कहीं रात को ही तो नहीं हो गई थी आईएएस अनुराग की मौत, गहराया रहस्य
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कर्नाटक काडर के आईएएस अफसर अनुराग तिवारी की मौत की गुत्थी और भी उलझती नजर आ रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने से मौत की पुष्टि के बाद किसी गहरी साजिश की आशंका पैदा हो रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आईएएस को गेस्टहाउस से निकलते किसी ने नहीं देखा तो उनकी मौत सुबह ही होने की बात कहां से आई? परिवारीजनों को शक है कि कहीं उनके साथ आधी रात को ही तो कोई घटना नहीं हो गई थी।
किसी ने रात को ही दम घोटकर मारने के बाद उन्हें सड़क किनारे फेंक दिया गया हो, जिससे सुबह राहगीरों से सूचना पाकर आई पुलिस इसे हादसा मान ले।
वहीं इस ममाले की जांच के लिए एसएसपी दीपक कुमार ने सीओ हजरतगंज अवनीश मिश्रा के नेतृत्व में एसआईटी गठित कर दी है। यह 72 घंटे में जांच करके रिपोर्ट सौंपेगी। एसआईटी में इंस्पेक्टर हजरतगंज आनंद कुमार शाही, इंस्पेक्टर गाजीपुर गिरजा शंकर त्रिपाठी, इंस्पेक्टर हसनगंज उदवीर सिंह और एसओ मड़ियांव अंजनी कुमार पांडेय को रखा गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से गहराया रहस्य
वहीं गुरुवार को बंगलूरु के कमिश्नर अतुल तिवारी ने फोन कर आईएएस अनुराग तिवारी की मौत के बारे में एसएसपी से जानकारी ली।
आईएएस के परिवार के एक करीबी का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का सटीक वक्त बताना मुश्किल होता है। शव की स्थिति और शरीर की अकड़न के आधार पर विशेषज्ञ कम से कम छह से आठ घंटे के अंतराल में मौत होने की बात कहते हैं।
आईएएस का शव बुधवार सुबह मिलने के बाद शाम को पोस्टमार्टम हुआ था। चिकित्सकों ने अपनी रिपोर्ट में आईएएस की मृत्यु का संभावित समय करीब एक दिन बताया है। यानि उनकी मौत सुबह पांच से छह बजे के बीच भी हो सकती है और रात दो से तीन बजे के बीच भी।
रिपोर्ट के आधार पर ही परिवारीजन साजिश की आशंका जता रहे हैं। उनका मानना है कि आईएएस को रात को ही मार दिया गया होगा।
उधर, शव मिलने से लेकर पुलिस के मौके पर पहुंचने, शव अस्पताल ले जाने और पुलिस कंट्रोलरूम में शव मिलने की सूचना की टाइमिंग को लेकर भी भ्रम की स्थितियां पैदा हो गई हैं।
सवालों में उलझी पुलिस
पुलिस सूत्रों का कहना है कि सुबह साढ़े पांच बजे एक दूधिए ने शव सड़क पर पड़ा होने की जानकारी दी थी, जिसके बाद नरही चौकी से पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए। नब्ज टटोलने पर युवक को मृत देख पुलिसकर्मियों ने एंबुलेंस के बजाए शव वाहन मंगाया और बॉडी सिविल अस्पताल ले गए।
पुलिसकर्मियों के पौने छह बजे शव लेकर सिविल अस्पताल पहुंचने की बात सामने आई है जबकि अस्पताल के रजिस्टर में सुबह 6.50 बजे इंट्री दिखाई गई है। आईएएस के परिवारीजनों का कहना है कि टाइमिंग में गड़बड़ी पूर्व नियोजित साजिश के तहत की गई होगी।
उन्होंने कहा कि आईएएस गेस्टहाउस से कब निकले? उनकी मौत कितने बजे और कहां हुई? उन्हें सड़क पर पड़े हुए कितने बजे देखा गया? इसका कोई गवाह नहीं है। ऐसे में पुलिस जो बता रही है, वही माना जा रहा है।
इस बारे में एसएसपी दीपक कुमार का कहना है कि सूचना और अस्पताल पहुंचने की टाइमिंग को लेकर कुछ मिनट इधर-उधर हो सकते हैं। बाकी सवालों की पड़ताल पुलिस कर रही है।
मार्निंग वॉक करने जाते तो फोन साथ ले जाते
जब वह पर्स ले गए तो फोन भी साथ ले जाने चाहिए थे। परिवारीजनों के मुताबिक कहीं ऐसा तो नहीं कि हत्यारे आसानी से उनकी पहचान कराना चाहते हों इसलिए हत्या के बाद पर्स जेब में रखकर उन्हें सड़क किनारे फेंका हो।
आईएएस के पास दो मोबाइल फोन थे, जिसमें से उनका सीयूजी नंबर आईफोन पर चलता था। यह आईफोन गायब है। परिवारीजनों का कहना है कि उनका पर्सनल फोन सुरक्षित है लेकिन सीयूजी गायब है?
सीयूजी फोन में था जरूरी डाटा
बृहस्पतिवार दोपहर हजरतगंज कोतवाली पहुंची एसटीएफ की टीम ने भी आईफोन के बारे में पड़ताल की। एसएसपी दीपक कुमार का कहना है कि आईफोन की तलाश की जा रही है।
उधर, हजरतगंज पुलिस ने बुधवार को ही एलडीए वीसी पीएन सिंह का मोबाइल फोन कब्जे में ले लिया था। पुलिस ने गहराई से पड़ताल के बाद बृहस्पतिवार दोपहर उन्हें फोन लौटा दिया।
जन्मदिन की बधाई से भरा पड़ा था वॉट्सएप का मैसेज बॉक्स
एसएसपी का कहना है कि वॉट्सएप पर आईएएस के जन्मदिन की बधाई के सैकड़ों मैसेज मिले। फोन के कॉल लॉग में आईएएस की मां, परिवार के अन्य सदस्यों, दोस्तों व करीबियों के नंबर मिले हैं। पुलिस ने दोनों मोबाइल फोन की बीते एक महीने की कॉल डिटेल निकलवाई है।
शहर में ठहरे कर्नाटक के लोगों की पड़ताल
एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि आईएएस के परिवारीजनों ने कर्नाटक में फूड सिविल सप्लाइज एंड कंज्यूमर्स अफेयर्स डिपार्टमेंट में 2000 करोड़ रुपये के घोटाले की शिकायत करने पर हत्या का आरोप लगाया है।
परिवारीजनों का कहना है कि घोटाले की शिकायत के कारण कर्नाटक सरकार और कई वरिष्ठ अधिकारी अनुराग से परेशान थे। उसकी हत्या की साजिश कर्नाटक में ही रची गई। वहां से आए लोगों ने उसकी मौत का खेल खेला है।
कर्नाटक से आए लोगों की हो रही पड़ताल
इस बारे में पता लगाया जा रहा है। उधर कर्नाटक के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिराम शंकर और पंकज कुमार पांडेय ने भी शासन के अधिकारियों से मुलाकात के बाद अपनी पड़ताल शुरू की।
जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया विसरा
एसएसपी ने बताया कि हजरतगंज पुलिस ने बृहस्पतिवार दोपहर विसरा की जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेज दिया गया है।
फोरेंसिक विभाग के डायरेक्टर एसबी उपाध्याय से जल्द से जल्द जांच कर रिपोर्ट देने का आग्रह किया गया है। फोरेंसिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि विसरा की जांच में दो दिन से एक सप्ताह तक का समय लग सकता है।