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धारणा बदली तो बन गया यूपी में नया इतिहास : योगी सरकार की कानून व्यवस्था और सुशासन से बदली धारणा

Thu, 10 Mar 2022 04:20 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव सचिन मुदगल, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन मुदगल, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Thu, 10 Mar 2022 04:20 PM IST
सार

मुख्यमंत्री योगी ने सत्ता संभालते ही कानून व्यवस्था में सुधार कर प्रदेश की छवि बदलने को प्राथमिकता दी। एंटी भू माफिया टास्क फोर्स के जरिये सरकारी और निजी जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई को जनता ने सराहा।

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If the perception changed, it became a new history in UP: Yogi government's law and order and good governance changed the perception
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने कानून व्यवस्था और सुशासन से प्रदेश के प्रति देश ही नहीं दुनिया में धारणा बदली तो यूपी में लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनने का नया इतिहास बन गया। वहीं मोदी सरकार की जन कल्याण योजनाओं को धरातल पर उतार कर आधी आबादी का पूरा साथ लेने में भाजपा सरकार सफल रही।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालते ही कानून व्यवस्था में सुधार कर प्रदेश की छवि बदलने को प्राथमिकता दी। एंटी भू माफिया टास्क फोर्स के जरिये सरकारी और निजी जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई को जनता ने सराहा। वहीं पेशेवर अपराधियों और संगठित अपराध पर सख्त कार्रवाई, अपराधियों के खिलाफ एनकाउंटर की कार्रवाई से जनता में उम्मीद जगी। माफिया मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद सहित अन्य अपराधियों की अवैध संपत्ति पर चले बुलडोजर ने भी भाजपा के लिए चुनावी राह को साफ किया। शासन और प्रशासन के कामकाज में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टालरेंस की योगी की छवि ने भी ना केवल प्रदेश बल्कि देश भर में यूपी की नई तस्वीर पेश की।
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प्रदेश में कानून व्यवस्था में हुए सुधार से देश दुनिया में यूपी के प्रति धारणा बदली तो यूपी में निवेश की नई राह खुली। फरवरी 2018 में हुई इंवेस्टर्स समिट में देश ही नहीं विदेशों से भी निवेशक यूपी में निवेश करने आए। चार लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले, इसमें से तीन लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को अमली जामा भी पहनाया गया। इससे दो करोड़ युवाओं को रोजगार मिला। इतना ही नहीं प्रदेश को दंगा मुक्त बनाने और दंगाइयों की संपत्ति को जब्त करने के लिए योगी सरकार के कानून को भी जनता ने सराहा। सीएए के खिलाफ देश भर में आंदोलन हुए लेकिन यूपी में उनका असर दिखाई नहीं दिया। भाजपा ने चुनाव प्रचार में भी पहले चरण से ही कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाया। पहले चरण में कैराना के पलायन और मुजफ्फर नगर दंगों के जरिये सपा को घेरा। सपा के उम्मीदवारों की पहली सूची को ही जेल और बेल के नारे के जरिये कटघरे में खड़ा कर दिया। वहीं पूर्वांचल में मुख्तार और अतीक के साथ बाबा के बुलडोजर को मुद्दा बनाया। 
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कोरोना प्रबंधन ने भी बढ़ाया वोट
योगी सरकार के कोरोना प्रबंधन ने भी वोट बैंक बढ़ाने का काम किया। सरकार ने पहली लहर से ही कोरोना प्रबंधन पर फोकस किया। पहली लहर में प्रवासियों को मनरेगा में रिकार्ड रोजगार उपलब्ध कराया। दूसरी लहर से सबक लेते हुए सरकार ने कोरोना टीकाकरण का रिकार्ड बनाया। यूपी शत प्रतिशत लोगों को कोरोना की पहली डोज लगवाने वाला राज्य बना है। वहीं तीसरी लहर को नियंत्रित करने का असर चुनाव में दिखा।

राशन वितरण ने बनाई जीत की राह आसान
कोरोना संक्रमण की पहली लहर के दौरान ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीवन और जीविका बचाने के मंत्र के साथ मुफ्त राशन वितरण योजना शुरू की थी। मोदी ने प्रति व्यक्ति तीन किलो चावल और दो किलो गेहूं देना शुरू किया। मोदी के बाद योगी सरकार ने भी इतना ही राशन मुफ्त देना शुरू कर दिया। डबल इंजन की सरकार की ओर से प्रदेश में 14 करोड़ से अधिक लोगों को करीब डेढ़ वर्ष तक दिए गए डबल इंजन की सरकार के डबल राशन ने घर घर में भाजपा के लिए माहौल तैयार किया। मुफ्त राशन वितरण की योजना के असर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चुनाव से पहले सत्तारुढ़ दल के विधायकों ने चुनाव तक राशन वितरण को जारी रखने का दबाव बनाया। चुनाव प्रचार के दौरान महिलाएं खुलकर कहने लगी थी कि मोदी सरकार मुफ्त का राशन दे रही है वह उन्हें ही वोट देंगी। राशन वितरण की योजना का असर देखकर सीएम योगी ने चुनाव के दौरान ही राशन वितरण को आगे भी जारी रखने की घोषणा कर दी।

आधी आबादी का मिला पूरा साथ

भाजपा की चुनावी यात्रा में आधी आबादी का भी पूरा साथ मिला। प्रदेश सरकार और संगठन ने करीब दो वर्ष पहले से ही महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति तैयार की थी। महिलाओं को सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो स्क्वायड के गठन के साथ महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान, रोजगार और स्वरोजगार भी फोकस किया। सौभाग्य योजना, उज्जवला योजना, पीएम आवास योजना, सीएम आवास योजना की महिला लाभार्थियों को साधा। पीएम और सीएम आवास से महिलाओं को मिली छत और शौचालय से महिलाओं को मिला सम्मान के जरिये भी महिलाओं को साधा। वहीं महिलाओं को पुलिस भर्ती में 20 प्रतिशत आरक्षण, राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत करीब एक करोड़ महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा।

राशन वितरण की योजना ने भी महिलाओं के मन में भाजपा के लिए जगह बनाई। इतना ही नहीं सपा पर महिला विरोधी होने के आरोप को साबित करने के लिए भाजपा ने चुनाव से पहले सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को पार्टी में शामिल कराया। वहीं कांग्रेस की पोस्टर गर्ल प्रियंका मौर्य, कांग्रेस विधायक अदिति सिंह को भी भाजपा में शामिल किया। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा महिलाओं के बीच यह सोच स्थापित करने में सफल रही कि उन्हें सुरक्षा और सम्मान केवल योगी सरकार में ही मिल सकता है। वहीं मुस्लिम महिलाओं के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए उन्हें तीन तलाक से मिली आजादी के मुद्दे को भी हवा दी। चुनाव के नतीजे बताते हैं कि सपा के तमाम जातीय गठबंधन के बाद भी आधी आबादी ने भाजपा को बढ़त दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई।

ये योजनाएं भी बनी जीत का आधार
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, मुख्यमंत्री समग्र ग्राम विकास योजना, पीएम स्वनिधि योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, युवाओं को एक करोड़ टैबलेट और स्मार्ट फोन वितरण।

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