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डकैती से पहले एक-एक गली छान ली थी बदमाशों ने, हुआ खुलासा

Fri, 10 Mar 2017 11:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 10 Mar 2017 11:08 AM IST
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how did biggest robbery happen in Lucknow.
बदमाशों व बरामद ज्वैलरी के साथ एसएसपी मंजिल सैनी - फोटो : amar ujala

लखनऊ में अब तक की सबसे बड़ी डकैती की साजिश पीजीआई थाना क्षेत्र की वृंदावन कॉलोनी में एक किराये के कमरे में रची गई थी। भागते वक्त बदमाशों में से एक की बाइक खराब हो गई जिसे उन्होंने अंबरगंज में लावारिस छोड़ दिया था। इसके बाद सभी बदमाश वापस पीजीआई स्थित कमरे में पहुंचे और लूट के माल का बंटवारा किया।

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एसएसपी मंजिल सैनी ने बताया कि डकैती के मास्टरमाइंड अमेठी के विकास शुक्ला उर्फ विनय शुक्ला और सीतापुर का राहुल दीक्षित वृंदावन कॉलोनी में किराए पर रहते थे। वारदात के दिन सभी बदमाश सुबह ही लखनऊ आ गए थे।
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विनय, अभय और राहुल पहले भी कई बार जेवर खरीदने के बहाने मुकुंद ज्वैलर्स जा चुके थे। वारदात के लिए बाइक कहां खड़ी करनी हैं? कितना पैदल चलना है? ज्वैलरी शॉप से निकलने के बाद किस रास्ते से भागना है? चौक की किन-किन गलियों से होते हुए बाहर निकलना है? बदमाश यह पहले ही तय कर चुके थे।
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वारदात से पहले रविवार दोपहर बदमाशों ने इलाके का एक चक्कर लगाया और शाम को ज्वैलरी शॉप का मुआयना किया। रात नौ बजने से दो मिनट पहले ही दुकान पर धावा बोल दिया।

मुखबिर की मदद से वारदात को संभव हो सकी वारदात

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मुखबिर ने इतनी सटीक जानकारी दी थी कि अगर बदमाशों को पांच मिनट भी देर हो जाती तो प्रवीण अपनी ज्वैलरी शॉप बंद करके जा चुके होते। चौक की संकरी गलियों के बारे में विकास, अभय और राहुल को पता था। तीनों आगे-आगे चल रहे थे, बाकी चार बदमाश पीछे थे।

बाइक उठाने के बाद तीनों फूलवाली गली से होते हुए हरदोई रोड पहुंचे और गायब हो गए। सीसीटीवी कैमरे की आखिरी फुटेज में पुलिस को सिर्फ दो बाइक नजर आई थीं। दरअसल राज बहादुर और हरि बिलास जिस काले रंग की पल्सर बाइक से भाग रहे थे, वह अंबरगंज में खराब हो गई।

बाइक छोड़कर दोनों टेंपो से पीजीआई पहुंचे जहां आनन-फानन लूटे गए सोने के जेवर और कैश का बंटवारा किया गया।

राज बहादुर और हरि बिलास को दो-दो हजार रुपये देकर बस से रायबरेली भेज दिया गया जबकि बाकी बदमाश अलग चले गए। बाद में अभय उर्फ विपिन सिंह ने रायबरेली जाकर दोनों को उनके हिस्से के सोने के जेवर और कैश सौंपा।

...तो क्‍या वारदात के लिए लाई गई थी बाइक

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डेढ़ महीने से बदमाश कर रहे थे रेकी एक-एक गली संभाली
एएसपी क्राइम डॉ. संजय कुमार ने बताया कि लावारिस मिली बाइक किसकी है? इस बारे में अभी पता नहीं चल सका है। आशंका है कि बाइक डकैती के लिए ही चोरी की गई थी।

उन्होंने बताया कि जेवर और रुपयों का बंटवारा नाप-तौल कर नहीं हुआ है इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि किस बदमाश के पास कितना कैश और कितने जेवर हैं। मास्टरमाइंड के पकड़े जाने के बाद पूरी कहानी पता चलेगी।

35 से 40 किलो सोना ले गए डकैत

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डकैत कितना सोना और कैश ले गए? यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। एसएसपी मंजिल सैनी ने प्रेस कांफ्रेंस में यह सवाल पूछने पर कहा कि सराफा ने लिखित सूची नहीं दी है। उन्होंने बातचीत में कभी 30 किलो तो कभी 35 किलो सोने के जेवर और 20 से 25 लाख रुपये लूटने की बात कही।

हालांकि, डीजीपी जावीद अहमद से मुलाकात करने पर प्रवीण रस्तोगी ने 40 किलो सोने के जेवर ही लूटने की बात कही थी। एसएसपी का कहना है कि डकैतों के हाथ लगे जेवरों की सूची भले न मिली हो लेकिन पुलिस 35 किलो सोना ही मानकर चल रही है।

किस करीबी ने कराई रेकी?

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मुकुंद ज्वैलर्स की रेकी कराने वाला शख्स कौन था? यह पुलिस के लिए रहस्य बना हुआ है। पकड़े गए बदमाशों का कहना है कि उन्हें वारदात वाले दिन ही बुलाया गया था इसलिए मुखबिरी करने वाले के बारे में नहीं जानते।

एएसपी पश्चिम जयप्रकाश के मुताबिक डकैती के मास्टरमाइंड के पकड़े जाने के बाद रेकी कराने वाले के बारे में सही जानकारी मिलेगी।

फिलहाल सराफा प्रवीण रस्तोगी और उनके बेटे जितांशु रस्तोगी से ऐसे लोगों के बारे में पता लगाया जा रहा है जो उनके बारे में सूचनाएं दे सकते हैं।

ज्वैलरी शॉप के पांच कर्मचारियों की पड़ताल करने के साथ ही उनसे मुखबिर के बारे में जानकारी ली जा रही है। चौक सराफा बाजार के दुकानदारों, सराफा कारोबारियों, कारीगरों के साथ ही मुकुंद ज्वैलरी शॉप में अक्सर आने वाले लोगों की सूची बनाई जा रही है।

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