फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   hospital hold hostage to patient and family for not paying bill

इलाज कराते-कराते पैसे खत्म हुए तो मरीज को परिजनों सहित बनाया बंधक

Mon, 12 Jun 2017 12:29 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Mon, 12 Jun 2017 12:29 PM IST
विज्ञापन
hospital hold hostage to patient and family for not paying bill
डेमो - फोटो : demo pic
लखनऊ के बर्लिंग्टन चौराहा स्थित एफआई अस्पताल में मरीज से इलाज के नाम पर साढ़े छह लाख रुपए वसूल ल‌िए गए। मरीज के परिजनों ने साढ़े छह बीघा खेत बेचकर इलाज करवाया। 39 दिन तक मरीज को भर्ती रखा पर तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। तीन दिन पहले 50 हजार रुपए की मांग की। पैसा खत्म हो गया तो डॉक्टर ने इलाज बंद कर दिया और मरीज के साथ परिजनों को बंधक बना लिया।
विज्ञापन


घरवालों ने 100 नंबर पर शिकायत की। पुलिस पहुंची तो समझा-बुझाकर मामला शांत करवा दिया। 

सीतापुर के रेउसा थाने के भैंसहां निवासी मनोज कुमार (15) बीती 27 अप्रैल को सड़क हादसे में बुरी तरह घायल हो गया था। मामा कौशल किशोर और भाई अनूप कुमार ने बताया कि पहले स्थानीय अस्पताल में इलाज चला। हालत नहीं सुधरी तो डॉक्टरों ने 30 अप्रैल को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। 
विज्ञापन


कुछ दिन इलाज चलने के बाद डॉक्टरों ने बलरामपुर अस्पताल ले जाने की सलाह दी। तीन मई को मरीज को बाहर लेकर निकले तो एक अफजल नाम के दलाल ने कहा कि उसका अस्पताल बर्लिंग्टन चौराहे के पास है। सात दिन में मरीज ठीक हो जाएगा और एक लाख रुपये का खर्च होंगे। अफजल ने खुद एंबुलेंस बुलाई और कुछ देर में मरीज को एफआई अस्पताल पहुंच दिया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


वहां डॉक्टरों ने आईसीयू में भर्ती किया और बताया कि बीस लाख रुपये खर्चा होंगे। डॉक्टरों से हाथ जोड़ते हुए भाई की जान बचाने के लिए गुहार लगाई तो कहा गया कि जितना पैसा है उतना जमा करो ताकि इलाज शुरू किया जा सके। सबसे पहले 50 हजार रुपये जमा कराए। 

पैसा खत्म होने के साथ इलाज बंद, हंगामा

hospital hold hostage to patient and family for not paying bill
डेमो

इसके बाद डॉक्टरों ने इलाज के लिए चार लाख रुपये मांगे 80 हजार रुपये बीघा के हिसाब से पांच बीघा खेत बेचकर चार लाख रुपये की व्यवस्था की। पूरा पैसा डॉक्टरों को जमा कर दिया। 20 मई के बाद डॉक्टरों ने और पैसा मांगा तो बचा हुआ डेढ़ बीघा खेत बेचकर एक लाख 60 हजार रुपये लाए। इसके बाद पैसा कम पड़ा तो कुछ जेवर और पेड़ बेचकर जमा किया। 

17 दिन आईसीयू और 22 दिन वार्ड में रखने के करीब साढ़े छह लाख वसूल लिए लेकिन हालत नहीं सुधरी। परिवारीजनों का आरोप था कि अस्पताल में इलाज के नाम पर लूट खसोट का आलम ये है कि इलाज और दवा का बिल तक नहीं दिया जाता है।

भाई अनूप और मामा कौशल किशोर ने बताया कि  तीन दिन पहले पैसा खत्म हो गया तो डॉक्टरों ने इलाज बंद कर बंधक बना लिया। परिवारीजनों ने बच्चे के इलाज की गुहार लगाई तो डॉक्टरों ने कह दिया कि पैसा लाओ नहीं तो इलाज नहीं होगा। आरोप है कि साढ़े छह लाख रुपये देने के बाद भी डॉक्टर कह रहे थे कि 50 हजार रुपये बकाया हैं। 

बकाया नहीं दोगे तो यहां से नहीं निकल पाओगे। पीड़ितों ने मामले की जानकारी रविवार को 100 नंबर पर दी जिसके बाद पुलिस ने समझा-बुझाकर मामला शांत कराया और मरीज को छोड़ने के लिए कहा। शाम करीब साढे़ सात बजे परिवारीजन मरीज को दूसरे अस्पताल लेकर चले गए।

घर में खाने तक का नहीं बचा पैसा 
अनूप ने बताया कि पिता और माता जी का पहले ही देहांत हो चुका है। घर खर्च और भाई की पढ़ाई खेती से अनाज बेच कर हो रही है। डॉक्टरों ने जो कुछ था सब बिकवा दिया। मामा कौशल किशोर का आरोप है कि डॉक्टरों ने इलाज के बहाने जो लूट खसोट की है उससे घर की पूरी स्थिति खराब हो गई है। अब इलाज तो दूर खाने तक का कोई इंतजाम नहीं है। इस बात की चिंता सता रही है कि आखिर अब मनोज की जान कैसे बचेगी और घर का खर्च कैसे चलेगा।

और दलाल बोला हम दवा का काम करते हैं

hospital hold hostage to patient and family for not paying bill
डेमो
परिवारीजनों ने बताया कि अफजल नाम के दलाल ने मरीज को शिफ्ट कराया था। भाई अनूप ने अफजल का नंबर 8299893499 बताया। अमर उजाला संवाददाता ने फोन कर एक मरीज को शिफ्ट करने के लिए कहा तो अफजल ने बताया कि हम ये काम नहीं करते हैं। हम दवा का काम करते हैं। परिवारीजनों का आरोप है कि अफजल खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों को भेजने का काम करता है और वह ट्रॉमा सेंटर के बाहर खड़ा रहता है।

लिखित शिकायत पर कराएंगे जांच
मरीज के इलाज पर साढ़े छह लाख रुपये का बिल बनाने या मरीज तीमारदार को बंधक बनाने की जानकारी मिली थी। मरीज के तीमारदार इलाज संबंधी कागजात के साथ लिखित शिकायत करेंगे तो मामले की जांच कराई जाएगी। इलाज के नाम पर मनमाने ढंग से वसूली बर्दाश्त नहीं होगी। - डॉ. जीएस वाजपेई, सीएमओ

हंगामे की शिकायत पर पहुंची थी पुलिस
मरीज को बंधक बनाने और हंगामे की सूचना के बाद टीम अस्पताल पहुंची थी। इलाज का 50 हजार रुपये का बिल बकाया था जिसकी वजह से विवाद हुआ था। परिवारीजन मरीज को लेकर चले गए। किसी पक्ष की तरफ से कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर जांच कराई जाएगी। मरीज ने बंधक बनाने की कोई बात नहीं बताई थी। -डीके उपाध्याय, कोतवाली प्रभारी, कैसरबाग

आरोप गलत
37 दिन मरीज का इलाज चला था, जिसके लिए दो लाख रुपये लगे थे। मरीज के तीमारदार को किसी दूसरे अटेंडेंट ने भड़का दिया जिसकी वजह से ये विवाद हुआ। पुलिस से सूचना मिलने के बाद मामला सुलझा लिया गया था। साढ़े छह लाख रुपये खर्च कराने का आरोप गलत है। तीमारदार से ये लिखवा लिया गया था कि उसे अस्पताल से कोई दिक्कत नहीं है। मरीज के पास पैसे नहीं थे जिसके बाद उसे अपनी एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल भिजवाया गया।- सुहेल, संचालक, एफआई अस्पताल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed