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जड़ी बूटियों के सही अनुपात वाला काढ़ा ही फायदेमंद, पर सामग्री की उचित मात्रा बेहद जरूरी
Mon, 01 Jun 2020 01:27 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 01 Jun 2020 01:27 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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आयुर्वेद में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए एक नायाब तरीका आयुष क्वाथ यानि काढ़ा है। यह तभी अधिक फायदेमंद साबित हो सकता है जब इसमें प्रयुक्त होने वाली सामग्री की मात्रा सही हो। इसके अलावा च्यवनप्राश और गोल्डन मिल्क (दूध-हल्दी) भी कोरोना वायरस समेत तमाम संक्रामक बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यूपी की आयुष इकाई के महाप्रबंधक डॉ. रामजी वर्मा ने बताया कि रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए आयुष क्वाथ को चार प्रमुख औषधीय जड़ी बूटियों तुलसी की पत्ती, दालचीनी, सोंठ और काली मिर्च मिलाकर तैयार किया जाता है। इसके लिए तुलसी पत्ती चार भाग, दालचीनी दो भाग, सोंठ दो भाग और काली मिर्च का एक भाग होना चाहिए।
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काढ़ा बनाने के लिए सबसे पहले सभी सूखी सामग्रियों से मोटा पाउडर बना लें, तीन ग्राम का पाउच या टी बैग बनाएं या 500 मिलीग्राम पाउडर की गोली बनाएं। 150 मिलीलीटर उबले पानी में इसे घोलकर चाय की तरह एक या दो बार सेवन कर सकते हैं। स्वाद के लिए इसमें गुड़ या फिर नींबू का रस भी मिला सकते हैं।
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इसके अलावा सुबह 10 ग्राम (एक चम्मच) च्यवनप्राश का सेवन करना भी सेहत के लिए फायदेमंद होता है। मधुमेह रोगियों को शुगर फ्री च्यवनप्राश लेना चाहिए। 150 मिलीलीटर गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीने से भी शरीर को रोगों से लड़ने की ताकत मिलती है। गुनगुना पानी पीना भी फायदेमंद होता है।