{"_id":"5a4b41744f1c1b5c0c8b63b3","slug":"iis-officer-deepal-was-helping-nature-said-friends","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"दोस्तों को रुला गया युवा अफसर दीपल, जानें क्या कहकर बुलाते थे दोस्त ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दोस्तों को रुला गया युवा अफसर दीपल, जानें क्या कहकर बुलाते थे दोस्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 02 Jan 2018 02:59 PM IST
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दीपल सक्सेना (फाइल फोटो)
- फोटो : डेमो
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एक्सप्रेस-वे पर इटावा के निकट सड़क हादसे का शिकार हुए आईआईएस अफसर दीपल सक्सेना का स्वभाव दूसरों की मदद करने वाला था।
मालूम हो 11 दिसंबर को शादी के बाद आईआईएस दीपल अपनी पत्नी और मां के साथ दिल्ली में खरीदे गए नए घर में शिफ्ट होने के लिए लखनऊ से चले थे। किसे पता था कि इसी महीने शादी के बंधन में बंधे इस नए जोड़े का ये आखिरी सफर होगा।
दीपल का 2015 बैच के आईआईएस में चयन हुआ था और दिल्ली में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में प्रशिक्षु आईआईएस के तौर पर कार्यरत थे। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर थाना ऊसराहार क्षेत्र के भरतिया कोठी के पास कार हादसे में उनकी मौत हो गई।
हरेक के लिए मददगार और साहित्यिक अभिरुचि ने दोस्तों के बीच उनकी पहचान इंटेलेक्चुअल व हेल्पिंग दीपल की बना दी थी। आकस्मिक और दर्दनाक हादसे को उनके दोस्त दो दिन बाद भी नहीं भूल सकें हैं।
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मालूम हो 11 दिसंबर को शादी के बाद आईआईएस दीपल अपनी पत्नी और मां के साथ दिल्ली में खरीदे गए नए घर में शिफ्ट होने के लिए लखनऊ से चले थे। किसे पता था कि इसी महीने शादी के बंधन में बंधे इस नए जोड़े का ये आखिरी सफर होगा।
दीपल का 2015 बैच के आईआईएस में चयन हुआ था और दिल्ली में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में प्रशिक्षु आईआईएस के तौर पर कार्यरत थे। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर थाना ऊसराहार क्षेत्र के भरतिया कोठी के पास कार हादसे में उनकी मौत हो गई।
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हरेक के लिए मददगार और साहित्यिक अभिरुचि ने दोस्तों के बीच उनकी पहचान इंटेलेक्चुअल व हेल्पिंग दीपल की बना दी थी। आकस्मिक और दर्दनाक हादसे को उनके दोस्त दो दिन बाद भी नहीं भूल सकें हैं।
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पढ़ाई में टॉप पर रहते थे
डेमो
- फोटो : डेमो
सोमवार को हर तरफ नववर्ष के जश्न को लेकर धूम थी लेकिन पीजीआई क्षेत्र की साउथ सिटी स्थित दीपल की पूरी गली में सन्नाटा पसरा रहा। दीपल के असमय जाने का दुख पूरी कॉलोनी में महसूस किया जा सकता है।
सोमवार को कुछ लोग शोक संतप्त परिवार का दुख हल्का करने पहुंचे लेकिन नियति की यह अनहोनी किसी को भी कुबूल नहीं हो रही थी। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि दीपल का पूरा परिवार ही अत्यंत मिलनसार और सामाजिक है, लेकिन दीपल पूरे परिवार का हीरा था। पड़ोसी बताते हैं कि दीपल पढ़ाई में टॉप पर रहते थे तो आसपास के लोगों से हमेशा हंसी खुशी मिलते थे।
सामाजिक आयोजनों में बढ़ - चढ़कर शामिल होते थे और लोगों की निजी समस्याओं में मददगार रहते थे। पड़ोसी महेंद्र कुमार बताते हैं उन्होंने ने सुना तो विश्वास ही नहीं हुआ, रात में भाग कर घर पर आये तो ताला बंद था। दो दिन बीत गए हैं लेकिन इस कड़वी हकीकत को मानने के लिए मन तैयार नहीं हो रहा है।
सोमवार को कुछ लोग शोक संतप्त परिवार का दुख हल्का करने पहुंचे लेकिन नियति की यह अनहोनी किसी को भी कुबूल नहीं हो रही थी। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि दीपल का पूरा परिवार ही अत्यंत मिलनसार और सामाजिक है, लेकिन दीपल पूरे परिवार का हीरा था। पड़ोसी बताते हैं कि दीपल पढ़ाई में टॉप पर रहते थे तो आसपास के लोगों से हमेशा हंसी खुशी मिलते थे।
सामाजिक आयोजनों में बढ़ - चढ़कर शामिल होते थे और लोगों की निजी समस्याओं में मददगार रहते थे। पड़ोसी महेंद्र कुमार बताते हैं उन्होंने ने सुना तो विश्वास ही नहीं हुआ, रात में भाग कर घर पर आये तो ताला बंद था। दो दिन बीत गए हैं लेकिन इस कड़वी हकीकत को मानने के लिए मन तैयार नहीं हो रहा है।
नहीं माना किसी दोस्त को छोटा या बड़ा
दीपल की मौत हो गयी इसका तो किसी भी दोस्त को विश्वास ही नहीं हो रहा था। उसके साथ केंद्रीय विद्यालय पीजीआई में पढ़ने वाले सौरभ सिंह ने बताया वह तेज दिमाग का स्टूडेंट था, तो अंदर से कोमल भी था।
उसने दो नॉवेल भी लिखी थीं। घटना से दुखी दोस्त अनुपम त्रिवेदी और नयन पाल ने बताया कि वह उनसे काफी जूनियर हैं लेकिन उन्होंने कभी इसका अहसास नहीं होने दिया।
दोस्तों के बीच उनका हेल्पिंग नेचर इतना मशहूर था कि उन्हें हेल्पिंग दीपल कहकर दोस्त पुकारते थे। अपने जीवन में उन्होंने कभी आर्थिक कारणों से किसी दोस्त को छोटा या बड़ा नहीं माना।
दीपल का छोटा भाई देवल भी इसी साल भारत सरकार की दूरसंचार सेवा में अधिकारी बना है। रविवार को उसके अंतिम संस्कार के मौके पर भी दोस्तों से लेकर हर शख्स रोता दिखाई दिया था।
उसने दो नॉवेल भी लिखी थीं। घटना से दुखी दोस्त अनुपम त्रिवेदी और नयन पाल ने बताया कि वह उनसे काफी जूनियर हैं लेकिन उन्होंने कभी इसका अहसास नहीं होने दिया।
दोस्तों के बीच उनका हेल्पिंग नेचर इतना मशहूर था कि उन्हें हेल्पिंग दीपल कहकर दोस्त पुकारते थे। अपने जीवन में उन्होंने कभी आर्थिक कारणों से किसी दोस्त को छोटा या बड़ा नहीं माना।
दीपल का छोटा भाई देवल भी इसी साल भारत सरकार की दूरसंचार सेवा में अधिकारी बना है। रविवार को उसके अंतिम संस्कार के मौके पर भी दोस्तों से लेकर हर शख्स रोता दिखाई दिया था।