क्यों होती है मिर्गी की बीमारी? क्या इलाज संभव है
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विश्व मस्तिष्क दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक कार्यक्रम में एम्स के चिकित्सक ने कहा कि मिर्गी के 70 से 80 फीसदी मरीजों तक दवा नहीं पहुंच पाती है या बीच में दवा छोड़ देते हैं। यदि मरीज लगातार दवा खाए तो बीमारी से घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
बीमारी से पीड़ित लोग भी दूसरे लोगों की तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं और अपना काम सही तरीके से कर सकते हैं। भारत में करीब 1.20 करोड़ लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बार विश्व मस्तिष्क दिवस को मिर्गी पर समर्पित किया है। इस मौके पर एम्स ओर से मंगलवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में एम्स न्यूरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. मंजरी त्रिपाठी ने कहा कि अगर भारत में 70 से 80 फीसदी मिर्गी मरीजों को दवा नहीं मिल पाती है या बीच में ही दवा छोड़ देते हैं।
इसी वजह से मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसलिए सरकार को चाहिए कि इस बीमारी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम में इस शामिल करे। डॉ. मंजरी ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को सही तरीके से लागू किया जाए तो इस बीमारी के मरीजों की संख्या में 30 से 40 फीसदी तक की कमी आ सकती है।
ये हैं बीमारी के लक्षण और कारण
विशेषज्ञों ने कहा कि मिर्गी का मरीज अगर सस्ती दवा लेता है तो एक महीने में 500 रुपये और महंगी दवा लेता है तो एक माह में दो से तीन हजार रुपये का खर्च आता है। सरकार की ओर से मरीजों को मुफ्त दवा मिलनी चाहिए।
एकत्वम की शिवानी वजीर ने बताया कि मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति को घर के लोग ही अलग-थलग करने लगते हैं। पढ़े-लिखे लोगों में भी बीमारी के प्रति अज्ञानता है। यही वजह है कि यह बीमारी आम बीमारी की तुलना में ज्यादा खराब मानी जाने लगी है।
डॉक्टरों ने इस बीमारी के होने की वजह भी बताईं। जन्म के समय बच्चे के दिमाग में ऑक्सीजन की कमी होने, मस्तिष्क में चोट लगने, ब्रेन ट्यूमर, मेनेजाइटिस और जापानी बुखार होने के बाद भी मिर्गी का खतरा रहता है। दो से तीन फीसदी मरीजों में आनुवांशिक कारण देखा गया है। इसके अलावा कुछ अन्य कारक भी मिर्गी के लिए जिम्मेदार होते हैं।