लखनऊ मेट्रो की राह में आया बड़ा रोड़ा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेट्रो रेल परियोजना की प्रगति को एक बड़ा झटका लगा है। रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग का टेंडर डालने वाली बड़ी कंपनियों ने एलएमआरसी के तय समय में इस परियोजना को पूरा करने से इन्कार कर दिया है।
एलएमआरसी जहां 66 सप्ताह काम पूरा करने के लिए कंपनियों को दे रही है, वहीं कंपनियां 90 सप्ताह से कम समय में काम को पूरा करने को लेकर राजी नहीं हैं। इसके साथ ही कंपनियों ने एलएमआरसी से विदेशी ऋण मिलने के संबंध में क्लीयरेंस भी मांगी है।
जबकि, अब तक लखनऊ मेट्रो को पीआईबी की स्वीकृति ही नहीं मिल सकी है। ऐसे में एलएमआरसी इन दोनों ही मांगों को लेकर बुरी तरह से उलझ गया है। ऐसे में इस टेंडर को खोलने की तारीख अब जुलाई तक बढ़ा दी गई है। फिलहाल एलएमआरसी के अधिकारी इस संबंध में बहुत अधिक बोलने की स्थिति में नहीं हैं। उनका कहना है कि, वे हर स्तर पर कोशिश करेंगे कि, काम तेजी से हो।
900 करोड़ के टेंडर के लिए आई थी नामचीन कंपनियां
सिविल वर्क के बाद एलएमआरसी ने प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। करीब 900 करोड़ रुपये का टेंडर हासिल करने के लिए दुनिया की अनेक नामचीन कंपनियों के प्रतिनिधि आए थे।
मेट्रो रेल की बोगी, इंजन सप्लाई करने और सिग्नलिंग सिस्टम के संचालन के लिए टेंडर को लेकर हुई प्री बिड कांफ्रेंस में 18 बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था। नार्थ-ईस्ट कॉरिडोर में टीपी नगर से मुंशीपुलिया के बीच मेट्रो रेल परियोजना 80 कोच बनाए जाएंगे।
एलएमआरसी ने तय किया था कि, पहले छह कोच जून-2016 तक कंपनी को देने होंगे। जबकि, परियोजना का तकनीकी परीक्षण शुरू होने से पहले हर हाल में सभी 80 कोच एलएमआरसी को मिल जाएंगे। इसका अर्थ था कि दिसंबर-2016 से पहले।
मेट्रो रेल परियोजना के रोलिंग स्टॉक और सिग्निलंग सिस्टम का काम करने के लिए विश्व स्तर की बड़ी कंपनियों ने काम करने की इच्छा जाहिर की है। 18 कंपनियों टेंडर डॉक्यूमेंट लिए थे। हुंडई, सिमेन्स, हिटाची, एल्सट्रेम, रॉटलेम, बीईएमएल, बाम्बार्ड आदि कंपनियां शामिल हैं।
तीन मार्च को टेंडर नहीं खुलेगा
इस संबंध में तकनीकी बिड पहले तीन मार्च को खुलनी था, मगर कंपनियों ने जिस तरह की मांगें एलएमआरसी के सामने रख दी हैं, उसके बाद में तीन महीने के लिए इस टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया है।
इससे परियोजना में तीन महीने के विलंब को किस तरह से मैनेज किया जाएगा, ये भी एक बड़ा सवाल सामने आ चुका है। इसे लेकर एलएमआरसी के निदेशक महेंद्र कुमार ने कहा कि वह 24 घंटे काम कर के इस समय के नुकसान की भरपाई कर देंगे।
इस क्षेत्र की नामचीन कंपनियों ने एलएमआरसी के अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि 66 सप्ताह के भीतर 80 कोचों का निर्माण संभव नहीं है। उनको हर हाल में 90 सप्ताह का समय चाहिए होगा। अगर ऐसा हुआ, तब दिसंबर-2016 में ट्रायल रन शुरू हो पाना संभव नहीं होगा।
जबकि, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की यही इच्छा है। इसी लक्ष्य को आधार मान कर एलएमआरसी काम कर रहा है। ऐसे में परियोजना के लोकार्पण का विधानसभा चुनाव 2017 की आचार संहिता में भी फंसने का खतरा सामने होगा।
कौन देगा लोन, कब मिलेगी पीआईबी की मंजूरी
एलएमआरसी के निदेशक दलजीत सिंह और महेंद्र कुमार ने बताया कि कंपनियों ने उन पर शर्त कुछ रख दी है। कंपनी का कहना है कि टेंडर स्वीकार करने से पहले वे चाहेंगे कि एलएमआरसी बताए कि उसकी फंडिंग एजेंसी (विदेशी ऋण देने वाला बैंक) कौन सी है।
इसके लिए पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) की स्वीकृति आवश्यक होगी। वह स्वीकृति भी अब तक नहीं मिल सकी है।
एलएमआरसी के निदेशक दलजीत सिंह का कहना है कि हमको तेजी से काम करना है, हम पूरी कोशिश करेंगे।
रोलिंग स्टॉक के टेंडर में देरी होने के सवाल पर दलजीत ने जवाब दिया कि जी हां, इसको तीन महीने के लिए आगे बढ़ाया गया है। हम दोगुना काम कर के समय पर परियोजना को समय पर पूरा कर देंगे।