{"_id":"5db7d4098ebc3e01816743aa","slug":"if-diabetes-does-not-come-under-control-then-get-tuberculosis-checked","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"दवा से काबू में न आए शुगर तो कराएं ये जांच, मधुमेह के मरीजों में इस बीमारी का खतरा ज्यादा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दवा से काबू में न आए शुगर तो कराएं ये जांच, मधुमेह के मरीजों में इस बीमारी का खतरा ज्यादा
Tue, 29 Oct 2019 01:49 PM IST
Amulya Rastogi
चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Tue, 29 Oct 2019 01:49 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मधुमेह के मरीज का शुगर लेवल दवा खाने के बाद भी काबू में न आए तो उसे टीबी की जांच करानी चाहिए। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें शुगर के मरीजों पर दवाएं असर नहीं कर रही थीं, जब जांच कराई गई तो उनमें टीबी पाया गया। अब इन मरीजों को शुगर के साथ टीबी की भी दवा दी जा रही है।
केजीएमयू मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कौसर उस्मान ने बताया कि मधुमेह में रोग प्रतिरोधी क्षमता घट जाती है। ग्रामीण इलाके में मरीज शुगर नियंत्रित नहीं होने पर हाई डोज लेने लगते हैं। लंबे समय बाद केजीएमयू पहुंचते हैं और जांच में टीबी मिलने पर टैबलेट के बजाय इंसुलिन देना ज्यादा फायदेमंद रहता है।
तत्काल जांच हो जाए तो टीबी और शुगर दोनों को नियंत्रित किया जा सकता है। ओपीडी में तमाम ऐसे मरीज आ रहे हैं, जो शुगर से ग्रसित हैं, लेकिन जांच में टीबी की भी पुष्टि हो रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
केजीएमयू मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कौसर उस्मान ने बताया कि मधुमेह में रोग प्रतिरोधी क्षमता घट जाती है। ग्रामीण इलाके में मरीज शुगर नियंत्रित नहीं होने पर हाई डोज लेने लगते हैं। लंबे समय बाद केजीएमयू पहुंचते हैं और जांच में टीबी मिलने पर टैबलेट के बजाय इंसुलिन देना ज्यादा फायदेमंद रहता है।
विज्ञापन
तत्काल जांच हो जाए तो टीबी और शुगर दोनों को नियंत्रित किया जा सकता है। ओपीडी में तमाम ऐसे मरीज आ रहे हैं, जो शुगर से ग्रसित हैं, लेकिन जांच में टीबी की भी पुष्टि हो रही है।
विज्ञापन
मधुमेह के मरीजों में अलग दिखते हैं टीबी के लक्षण
प्रतीकात्मक तस्वीर
केजीएमयू के एसोसिएट प्रोफेसर और टीबी के नोडल प्रभारी डॉ. दर्शन बजाज बताते हैं कि मधुमेह के मरीज में टीबी के मूल लक्षण कुछ अलग दिखते हैं। खांसी कम आती हैं। संभव है कि खांसी में खून न आएं। सांस फूलती है, लेकिन चिकित्सक ठीक से स्क्रीनिंग करें तो पकड़ में आ जाता है।
अब टीबी के मरीजों में शुगर, एचआईवी की भी जांच कराई जाती हैं। शुगर के साथ टीबी होने पर एक्स-रे रिपोर्ट भी अलग दिखती है। मधुमेह वाले टीबी मरीजों का एक्स-रे में संक्रमण लेयर में दिखता है। टीबी की कुछ दवाओं में प्रतिरोधकता आ जाती है। इससे मधुमेह वालों को ज्यादा समय तक दवाएं खिलानी पड़ती हैं।
अब टीबी के मरीजों में शुगर, एचआईवी की भी जांच कराई जाती हैं। शुगर के साथ टीबी होने पर एक्स-रे रिपोर्ट भी अलग दिखती है। मधुमेह वाले टीबी मरीजों का एक्स-रे में संक्रमण लेयर में दिखता है। टीबी की कुछ दवाओं में प्रतिरोधकता आ जाती है। इससे मधुमेह वालों को ज्यादा समय तक दवाएं खिलानी पड़ती हैं।
मरीजों को चाहिए इंसुलिन, लेकिन अस्पतालों में सिर्फ शुगर की दवा
प्रतीकात्मक तस्वीर
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी किया आगाह
विश्व स्वास्थ्य संगठन के शोध के अनुसार, लेटेंट टीबी के मरीज, जिसमें बैक्टीरिया सक्रिय नहीं होते अगर उसे शुगर हो जाता है तो इन बैक्टीरिया के सक्रिय होने की आशंका चार गुना बढ़ जाती है। टीबी के मरीजों में करीब 10 प्रतिशत टीबी के मामले डायबिटीज से जुड़े हुए हैं।
मधुमेह और टीबी से ग्रसित लोगों पर दवाइयों का असर कम होता है और ऐसे लोगों को मल्टी ड्रग रेजीस्टेंस टीबी का खतरा बढ़ जाता है। टाइप 2 मधुमेह से ग्रसित लोगों में करीब छह प्रतिशत तक को एमडीआर टीबी हो सकता है और 30 प्रतिशत एमडीआर टीबी से ग्रसित लोगों में मधुमेह होने की ज्यादा आशंका होती है। मधुमेह नियंत्रित नहीं होता है तो नसें, आंख की रेटीना, और रक्त वाहिनियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
मधुमेह के ऐसे मरीज जिन्हें टीबी भी है, उन्हें डॉक्टर शुगर की दवा के बजाय इंसुलिन लेने की सलाह देते हैं। संपन्न मरीज मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीद लेते हैं, लेकिन गरीब मरीज दवा नहीं खा पाते हैं। सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि मधुमेह की दवा सरकारी अस्पतालों में दी जाती है। इंसुलिन की सप्लाई कम होती है। इसलिए कहीं समस्या हो सकती है। सभी अस्पतालों को मरीजों की संख्या के अनुसार ऑर्डर भेजने के लिए कहा जाएगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के शोध के अनुसार, लेटेंट टीबी के मरीज, जिसमें बैक्टीरिया सक्रिय नहीं होते अगर उसे शुगर हो जाता है तो इन बैक्टीरिया के सक्रिय होने की आशंका चार गुना बढ़ जाती है। टीबी के मरीजों में करीब 10 प्रतिशत टीबी के मामले डायबिटीज से जुड़े हुए हैं।
मधुमेह और टीबी से ग्रसित लोगों पर दवाइयों का असर कम होता है और ऐसे लोगों को मल्टी ड्रग रेजीस्टेंस टीबी का खतरा बढ़ जाता है। टाइप 2 मधुमेह से ग्रसित लोगों में करीब छह प्रतिशत तक को एमडीआर टीबी हो सकता है और 30 प्रतिशत एमडीआर टीबी से ग्रसित लोगों में मधुमेह होने की ज्यादा आशंका होती है। मधुमेह नियंत्रित नहीं होता है तो नसें, आंख की रेटीना, और रक्त वाहिनियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
मधुमेह के ऐसे मरीज जिन्हें टीबी भी है, उन्हें डॉक्टर शुगर की दवा के बजाय इंसुलिन लेने की सलाह देते हैं। संपन्न मरीज मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीद लेते हैं, लेकिन गरीब मरीज दवा नहीं खा पाते हैं। सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि मधुमेह की दवा सरकारी अस्पतालों में दी जाती है। इंसुलिन की सप्लाई कम होती है। इसलिए कहीं समस्या हो सकती है। सभी अस्पतालों को मरीजों की संख्या के अनुसार ऑर्डर भेजने के लिए कहा जाएगा।
यहां देखें- टीबी हेल्प लाइन नंबर
प्रतीकात्मक तस्वीर
शुगर का चल रहा था इलाज, पता चला टीबी भी है
केस 1
काकोरी निवासी रामवती को घबराहट व सिर दर्द रहता था। जांच में थायरॉइड व शुगर निकली। छह माह तक शुगर की दवा खाती रहीं। आराम नहीं मिला। केजीएमयू में आई तो टीबी की पुष्टि हुई। अब शुगर व टीबी दोनों की दवाएं खा रही हैं।
केस 2
उन्नाव के नवाबगंज निवासी रामू पटेल तीन साल से शुगर की दवा खा रहे थे। असर नहीं होने पर केजीएमयू आए। यहां टीबी की भी पुष्टि हुई। अब उन्हें एमडीआर टीबी की दवा चलाई जा रही है। साथ में इंसुलिन भी लेना पड़ता है। अब वह काम धंधे पर भी नहीं जा सकते हैं।
केस 3
मधुमेह पीड़ित राजधानी के सेवाराम (50) तीन माह तक शुगर की दवा खाते रहे। शुगर नियंत्रित नहीं हुई। करीब पांच हजार रुपया खर्च होने के बाद वह केजीएमयू आए। यहां शुगर के साथ टीबी का भी पता चला।
राज्य में 4.79 लाख टीबी मरीज
प्रदेश में करीब 479446 टीबी मरीज पंजीकृत हैं। इसमें 15 हजार मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) और 1600 एक्सडीआर के मरीज हैं। राजधानी में 12500 मरीज हैं, जिसमें एमडीआर के 550 और स्ट्रीम ड्रग रेजिस्टेंस के 60 मरीज हैं।
यहां से लें मदद
राष्ट्रीय टीबी हेल्प लाइन नंबर- 1800116666
केस 1
काकोरी निवासी रामवती को घबराहट व सिर दर्द रहता था। जांच में थायरॉइड व शुगर निकली। छह माह तक शुगर की दवा खाती रहीं। आराम नहीं मिला। केजीएमयू में आई तो टीबी की पुष्टि हुई। अब शुगर व टीबी दोनों की दवाएं खा रही हैं।
केस 2
उन्नाव के नवाबगंज निवासी रामू पटेल तीन साल से शुगर की दवा खा रहे थे। असर नहीं होने पर केजीएमयू आए। यहां टीबी की भी पुष्टि हुई। अब उन्हें एमडीआर टीबी की दवा चलाई जा रही है। साथ में इंसुलिन भी लेना पड़ता है। अब वह काम धंधे पर भी नहीं जा सकते हैं।
केस 3
मधुमेह पीड़ित राजधानी के सेवाराम (50) तीन माह तक शुगर की दवा खाते रहे। शुगर नियंत्रित नहीं हुई। करीब पांच हजार रुपया खर्च होने के बाद वह केजीएमयू आए। यहां शुगर के साथ टीबी का भी पता चला।
राज्य में 4.79 लाख टीबी मरीज
प्रदेश में करीब 479446 टीबी मरीज पंजीकृत हैं। इसमें 15 हजार मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस (एमडीआर) और 1600 एक्सडीआर के मरीज हैं। राजधानी में 12500 मरीज हैं, जिसमें एमडीआर के 550 और स्ट्रीम ड्रग रेजिस्टेंस के 60 मरीज हैं।
यहां से लें मदद
राष्ट्रीय टीबी हेल्प लाइन नंबर- 1800116666