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बड़े बिल्डरों की मनमानी: अवैध निर्माण ही नहीं गांव के चकरोड और नाली पर शालीमार पैराडाइज टाउनशिप ही बसा दी
Thu, 21 Dec 2023 02:33 PM IST
ishwar ashish
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 21 Dec 2023 02:33 PM IST
सार
ग्रामीणों की शिकायत पर बाराबंकी के तत्कालीन डीएम ने पूरे मामले की जांच कराई थी, लेकिन चकरोड वाली सरकारी जमीन, नाली अभी भी शालीमार पैराडाइज टाउनशिप के कब्जे में है। शालीमार की ओर से बसाई गई पैराडाइज टाउनशिप में विला बेहद महंगे हैं।
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शालीमार टाउनशिप के अंदर गांव के चकरोड के विवाद में अधूरा पड़ा विला का काम।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
बड़े बिल्डर व प्रॉपर्टी डीलरों के इन कारनामों का खुलासा भी हुआ पर जांच के नाम पर इनकी फाइलें दबी हैं। इनमें से एक शालीमार ऐसी कंपनी है, जिसने राजधानी में एलडीए के स्वीकृत मानचित्र के विपरीत कॉम्प्लेक्स और अपार्टमेंट में मनमाने तरीके से अवैध निर्माण ही नहीं किया, बल्कि बाराबंकी जनपद में गांव के चकरोड और नाली पर शालीमार पैराडाइज टाउनशिप को बसा दिया है। यह टाउनशिप लखनऊ और बाराबंकी जिले की सीमा के बीच स्थित गांव मोहम्मदपुर के पास है।
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शालीमार कंपनी ने सफेदाबाद के पास मोहम्म्दपुर के ग्रामीणों के खेतों में आने-जाने के लिए छोड़े गए सरकारी चकरोड और जल निकासी के लिए बनाई नाली पर कीमती विला बनाए हैं। इससे मोहम्मदपुर के लोगों के आवागमन का रास्ता बंद हो गया है। ग्रामीणों की शिकायत पर बाराबंकी के तत्कालीन डीएम ने पूरे मामले की जांच कराई थी, लेकिन चकरोड वाली सरकारी जमीन, नाली अभी भी शालीमार पैराडाइज टाउनशिप के कब्जे में है। शालीमार की ओर से बसाई गई पैराडाइज टाउनशिप में विला बेहद महंगे हैं।
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टाउनशिप में विवादित हिस्से पर निर्माण रोका
शालीमार पैराडाइज टाउनशिप के भीतर जिन इलाकों से चकरोड निकला, उन जगहों की पहचान करने के बाद तत्कालीन डीएम ने वहां के विवादित हिस्से पर निर्माण रुकवा दिया। इससे विला के काम पर भी असर पड़ा है। हालांकि, शालीमार कंपनी ने इनमें से कुछ ही जगहों पर विला का काम रोका है।
चकरोड पर बने विला की रजिस्ट्री को लेकर विवाद
जिला प्रशासन के अफसरों के मुताबिक शालीमार पैराडाइज टाउनशिप में सरकारी चकरोड पर बनाए गए कीमती विला की रजिस्ट्री को लेकर भी विवाद आया था। तत्कालीन डीएम ने सरकारी जमीन पर किए गए निर्माण को अवैध ठहराया था। ऐसे में जिस जमीन पर ये विला बनकर खड़े हुए हैं, उनकी रजिस्ट्री में सरकारी पेच फंस गया है।
नाली, चकमार्ग का कंपनी के स्वामित्व की भूमि से विनिमय
शालीमार कॉर्प के सीईओ शिव जनम चौधरी का कहना है कि शालीमार पैराडाइज में आने वाली ग्राम समाज की नाली व चकरोड की जमीन को कंपनी के स्वामित्व की भूमि से विनिमय करने का प्रस्ताव छह फरवरी 2019 को तत्कालीन डीएम ने ग्राम सभा की भूमि प्रबंधन समिति के अनुमोदन के बाद शासन को भेजा था। प्रस्ताव अनुमोदन की प्रक्रिया में था। इस बीच तीन अगस्त 2023 को ग्राम समाज भूमि का विनिमय के प्रस्ताव के अनुमोदन का अधिकार संबंधित क्षेत्र के मंडल आयुक्त को अधिकृत कर दिया गया। इससे अयोध्या मंडल के आयुक्त को प्रस्ताव स्वीकृति के लिए भेज दिया गया। प्रोजेक्ट का पूर्णता प्रमाण पत्र 17 सितंबर 2019 को जारी किया जा चुका है। टाउनशिप में किसी प्रकार का अनियमित काम नहीं हुआ है।
विभागीय स्तर पर चल रही जांच
एसडीएम सदर नवाबगंज विजय कुमार त्रिवेदी का कहना है कि शालीमार पैराडाइज का मामला शासन स्तर पर विचाराधीन है। इसे लेकर शासन से अभी निर्देश नहीं मिले हैं। विभागीय स्तर पर भी इसकी जांच चल रही है। जांच पूरी होने पर कारवाई सुनिश्चित की जाएगी।