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गंदगी के बीच बिना लाइसेंस चलता पकड़ा पैक्ड वाटर प्लांट
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अवैध पैक्ड वाटर की फैक्टरी पकड़ी
गुडंबा थाने से चंद कदमों की दूरी पर चल रहे पैक्ड पेयजल की शुक्रवार को अवैध फैक्टरी पकड़ी गई। यह फैक्टरी बगैर किसी पंजीयन के चल रही थी। यहां गंदगी के बीच पानी को प्रतिबंधित पॉलिथीन में पैक कर बाजार में भेजा जा रहा था। एफएसडीए की टीम ने यहां से स्नो एक्वा के नाम से सप्लाई के लिए तैयार किए गए पैक्ड पानी के 71,800 पाउच पकड़े। फैक्टरी का संचालन रोक दिया गया है। 23 जून को ‘अमर उजाला’ ने मिनी वाटर प्लांट के सहारे अवैध तौर पर शहर में चल रहे करोड़ों की कमाई के पैक्ड बोतल वाटर व प्रतिबंधित प्लास्टिक पाउच में पैक्ड वाटर के धंधे का खुलासा किया था।
अभिहित अधिकारी टीआर रावत ने बताया कि मनोज ट्रेडर्स के नाम से चल रही पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर की फैक्टरी बगैर फूड लाइसेंस या पंजीयन के चल रही थी। मानकों को ताक पर रख भूजल को चिल्ड वाटर प्लांट के सहारे प्रतिबंधित प्लास्टिक पाउच व बोतल में पैक कर बाजार में स्नो एक्वा के नाम से सप्लाई किया जा रहा था। संचालक को नोटिस जारी कर पैक्ड ड्रिकिंग वाटर के दो नमूने लैब जांच के लिए भेजे गए हैं। सप्लाई के लिए तैयार किए गए 718 बोरी पानी के पाउच को सीज कर दिया गया है। सीज पानी के पाउच की कीमत 1,43,600 रुपये आंकी गई है।
एफएसडीए की टीम ने शुक्रवार को गुडंबा स्थित मनोज ट्रेडर्स के नाम से संचालित पैक्ड वाटर प्लांट और भौखापुर बंथरा में संचालित यसराज बेवरेजेस के प्लांट पर भी जांच की। अभिहीत अधिकारी ने बताया कि कार्रवाई के दौरान यसराज बिवरेजेस प्लांट में पैक्ड बोतल पानी के साथ सप्लाई को तैयार हो रहे फ्रूट ड्रिंक, मैंगो ड्रिंक के पांच नमूने लैब जांच को सील कर भेजे गए।
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नल व बिजली कनेक्शन व्यावसायिक होना जरूरी
सीएफएसओ एसके मिश्रा ने बताया कि नियमानुसार वाटर प्लांट चलाने के लिए व्यावसायिक भवन के साथ ही पेयजल व बिजली कनेक्शन भी व्यावसायिक उपयोग का होना जरूरी है। इसके साथ ही एफएसडीए से फूड लाइसेंस या पंजीयन के साथ क्वालिटी कंट्रोल से एनओसी लेनी होती है। पैक्ड वाटर की जांच के लिए प्लांट में ही लैब की सुविधा भी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि गंदे कैम्परों बोतलों व प्लास्टिक पाउच में पैक्ड वाटर संक्रमित हो जाने पर टायफाइड, पीलिया, उल्टी, दस्त व पेट संबधित बीमारियों का कारण बनता है। प्राकृतिक जल में क्रोमियम कॉपर, आयरन, लिथियम, मैगनिशियम, पोटेशियम होता है।
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गुडंबा थाने से चंद कदमों की दूरी पर चल रहे पैक्ड पेयजल की शुक्रवार को अवैध फैक्टरी पकड़ी गई। यह फैक्टरी बगैर किसी पंजीयन के चल रही थी। यहां गंदगी के बीच पानी को प्रतिबंधित पॉलिथीन में पैक कर बाजार में भेजा जा रहा था। एफएसडीए की टीम ने यहां से स्नो एक्वा के नाम से सप्लाई के लिए तैयार किए गए पैक्ड पानी के 71,800 पाउच पकड़े। फैक्टरी का संचालन रोक दिया गया है। 23 जून को ‘अमर उजाला’ ने मिनी वाटर प्लांट के सहारे अवैध तौर पर शहर में चल रहे करोड़ों की कमाई के पैक्ड बोतल वाटर व प्रतिबंधित प्लास्टिक पाउच में पैक्ड वाटर के धंधे का खुलासा किया था।
अभिहित अधिकारी टीआर रावत ने बताया कि मनोज ट्रेडर्स के नाम से चल रही पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर की फैक्टरी बगैर फूड लाइसेंस या पंजीयन के चल रही थी। मानकों को ताक पर रख भूजल को चिल्ड वाटर प्लांट के सहारे प्रतिबंधित प्लास्टिक पाउच व बोतल में पैक कर बाजार में स्नो एक्वा के नाम से सप्लाई किया जा रहा था। संचालक को नोटिस जारी कर पैक्ड ड्रिकिंग वाटर के दो नमूने लैब जांच के लिए भेजे गए हैं। सप्लाई के लिए तैयार किए गए 718 बोरी पानी के पाउच को सीज कर दिया गया है। सीज पानी के पाउच की कीमत 1,43,600 रुपये आंकी गई है।
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एफएसडीए की टीम ने शुक्रवार को गुडंबा स्थित मनोज ट्रेडर्स के नाम से संचालित पैक्ड वाटर प्लांट और भौखापुर बंथरा में संचालित यसराज बेवरेजेस के प्लांट पर भी जांच की। अभिहीत अधिकारी ने बताया कि कार्रवाई के दौरान यसराज बिवरेजेस प्लांट में पैक्ड बोतल पानी के साथ सप्लाई को तैयार हो रहे फ्रूट ड्रिंक, मैंगो ड्रिंक के पांच नमूने लैब जांच को सील कर भेजे गए।
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नल व बिजली कनेक्शन व्यावसायिक होना जरूरी
सीएफएसओ एसके मिश्रा ने बताया कि नियमानुसार वाटर प्लांट चलाने के लिए व्यावसायिक भवन के साथ ही पेयजल व बिजली कनेक्शन भी व्यावसायिक उपयोग का होना जरूरी है। इसके साथ ही एफएसडीए से फूड लाइसेंस या पंजीयन के साथ क्वालिटी कंट्रोल से एनओसी लेनी होती है। पैक्ड वाटर की जांच के लिए प्लांट में ही लैब की सुविधा भी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि गंदे कैम्परों बोतलों व प्लास्टिक पाउच में पैक्ड वाटर संक्रमित हो जाने पर टायफाइड, पीलिया, उल्टी, दस्त व पेट संबधित बीमारियों का कारण बनता है। प्राकृतिक जल में क्रोमियम कॉपर, आयरन, लिथियम, मैगनिशियम, पोटेशियम होता है।