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टीपू से नाराजगी, 60 लाख दबाएंगे NOTA!

Fri, 14 Mar 2014 10:27 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 14 Mar 2014 10:27 AM IST
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huge protest in up to boycott loksabha election

लोकसभा चुनाव की गर्मी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। अब यूपी के 16 लाख राज्य कर्मचारियों ने वोटिंग के दौरान नोटा दबाने का फैसला लेकर अखिलेश की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

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एक तरफ, राजनीतिक पार्टियां यूपी में सियासी दांवपेंच में लगी हुई हैं तो दूसरी तरफ राज्यकर्मी भी इस मौके का पूरा फायदा उठाने की फिराक में हैं।

पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग को लेकर प्रदेश के करीब 16 लाख राज्य कर्मचारी लोकसभा चुनाव में ‘नोटा’ का इस्तेमाल करेंगे।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। जिलों में भी अपनी इकाईयों को यह संदेश दे रहे हैं कि इस बार सर्वाधिक मतदान करते हुए नोटा का इस्तेमाल किया जाए।

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करीब 60 लाख वोट जाएंगे बेकार?

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चुनाव आयोग ने इस बार यह विकल्प दे दिया है कि यदि कोई मतदाता किसी भी प्रत्याशी को वोट नहीं देना चाहते हैं तो वे ‘नन ऑफ दि एबोव’ (नोटा) का इस्तेमाल कर सकते हैं।

यह ईवीएम में सबसे अखिरी के बटन में दिया जाता है। इसमें पड़े वोटों को अलग से गिना जाता है।

अगर राज्य कर्मचारी ‘नोटा’ का इस्तेमाल करते हैं तो इसका असर प्रदेश की कई लोकसभा सीटों पर पड़ेगा। प्रदेश में 16 लाख कर्मचारी हैं।

इनके परिवारों के करीब 60 लाख मत हैं। ये सभी बेकार जा सकते हैं। दिल्ली की विधानसभा में ही ‘नोटा’ के इस्तेमाल से कई दिग्गज चुनाव हार गए थे। उसी का प्रयोग इस बार यूपी में भी करने की तैयारी है।

राज्य व केंद्र, दोनों सरकारों की बेरुखी

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गुरुवार को राजधानी में आयोजित पत्रकार वार्ता में परिषद के अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी व महामंत्री शिवबरन सिंह यादव ने बताया कि वेतन विसंगति व पेंशनबहाली को लेकर राज्य व केंद्र सरकार बेरुखी दिखा रही हैं।

इस कारण अब कर्मचारियों के परिवार इस चुनाव में किसी भी प्रत्याशी को मतदान न करके ‘नोटा’ का इस्तेमाल करेंगे। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठनों से भी संपर्क करने में जुट गया है।

उन्होंने बताया कि पिछले साल एक अभियान चलाकर सांसदों से पुरानी पेंशन बहाली को लेकर परिषद ने एक अभियान चलाया था।

इसमें 40 सांसदों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने के लिए पत्र लिखा था। इसके बावजूद सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया।

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'आप' की शाजिया भुगत चुकी हैं खामियाजा

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नोटा का खौफ भले ही अखिलेश यादव को न सता रहा हो, लेकिन पिछले दिनों हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में आरके पुरम सीट से 'आप' की उम्मीदवार शाजिया इल्मी महज 326 वोटों से हार गई थीं।

दिलचस्प बात यह है कि वहां 528 मतदाताओं ने ईवीएम के नोटा (इनमें से कोई नहीं) का इस्तेमाल किया था।

यह सही तौर पर तो नहीं कहा जा सकता, पर इससे जाहिर है कि ईवीएम पर नोटा न होता या फिर ये वोट शाजिया के पाले में गिरते तो उनकी तस्वीर अलग ही होती।

इतना ही नहीं, पांचों राज्यों के चुनावी नतीजों को गौर से देखें, तो पता चलता है कि तकरीबन हर सीट पर नोटा बटन का इस्तेमाल किया गया।

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