्थित कर्बला परिसर में आमद-ए-काफिला-ए-हुसैनी को गश्त कराया गया। काफिले में सबसे आगे ऊंट पर सवार मुनादी हैदर अब्बास नगाड़ा बजाते हुए ये सवारी है सिब्ते रसूल-ए-सकलैन इमाम हुसैन की, सदाएं बुलंद कर लोगों को इमाम हुसैन के कर्बला पहुंचने का पैगाम दे रहे थे। वहीं, मोहम्मद अब्बास काफिले की अपने अंदाज में मंजरकशी कर रहे थे। काले लिबास में मौजूद अजादार मंजरकशीं को सुनकर अपने आंसू रोक नही पा रहे थे।
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काफिले में ऊंटों पर अमारिया और हजरत अब्बास की निशानी अलम शामिल था। जुलूस में शामिल इमाम हुसैन के छह माह के बेटे अली असगर का गहवारा (झूला) और हजरत इमाम हुसैन की सवारी का प्रतीक जुलजनाह की जियारत के लिए अकीदतमंद बेकरार थे। तबर्रुकात की जियारत कर अकीदतमंदों ने दुआ मांगी, काफिला ए हुसैन के मंजरकशी से पहले कर्बला में आयोजित मजलिस को मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी ने खिताब किया। मौलाना ने हजरत इमाम हुसैन के काफिले का मदीना से रुखसती से लेकर कर्बला के मैदान में पहुंचने तक का मंजर बयां किया।
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मुहर्रम की दूसरी तारीख शनिवार को इमाम हुसैन के काफिले के कर्बला पहुंचने का मंजर कर्बला दियानतुददौला में दिखाई दिया। अकीदतमंदों ने काफिले में शामिल अलम व दूसरे तबर्रुकात की जियारत कर आंसुओं का नजराना पेश किया।
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इदारा-ए-सक्काए सकीना की ओर से रुस्तम नगर स्थित कर्बला परिसर में आमद-ए-काफिला-ए-हुसैनी को गश्त कराया गया। काफिले में सबसे आगे ऊंट पर सवार मुनादी हैदर अब्बास नगाड़ा बजाते हुए ये सवारी है सिब्ते रसूल-ए-सकलैन इमाम हुसैन की, सदाएं बुलंद कर लोगों को इमाम हुसैन के कर्बला पहुंचने का पैगाम दे रहे थे। वहीं, मोहम्मद अब्बास काफिले की अपने अंदाज में मंजरकशी कर रहे थे। काले लिबास में मौजूद अजादार मंजरकशीं को सुनकर अपने आंसू रोक नही पा रहे थे।
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काफिले में ऊंटों पर अमारिया और हजरत अब्बास की निशानी अलम शामिल था। जुलूस में शामिल इमाम हुसैन के छह माह के बेटे अली असगर का गहवारा (झूला) और हजरत इमाम हुसैन की सवारी का प्रतीक जुलजनाह की जियारत के लिए अकीदतमंद बेकरार थे। तबर्रुकात की जियारत कर अकीदतमंदों ने दुआ मांगी, काफिला ए हुसैन के मंजरकशी से पहले कर्बला में आयोजित मजलिस को मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी ने खिताब किया। मौलाना ने हजरत इमाम हुसैन के काफिले का मदीना से रुखसती से लेकर कर्बला के मैदान में पहुंचने तक का मंजर बयां किया।