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'मुझे जमानत मामले सुनने को न दिए जाएं': SC की टिप्पणी से आहत हाईकोर्ट के जज, मुख्य न्यायमूर्ति से किया अनुरोध

Sat, 14 Feb 2026 01:18 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Sat, 14 Feb 2026 01:18 PM IST
सार

न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने अपने जमानत आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से आहत होकर मुख्य न्यायमूर्ति से जमानत याचिकाएं न सौंपने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी मनोबल गिराने वाली रही। मामला दहेज हत्या के आरोपी को दी गई जमानत से जुड़ा है।

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'I shouldn't be allowed to hear bail cases': High Court judge hurt by SC's remark, requests Chief Justice
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : AI

विस्तार

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति से अनुरोध किया है कि उन्हें जमानत याचिकाएं सुनने को न दी जाएं। उन्होंने अपने एक आदेश पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी से आहत होकर यह अनुरोध किया है।

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एक जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने मामले को किसी और पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का अनुरोध मुख्य न्यायमूर्ति से किया। इसी के साथ अपने एक पुराने आदेश पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणी का भी जिक्र किया। 
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उन्होंने कहा कि उनके द्वारा एक अन्य मामले में दिए गए जमानत आदेश को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई थी, सर्वोच्च न्यायालय ने उनके आदेश को निरस्त कर दिया जो कि सामान्य बात है। क्योंकि कोई भी न्यायाधीश यह दावा नहीं कर सकता कि उसके किसी आदेश को ऊपरी अदालत द्वारा कभी खारिज न किया गया हो या हस्तक्षेप न किया गया हो, लेकिन वर्तमान मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई टिप्पणी मनोबल गिराने वाली है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा था-हाईकोर्ट ने अपने विवेक का इस्तेमाल कहां किया

न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ द्वारा दहेज हत्या के एक मामले में अभियुक्त को दिए गए जमानत आदेश को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत आदेश को खारिज करते हुए टिप्पणी की थी कि यह आदेश उन सबसे निराशाजनक आदेशों में से है जो हमने पिछले कुछ समय में देखे हैं। 

इस आदेश द्वारा आखिर हाईकोर्ट कहना क्या चाहता है, उसने कहां अपने विवेक का इस्तेमाल किया। सिर्फ बचाव पक्ष की दलीलों और अभियुक्त की जेल में बिताई गई अवधि के आधार पर जमानत दे दी।

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