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शुक्रिया मोदी भाईजान: अब तक तो दूर ही रहे, क्या 'भाई' बनकर मुस्लिम बहनों के वोट पाएंगे मोदी, क्या है रणनीति?

Tue, 16 Jan 2024 11:31 PM IST
Rohit Mishra रोहित मिश्र
Updated Tue, 16 Jan 2024 11:31 PM IST
सार

यूपी में 'शुक्रिया मोदी भाईजान' कार्यक्रम शुरू हुआ है। इस कार्यक्रम के जरिए बीजेपी मुस्लिम महिलाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेगी। समझते हैं इस विश्लेषण से कि यह क्यों हो रहा है और क्या यह वोट में तब्दील होगा? 

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How successful will be the thank you Modi Bhai Jaan program, will Muslim women vote for BJP?
शुक्रिया मोदी भाईजान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुसलमान बीजेपी को वोट नहीं देते। यह एक प्रचलित और स्वीकार्य सत्य है। राजनीति के केंद्र में मोदी के आ जाने के बाद यह खाईं और गहरी हुई है यह भी करीब-करीब स्वीकार्य करने वाला फैक्ट है। बीजेपी इस तथ्य से मुंह नहीं मोड़ती रही है। बल्कि उसे स्वीकार्य करती रही है। उसके नेता गाहे-बगाहे 80 प्रतिशत बनाम 20 बीस प्रतिशत की बातें करते आए हैं। यानी वह मानकर चल रहे हैं कि उस 20 प्रतिशत में उनकी दिलचस्पी नहीं है। पर तमाम सारे पुराने तथ्यों, और राजनीतिक पैटर्नों को झुठलाने वाले नरेंद्र मोदी शायद इस तथ्य को भी नए सिरे से परिभाषित करना चाह रहे हैं। आज की बीजेपी चाहती है कि मुसलमान उसे वोट करें। वह चाहती है कि वह किसी एक धर्म के लोगों की पार्टी ना कही जाए। जिस तरह से उसका फैलाव उत्तर से दक्षिण, और पूर्व से पश्चिम की तरफ हुआ है वैसी ही स्वीकार्यता हर धर्म और जाति में भी हो। बीजेपी पूरे देश की पार्टी कही जाए और उसे हर धर्म के लोग वोट करें। तो सार यह कि बीजेपी अब मुसलमानों के वोट चाहती है। वह सारे मुसलमानों से यह उम्मीद नहीं करती। वह उस पूरे वोट बैंक में थोड़ी सी सेंध लगाना चाहती है। उनकी दिलचस्पी महिला वोटरों में हैं। 

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यूपी अल्पसंख्यक बीजेपी की तरफ से 'शुक्रिया मोदी भाईजान' उसी मुहिम का हिस्सा है। तीन तलाक के समय से ही बीजेपी मुस्लिम महिला मतदाताओं के साथ खड़ी दिखने की कोशिश में है। तीन तलाक के समय बीजेपी के जिन भी नेताओं ने इसे खत्म करने के पक्ष में दलीलें दीं उनका निचोड़ यही था कि मुस्लिम पुरुष  शोषक है और मुस्लिम महिलाएं शोषित। बीजेपी शोषित के साथ खड़ी है। तीन तलाक के बाद बीजेपी एक बार फिर से मुस्लिम महिला वोटरों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। शुक्रिया मोदी भाई जान निश्चित ही यूपी बीजेपी के द्वारा शुरू की गई मुहिम है लेकिन यदि यह सफल होती है तो बीजेपी इसे उन राज्यों में भी आगे बढ़ाएगी जहां मुस्लिम मतदाता ठीक संख्या में है। 
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लाभार्थी को आगे करने की कोशिश 
बीजेपी की कोशिश है कि मुस्लिम महिलाओं को आगे करके यह बताया जाए कि मोदी सरकार की योजनाओं से उनकी जिंदगी में बदलाव आया है। उन्हें अकेले हज पर जाने का अधिकार मिला है। शौचालय बन जाने से इज्जत में इजाफा हुआ है और असुरक्षाएं कम हुई हैं। उज्जवला और आयुष्मान जैसी योजनाओं से उनकी जिंदगी आसान हुई है। यूपी में इस योजना के सूत्रधार और संचालक कुंवर बासित अली कहते हैं कि हमें पूरी यूपी में ऐसे हजारों महिलाएं मिलीं जो इस बात के लिए शुक्रिया अदा करती हैं कि सरकार ने उनके घर शौचालय बनवा दिए। उन्हें घर के बाहर जाने की शर्मिंदगी से बचा लिया है। शुक्रिया मोदी भाईजान शब्द यहीं से जन्मा है। बासित अली बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष हैं और मोदी भाईजान नाम उन्हीं की देन माना जा रहा है। शुक्रिया मोदी भाईजान योजना के तहत यूपी की सभी 80 लोकसभा सीटों में कार्यक्रम होंगे। बीजेपी उन मुस्लिम महिलाओं को सामने लेकर आएगी जिन्हें बीजेपी की योजनाओं का लाभ मिला है। यह कार्यक्रम लखनऊ में सफलतापूर्वक हो गया है। बरेली में आज हो रहा है और मेरठ में जल्द ही होना है। 
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मेरी कहानी मेरी जुबानी

How successful will be the thank you Modi Bhai Jaan program, will Muslim women vote for BJP?
मोदी भाई जान - फोटो : अमर उजाला
शुक्रिया मोदी भाईजान कार्यक्रम का मुख्य हिस्सा 'मेरी कहानी मेरी जुबानी' होगा। इसमें मुस्लिम महिलाएं मंच पर आकर अपनी जिंदगी की दुश्वारियां बताएंगी साथ ही यह बताएंगी कि सरकार की योजनाओं ने उनकी जिंदगी में क्या बदलाव किया है। इसके लिए हर जिले में मुस्लिम महिलाओं का चयन हो गया है। बासित अली कहते हैं कि राज्य और केंद्र की सरकारी योजनाओं में ज्यादातर में महिलाओं का नाम है। वही उसकी लाभार्थी हैं। बीजेपी ने बिना शोरगुल किए हुए उनकी जिंदगी को बदलने का काम किया है। उसने तुष्टीकरण की राजनीति नहीं की बल्कि उसने जमीनी स्तर पर चीजों को बदलने का काम किया है। महिलाएं खुद बताएंगी कि मोदी ने उनकी जिंदगी को कैसे बदला है। अब यह उनका निर्णय होगा कि वह वोट किसे देती हैं। हम इसे वोट के लिए नहीं कर रहे हैं। बस हम ये बताना चाहती हैं कि मुस्लिम महिलाओं से मोदी से कोई दूरी नहीं है। वह उनके भाई जान हैं। भाई का रिश्ता एक बहन के लिए नफे-नुकसान से परे होता है।  

क्या बीजेपी टिकट भी देगी?
केंद्र की लोकसभा सरकार में एक भी बीजेपी मुस्लिम सांसद नहीं है। ऐसा इसलिए 2014 और 2019 दोनों ही चुनावों में बीजेपी ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया। ऐसा ही 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में हुआ। यहां भी बीजेपी की तरफ से एक भी मुस्लिम व्यक्ति को टिकट नहीं दिया गया। यदि बीजेपी मुसलमानों को टिकट ही नहीं देना चाहती तो फिर उस समाज के लोगों का विश्वास कैसे बनेगा? इस सवाल पर बासित अली कहते हैं कि बीजेपी ने भले ही सांसद और विधायक के लिए बीजेपी को टिकट ना दिया हो लेकिन उसने राज्यसभा और विधान परिषद के माध्यम से मुस्लिमों को मौका दिया है। आने वाले समय में यह रवायत भी टूटेगी। जैसे-जैसे लोग पार्टी के साथ जुड़ते जाएंगे संभव है कि उनको टिकट भी दिए जाएं। पार्टी से कुछ दूरी थी यह समय के साथ-साथ खत्म होगी। 

कितना लाभ होगा इस मुहिम से 
शुक्रिया मोदी भाई जान मुहिम से बीजेपी को कितना चुनावी लाभ होगा इस बारे में राजनीतिक पंडित बंटे हुए हैं। सीएसडीएस से जुड़े हुए राजनीतिक विश्लेषक बिलाल अहमद कहते हैं कि बीजेपी चाहती है कि उसे सर्व समाज की पार्टी के तौर पर देखा जाए। भले ही उसे मुस्लिम वोट ना मिलें लेकिन उसकी इमेज मुस्लिम विरोधी भी ना रह जाए। इससे बीजेपी को लाभ यह होगा कि तमाम सारे ऐसे वोटर जो बीजेपी की कट्टर इमेज से बिदकते हैं उनके करीब जाएंगे। कुछ अन्य विश्लेषकों का यह भी मानना है कि हो सकता है कि मुस्लिम समाज का एक तबका बीजेपी को वोट देने लगे। मोदी बाजपेयी जैसा कुछ जादू करना चाहते हैं। लखनऊ के कुछ ऐसे मोहल्ले रहे हैं जहां से अटल बिहारी बाजपेयी को वोट मिलता रहा है। 
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