गलत तरीके से एडमिशन देने पर मेडिकल कॉलेज 150 छात्रों को देगा दो-दो लाख मुआवजा
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हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गलत तरीके से एमबीबीएस में दाखिला देने पर छात्रों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने का अपना ही आदेश बदलते हुए रकम दो लाख रुपये कर दी है।
जस्टिस अमरेश्वर प्रताप साही और जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने छात्रों को उनकी फीस लौटाते हुए इस रकम पर 10 फीसदी ब्याज भी देने का आदेश दिया है।
मामला डॉ. एमसी सक्सेना कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस का है। उसने सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद 150 छात्रों को एमबीबीएस में दाखिला दिया था। हालांकि अदालत ने फैसला खारिज करने से इन्कार कर दिया।
सात नवंबर को हाईकोर्ट ने संस्थान को निर्देश दिया था कि वह दो महीने में हरविद्यार्थी को 25 लाख रुपये अदा करे। इसके तहत संस्थान को 37.5 करोड़ रुपये चुकाने थे। संस्थान ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी।
प्रतिवादी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिवक्ता ज्ञानेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अदालत ने जस्टिस डॉ. देवेंद्र कुमार अरोड़ा के पूर्व में दिए निर्णय को बरकरार रखा। इसके अलावा संस्थान के तीन अन्य पूर्व विद्यार्थियों की अपील भी खारिज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद लिया था एडमिशन
एमसीआई के अनुमति न देने के बावजूद डॉ. एमसी सक्सेना कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस, लखनऊ ने वर्ष 2015 में प्रवेश परीक्षा के बाद 150 छात्रों को एमबीबीएस फर्स्ट ईयर में दाखिला दिया था।
कॉलेज हाईकोर्ट पहुंचा तो 24 सितंबर को अदालत ने इस शर्त पर अंतरिम दाखिले की अनुमति दी कि प्रवेश कोर्ट के अगले आदेश के अधीन रहेंगे। एमसीआई ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
शीर्ष कोर्ट ने 10 मार्च, 2016 को इन आदेशों को रद्द कर दिया। तब कॉलेज ने छात्रों के भविष्य का हवाला देकर उन्हें दूसरे कॉलेज में समायोजित करने की अपील की। हाईकोर्ट ने इसे नहीं माना और हर छात्र को 25 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया था।