नहीं पढ़ाई जाएगी दागी आईएएस अफसर की लिखी किताब
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खुद जितेंद्र कुमार और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के निदेशक अमरनाथ वर्मा ने शुक्रवार को सफाई दी कि उनकी किताब बोर्ड के पाठ्यक्रम में नहीं पढ़ाई जाएगी।
राज्यपाल राम नाईक ने गुरुवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में आईएएस अफसर लव वर्मा व जितेंद्र कुमार समेत चार लेखकों की इस किताब का लोकार्पण किया था। कार्यक्रम में बताया गया था कि इस किताब को यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाएगा।
बाद में प्रमुख सचिव ने भी इसकी पुष्टि की थी। लेकिन शुक्रवार को वे पलट गए। उन्होंने कहा, किताब को न तो पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है और न इसे पढ़ाया जाएगा। बाजार में यह पुस्तक मौजूद रहेगी।
यदि किसी को पढ़नी है, तो खरीदकर पढ़ सकता है। वहीं बोर्ड निदेशक अमरनाथ वर्मा ने भी सफाई दी कि प्रमुख सचिव की किताब को किसी भी विषय के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया गया है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद ने पुस्तक को हरी झंडी भी नहीं दी है। किताब को किसी भी विषय के पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने का प्रकरण तक विचाराधीन नहीं है।
अब बोले, पैसा कमाने के लिए नहीं लिखी किताब
जितेंद्र कुमार ने यह तो माना कि पुस्तक कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों को केंद्रित करके लिखी गई है, लेकिन उन्होंने कहा कि पैसा कमाने के लिए किताब को प्रकाशित नहीं किया है, न ही किताब के लिए प्रकाशक से कोई रॉयल्टी ली जाएगी।
माध्यमिक शिक्षा परिषद भले ही सफाई दे रही हो, लेकिन बोर्ड ने किताब के प्रकाशक को पाठ्यक्रम में पहले ही शामिल किया हुआ है। दरअसल, यह किताब हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखी गई है। हिंदी संस्करण का विमोचन पहले हो चुका है।
इसी साल 27 जून के गजट में हिंदी संस्करण की पुस्तक ‘मानव अधिकार अध्ययन’ प्रकाशक ‘माइंडशेयर’ को पाठ्यक्रम में संस्तुत किया जा चुका है।
गुरुवार को इसके अंग्रेजी अनुवाद का लोकार्पण कराया गया था। प्रकाशक अब भी यह कुबूल कर रहा है कि अंग्रेजी माध्यम के बच्चों को यही किताब पढ़ाई जाएगी।