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Lucknow News: वैज्ञानिक पद्धति से सैंपल उठाएं तो निर्दोष को बचा सकते हैं
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सरोजनीनगर। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज (यूपीएसआईएफएस) में बुधवार को पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्णा के निर्देशन में क्राइम सीन मैनेजमेंट कोर्स शुरू हुआ। संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी और अपर पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवाएं नवीन अरोरा (आईपीएस) ने इसका शुभारंभ किया। 45 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से आरक्षी, मुख्य आरक्षी और उपनिरीक्षक स्तर के 100 प्रशिक्षणार्थी शामिल हुए।
नवीन अरोरा ने कहा, सैंपल वैज्ञानिक पद्धति से उठाए जाएं तो निर्दोष को अपराध में फंसने से बचाकर असली अपराधी को सजा दिलाई जा सकती है। उन्होंने सैंपल संग्रहण की विधियों तथा चेन ऑफ कस्टडी में चूक न होने की जानकारी दी।
डॉ. गोस्वामी ने कोर्स की रूपरेखा बताते हुए कहा कि इसे नए कानूनों व पुलिसिंग आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। नए कानून बीएनएसएस की धारा 176(3) पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सात वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में घटनास्थल का निरीक्षण फोरेंसिक टीम अनिवार्य रूप से करेगी। डॉ. गोस्वामी ने निठारी कांड में हुई जांच की कमियों का उदाहरण देते हुए साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन की अनिवार्यता पर बल दिया।
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समारोह में एडीजी नवीन अरोरा को निदेशक यूपीएसआईएफएस के साथ अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा, अपर पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र श्रीवास्तव और अतुल यादव ने सम्मानित किया। अंत में अपर निदेशक/डीआईजी राजीव मल्होत्रा ने आभार जताया। मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक जितेंद्र श्रीवास्तव, अतुल यादव, उपनिदेशक अतुल त्रिपाठी, वैज्ञानिक अधिकारी विवेक कुमार, उदय प्रताप सिंह, जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी, आरआई वृजेश सिंह, डॉ. निताश, डॉ. पोरवी सिंह, डॉ. स्वनिल, डॉ. पलक अनेजा, डॉ. मनीष राय, गिरिजेश राय व कार्तिकेय मौजूद रहे।
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नवीन अरोरा ने कहा, सैंपल वैज्ञानिक पद्धति से उठाए जाएं तो निर्दोष को अपराध में फंसने से बचाकर असली अपराधी को सजा दिलाई जा सकती है। उन्होंने सैंपल संग्रहण की विधियों तथा चेन ऑफ कस्टडी में चूक न होने की जानकारी दी।
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डॉ. गोस्वामी ने कोर्स की रूपरेखा बताते हुए कहा कि इसे नए कानूनों व पुलिसिंग आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। नए कानून बीएनएसएस की धारा 176(3) पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सात वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में घटनास्थल का निरीक्षण फोरेंसिक टीम अनिवार्य रूप से करेगी। डॉ. गोस्वामी ने निठारी कांड में हुई जांच की कमियों का उदाहरण देते हुए साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन की अनिवार्यता पर बल दिया।
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समारोह में एडीजी नवीन अरोरा को निदेशक यूपीएसआईएफएस के साथ अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा, अपर पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र श्रीवास्तव और अतुल यादव ने सम्मानित किया। अंत में अपर निदेशक/डीआईजी राजीव मल्होत्रा ने आभार जताया। मौके पर अपर पुलिस अधीक्षक जितेंद्र श्रीवास्तव, अतुल यादव, उपनिदेशक अतुल त्रिपाठी, वैज्ञानिक अधिकारी विवेक कुमार, उदय प्रताप सिंह, जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी, आरआई वृजेश सिंह, डॉ. निताश, डॉ. पोरवी सिंह, डॉ. स्वनिल, डॉ. पलक अनेजा, डॉ. मनीष राय, गिरिजेश राय व कार्तिकेय मौजूद रहे।