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लखनऊ के इन इलाकों की हवा सबसे ज्यादा जहरीली, आईआईटीआर ने जारी की पोस्ट मानसून रिपोर्ट-2018
Thu, 01 Nov 2018 03:23 PM IST
Prateek Ranjan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Prateek Ranjan
Updated Thu, 01 Nov 2018 03:23 PM IST
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इंदिरा नगर
- फोटो : amar ujala
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) की पोस्ट मानसून रिपोर्ट-2018 में आवासीय इलाकों में लखनऊ के इंदिरानगर और व्यावसायिक इलाकों में आलमबाग की हवा सबसे अधिक प्रदूषित मिली है। इंदिरानगर की हवा पिछले चार साल से सर्वाधिक प्रदूषित बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इसका कारण आवासीय इलाकों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियां और इसके कारण डीजल जनरेटर व वाहनों के अधिक उपयोग को जिम्मेदार माना गया है। इतना ही नहीं इंदिरानगर में ध्वनि प्रदूषण भी सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किया है। हालांकि व्यावसायिक इलाकों में अमीनाबाद में शोरगुल सबसे ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इंदिरानगर के लोगों के लिए यहां की हवा खतरनाक हो सकती है, क्योंकि 2015 से यहां लगातार प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। आईआईटीआर ने यह रिपोर्ट नौ आवासीय, व्यावसायिक व औद्योगिक इलाके की जांच के आधार पर तैयार की है।
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इसके मुताबिक, इंदिरानगर का पीएम 10 और पीएम 2.5 क्रमश: 226.8 और 107.8 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रिकॉर्ड किया गया है। यहां नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड भी डब्ल्यूएचओ के मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घनमी. से भी अधिक है।
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रिपोर्ट के अनुसार, इसका कारण आवासीय इलाकों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियां और इसके कारण डीजल जनरेटर व वाहनों के अधिक उपयोग को जिम्मेदार माना गया है। इतना ही नहीं इंदिरानगर में ध्वनि प्रदूषण भी सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किया है। हालांकि व्यावसायिक इलाकों में अमीनाबाद में शोरगुल सबसे ज्यादा है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, इंदिरानगर के लोगों के लिए यहां की हवा खतरनाक हो सकती है, क्योंकि 2015 से यहां लगातार प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। आईआईटीआर ने यह रिपोर्ट नौ आवासीय, व्यावसायिक व औद्योगिक इलाके की जांच के आधार पर तैयार की है।
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इसके मुताबिक, इंदिरानगर का पीएम 10 और पीएम 2.5 क्रमश: 226.8 और 107.8 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रिकॉर्ड किया गया है। यहां नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड भी डब्ल्यूएचओ के मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घनमी. से भी अधिक है।
इन इलाकों की हुई जांच
आलमबाग
- फोटो : amar ujala
आलमबाग में पीएम 10 और 2.5 क्रमश: 224.8 और 108.1 माइक्रोग्राम घन मीटर रिकॉर्ड किया गया है। रिपोर्ट में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण सूक्ष्म कण को माना गया है, जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक से करीब पांच गुना तक अधिक बने हुए हैं।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, पीएम 10 के लिए 50 माइक्रोग्राम प्रति घनमी. और पीएम 2.5 के लिए 25 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर का मानक तय है। इसी तरह भारत में नेशनल एयर एंबिएंट क्वालिटी एंड स्टैंडर्ड (नैक्स) के मानक लागू हैं। इसके अनुसार, पीएम 10 और 2.5 क्रमश: 100 और 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए। इसके अनुसार भी हवा में तीन गुना अधिक प्रदूषण बना हुआ है।
इन इलाकों में हुई जांच
आवासीय- अलीगंज, विकासनगर, इंदिरानगर, गोमतीनगर।
व्यावसायिक- चारबाग, आलमबाग, अमीनाबाद, चौक।
औद्योगिक- आमौसी इंडस्ट्रियल एरिया
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, पीएम 10 के लिए 50 माइक्रोग्राम प्रति घनमी. और पीएम 2.5 के लिए 25 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर का मानक तय है। इसी तरह भारत में नेशनल एयर एंबिएंट क्वालिटी एंड स्टैंडर्ड (नैक्स) के मानक लागू हैं। इसके अनुसार, पीएम 10 और 2.5 क्रमश: 100 और 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए। इसके अनुसार भी हवा में तीन गुना अधिक प्रदूषण बना हुआ है।
इन इलाकों में हुई जांच
आवासीय- अलीगंज, विकासनगर, इंदिरानगर, गोमतीनगर।
व्यावसायिक- चारबाग, आलमबाग, अमीनाबाद, चौक।
औद्योगिक- आमौसी इंडस्ट्रियल एरिया
यहां पढ़ें, इन उपायों से सुधर सकते हैं हालात
...इसलिए हवा हुई जहरीली
- मेट्रो का निर्माण कार्य
- वाहनों की संख्या बढ़ना
- डीजल और पेट्रोल की खपत बढ़ी
- हरियाली की कमी
- प्रदूषण फै लाने वाले वाहन पर नियंत्रण की कमी
- ट्रैफिक जाम और आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां
इन उपायों से सुधार सकते हैं हालात
- मेट्रो के काम में वायु प्रदूषण की निगरानी हो
- ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर हो
- अतिक्रमण अभियान प्रभावी तरीकेसे चले
- प्रदूषण के खिलाफ लोगों को जागरूक किया जाए
- कूड़ा न जलने दिया जाए
- फुटपाथ खाली हों
- विद्युत शवदाह गृह का उपयोग बढ़े
- डीजल पर निर्भरता घटाने की जरूरत
- पार्किंग शुल्क को घंटों के हिसाब से बढ़ाकर निजी वाहनों के उपयोग को घटाया जाए
-दीपावली पर पटाखों का उपयोग कम करें
- मेट्रो का निर्माण कार्य
- वाहनों की संख्या बढ़ना
- डीजल और पेट्रोल की खपत बढ़ी
- हरियाली की कमी
- प्रदूषण फै लाने वाले वाहन पर नियंत्रण की कमी
- ट्रैफिक जाम और आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां
इन उपायों से सुधार सकते हैं हालात
- मेट्रो के काम में वायु प्रदूषण की निगरानी हो
- ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर हो
- अतिक्रमण अभियान प्रभावी तरीकेसे चले
- प्रदूषण के खिलाफ लोगों को जागरूक किया जाए
- कूड़ा न जलने दिया जाए
- फुटपाथ खाली हों
- विद्युत शवदाह गृह का उपयोग बढ़े
- डीजल पर निर्भरता घटाने की जरूरत
- पार्किंग शुल्क को घंटों के हिसाब से बढ़ाकर निजी वाहनों के उपयोग को घटाया जाए
-दीपावली पर पटाखों का उपयोग कम करें
बीमार कर देगी ये हवा
अलर्ट : बीमार कर देगी ये हवा
हेवी मेटल्स और पार्टिक्युलेट मैटर (पीएम) की हवा में मौजूदगी स्वास्थ्य के लिए बुरी है। इसकी वजह से हृदय और सांस की बीमारी जैसे अस्थमा, ब्रांकाइटिस हो सकती है। पीएम साइज कम होने के साथ
रिप्रोडक्टिव हेल्थ की समस्या, प्रिमैच्यॉर बर्थ जैसे परेशानी बढ़ सकती हैं।
हेवी मेटल्स और पार्टिक्युलेट मैटर (पीएम) की हवा में मौजूदगी स्वास्थ्य के लिए बुरी है। इसकी वजह से हृदय और सांस की बीमारी जैसे अस्थमा, ब्रांकाइटिस हो सकती है। पीएम साइज कम होने के साथ
रिप्रोडक्टिव हेल्थ की समस्या, प्रिमैच्यॉर बर्थ जैसे परेशानी बढ़ सकती हैं।
बढ़ता शोर कई बीमारियों का कारण
वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ता शोर कान का पर्दा फटने, कार्डियक बीमारी, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, भूख के मरने का कारण भी बन सकता है।
बढ़ रहा है सीएनजी का उपयोग
मो
- फोटो : डेमो
सुखद संकेत : सीएनजी का उपयोग बढ़ रहा
अच्छी रिपोर्ट यह है कि सीएनजी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। 2017-18 में सीएनजी के उपयोग में 32.06 प्रतिशत की बढ़ोतरी रिपोर्ट हुई है।
हालांकि बढ़ते वाहन पानी न फेर दें प्रयासों पर
आरटीओ से मिले आंकड़ों केमुताबिक, राजधानी में वाहनों की संख्या पिछले साल की तुलना में 1.51 प्रतिशत बढ़ी है। वाहनों की संख्या बढ़कर 20.08 लाख हो गई है। ईंधन खर्च भी बढ़ा है। पेेट्रोल का खर्च 7.96 प्रतिशत और डीजल की खपत 9.03 प्रतिशत बढ़ी है। यह संकेत वातावरण के लिए अच्छे नहीं हैं।
इस टीम ने किया सर्वे
सर्वे करने वाली टीम में प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. एससी बर्मन, डॉ. जीसी किसकू, एएच खान, ताजुद्दीन अहमद, प्रदीप शुक्ला, बीएम पांडेय, प्रिया सक्सेना, सूरज घोष, हामिद कमाल, अंकुर दीक्षित, निर्मेश श्रीवास्तव शामिल रहे।
निर्माण व डीजल का बढ़ता उपयोग प्रदूषण बढ़ा रहा
पोस्ट मानसून रिपोर्ट 2018 में आवासीय इलाकों में इंदिरानगर और व्यावसायिक इलाकों में आलमबाग की हवा सबसे अधिक प्रदूषित मिली है। प्रदूषण बढ़ने के पीछे की बड़ी वजह वाहनों की तेजी से बढ़ती संख्या है। इसके अलावा निर्माण के काम और डीजल का उपयोग हवा को प्रदूषित कर रहे हैं। - डॉ. एससी बर्मन, विभागाध्यक्ष, एनवायरमेंटल डिवीजन, आईआईटीआर
अच्छी रिपोर्ट यह है कि सीएनजी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। 2017-18 में सीएनजी के उपयोग में 32.06 प्रतिशत की बढ़ोतरी रिपोर्ट हुई है।
हालांकि बढ़ते वाहन पानी न फेर दें प्रयासों पर
आरटीओ से मिले आंकड़ों केमुताबिक, राजधानी में वाहनों की संख्या पिछले साल की तुलना में 1.51 प्रतिशत बढ़ी है। वाहनों की संख्या बढ़कर 20.08 लाख हो गई है। ईंधन खर्च भी बढ़ा है। पेेट्रोल का खर्च 7.96 प्रतिशत और डीजल की खपत 9.03 प्रतिशत बढ़ी है। यह संकेत वातावरण के लिए अच्छे नहीं हैं।
इस टीम ने किया सर्वे
सर्वे करने वाली टीम में प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. एससी बर्मन, डॉ. जीसी किसकू, एएच खान, ताजुद्दीन अहमद, प्रदीप शुक्ला, बीएम पांडेय, प्रिया सक्सेना, सूरज घोष, हामिद कमाल, अंकुर दीक्षित, निर्मेश श्रीवास्तव शामिल रहे।
निर्माण व डीजल का बढ़ता उपयोग प्रदूषण बढ़ा रहा
पोस्ट मानसून रिपोर्ट 2018 में आवासीय इलाकों में इंदिरानगर और व्यावसायिक इलाकों में आलमबाग की हवा सबसे अधिक प्रदूषित मिली है। प्रदूषण बढ़ने के पीछे की बड़ी वजह वाहनों की तेजी से बढ़ती संख्या है। इसके अलावा निर्माण के काम और डीजल का उपयोग हवा को प्रदूषित कर रहे हैं। - डॉ. एससी बर्मन, विभागाध्यक्ष, एनवायरमेंटल डिवीजन, आईआईटीआर