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‘बांग्लादेशी’ पत्नी को पाने के लिए भटक रहा यूपी निवासी पति, इस वजह से नहीं मिल पा रहे दोनों
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 14 Jun 2018 11:17 AM IST
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एक लावारिस लड़की से शादी करने के बाद से बलरामपुर के तुलसीपुर के रहने वाले कारोबारी सुरजन अधिकारी पत्नी प्रिया विश्वास को पाने के लिए भटक रहे हैं। प्रिया को बांग्लादेश का निवासी करार देते हुए निचली अदालत ने पहले विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत दो वर्ष की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट ने दो हफ्ते पहले सजा के आखिरी पांच महीनों की सजा माफ कर रिहा करने के आदेश दिए, पर सुरजन की पत्नी से मिलने की आस पूरी नहीं हुई। प्रदेश सरकार प्रिया को बांग्लादेश उच्चायोग को सौंपने का प्रयास कर रही है। इसके खिलाफ सुरजन ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है, जिस पर अदालत ने प्रदेश सरकार व अन्य संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।अगली सुनवाई छह जुलाई को रखी गई है।
सुरजन अधिकारी के अधिवक्ता दिलीप पाठक ने दावा किया कि याची की पत्नी प्रिया कोलकाता की रहनी वाली हैं। वह बचपन में लावारिस हालत में कोलकाता की रहने वाली दीप्ति पाठक नामक महिला को मिली थी। दीप्ति से सुरजन का परिचय था जिनके पास वे अक्सर कोलकाता जाते रहते थे। इसी दौरान वे प्रिया के संपर्क में आए, दोनों में प्रेम हुआ और जुलाई 2016 में शादी कर ली।
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वे प्रिया को लेकर तुलसीपुर आए, लेकिन कुछ लोगों ने प्रिया को बांग्लादेशी बताते हुए पुलिस में शिकायत कर दी। निचली अदालत से प्रिया को बिना पासपोर्ट व वीजा के अनधिकृत रूप से भारत में रहने पर दो साल की सजा हुई। इसके खिलाफ अपील पर 29 मई को हाईकोर्ट ने प्रिया की सजा के बचे हुए पांच महीने माफ करते हुए रिहा करने के आदेश दिए।
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हाईकोर्ट ने दो हफ्ते पहले सजा के आखिरी पांच महीनों की सजा माफ कर रिहा करने के आदेश दिए, पर सुरजन की पत्नी से मिलने की आस पूरी नहीं हुई। प्रदेश सरकार प्रिया को बांग्लादेश उच्चायोग को सौंपने का प्रयास कर रही है। इसके खिलाफ सुरजन ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है, जिस पर अदालत ने प्रदेश सरकार व अन्य संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।अगली सुनवाई छह जुलाई को रखी गई है।
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सुरजन अधिकारी के अधिवक्ता दिलीप पाठक ने दावा किया कि याची की पत्नी प्रिया कोलकाता की रहनी वाली हैं। वह बचपन में लावारिस हालत में कोलकाता की रहने वाली दीप्ति पाठक नामक महिला को मिली थी। दीप्ति से सुरजन का परिचय था जिनके पास वे अक्सर कोलकाता जाते रहते थे। इसी दौरान वे प्रिया के संपर्क में आए, दोनों में प्रेम हुआ और जुलाई 2016 में शादी कर ली।
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वे प्रिया को लेकर तुलसीपुर आए, लेकिन कुछ लोगों ने प्रिया को बांग्लादेशी बताते हुए पुलिस में शिकायत कर दी। निचली अदालत से प्रिया को बिना पासपोर्ट व वीजा के अनधिकृत रूप से भारत में रहने पर दो साल की सजा हुई। इसके खिलाफ अपील पर 29 मई को हाईकोर्ट ने प्रिया की सजा के बचे हुए पांच महीने माफ करते हुए रिहा करने के आदेश दिए।
सरकार का तर्क, भारतीय नागरिक से शादी करके दोषमुक्त नहीं हो जाती प्रिया
प्रदेश सरकार की ओर से हाईकोर्ट में बताया गया कि प्रिया को विदेशी नागरिक अधिनियम में दोषी करार दिया जा चुका है। हाईकोर्ट के आदेश पर रिहा होने के बाद भी उसका दोष खत्म नहीं हो जाता। न ही भारतीय नागरिक से उनकी शादी उन्हें दोषमुक्त करती है, वह अनधिकृत रूप से भारत में रह रही थी।
ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश पर प्रिया को रिहा करने के बाद उसे बांग्लादेश हाईकमीशन को या उनके द्वारा अधिकृत किए गए किसी व्यक्ति को ही सौंपा जा सकता है। इसके लिए बलरामपुर जेल के वरिष्ठ अधीक्षक ने बांग्लादेश हाईकमीशन नई दिल्ली को पत्र लिखा है। प्रिया को इसी वजह से दिल्ली ले जाया गया है।
ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश पर प्रिया को रिहा करने के बाद उसे बांग्लादेश हाईकमीशन को या उनके द्वारा अधिकृत किए गए किसी व्यक्ति को ही सौंपा जा सकता है। इसके लिए बलरामपुर जेल के वरिष्ठ अधीक्षक ने बांग्लादेश हाईकमीशन नई दिल्ली को पत्र लिखा है। प्रिया को इसी वजह से दिल्ली ले जाया गया है।