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Lucknow News: बिना बिल भरे बिजली फूंक रहे माननीय
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प्रतीकात्मक।
लखनऊ। आम उपभोक्ताओं का एक महीने का बिजली बिल न भरने पर कनेक्शन काटने का अल्टीमेटम देने वाला लेसा माननीयों पर मेहरबान है। यही कारण है कि गोमतीनगर के विभूतिखंड स्थित मंत्री आवास व नेहरू एन्क्लेव के 35 से ज्यादा वीआईपी 40 हजार से लेकर 7.50 लाख रुपये तक का बिल बकाया होने के बावजूद धड़ल्ले से बिजली फूंक रहे हैं।
एक हजार रुपये के बिल की देनदारी पर भी आम उपभोक्ता का कनेक्शन काट देने वाला बिजली विभाग इन्हें नोटिस तक नहीं दे पा रहा है। इन माननीयों पर कुल 45 लाख रुपये के बिजली बिल बकाया हैं।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के बड़े अफसर ने बताया कि मंत्री आवास में ज्यादातर बिजली कनेक्शन लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता व कुछ जगहों पर राज्य संपत्ति विभाग के नाम से हैं। बिजली विभाग के इंजीनियर जब भी बिल की वसूली के लिए लोक निर्माण विभाग के पास पहुंचते है तो वह राज्य संपत्ति विभाग पर इसे चुकाने की जिम्मेदारी बता देता है। उधर, जब इंजीनियर राज्य संपत्ति विभाग पहुंचते हैं तो कहा जाता है कि जिनके नाम से कनेक्शन है, बिल उनसे ही वसूलें। इस खींचतान के बीच वीआईपी बिना बिल जमा किए खूब बिजली फूंक रहे हैं।
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केस - 1 : दो वर्ष से जमा नहीं हुआ बिल
मंत्री आवास के एक वीआईपी आवास पर 4.66 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है। आखिरी बार इस आवास का दो वर्ष पहले जुलाई, 2023 में 11,225 रुपये का बिल जमा हुआ था।
केस दो : 6.29 लाख रुपये के बिल की देनदारी
मंत्री आवास के एक आवास पर 6.29 लाख रुपये के बिजली बिल की देनदारी है। इस आवास का 8.5 किलोवाट का कनेक्शन है। वर्ष 2021 में इस कनेक्शन का महज 4442 रुपये का बिल जमा हुआ था।
सवाल : आखिर कहां गया बजट?
वीआईपी आवासों में जलने वाली बिजली के बिल का भुगतान लोक निर्माण व राज्य संपत्ति विभाग करता है। इसके लिए हर वर्ष बजट का प्रावधान होता है। बिल के समान बजट जारी किया जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बिजली बिल भरने के लिए मिला बजट गया कहां? इस संबंध में जब अमर उजाला ने दोनों विभागों के जिम्मेदारों से बात करनी चाही तो वे कुछ भी बोलने से कतराते रहे।
Iनेहरू एन्क्लेव व मंत्री आवास के बकायेदारों पर 45 लाख रुपये से ज्यादा के बिजली बिल की देनदारी है। लोक निर्माण व राज्य संपत्ति विभाग के आपसी विवाद से भुगतान नहीं हो पा रहा है। इस कारण जोन के राजस्व का ग्राफ भी गिर रहा है। ऐसे बकायेदारों को नोटिस जारी किया जाएगा। I
I- सुशील गर्ग, मुख्य अभिंयता गोमतीनगर जोन लेसाI
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एक हजार रुपये के बिल की देनदारी पर भी आम उपभोक्ता का कनेक्शन काट देने वाला बिजली विभाग इन्हें नोटिस तक नहीं दे पा रहा है। इन माननीयों पर कुल 45 लाख रुपये के बिजली बिल बकाया हैं।
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मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के बड़े अफसर ने बताया कि मंत्री आवास में ज्यादातर बिजली कनेक्शन लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता व कुछ जगहों पर राज्य संपत्ति विभाग के नाम से हैं। बिजली विभाग के इंजीनियर जब भी बिल की वसूली के लिए लोक निर्माण विभाग के पास पहुंचते है तो वह राज्य संपत्ति विभाग पर इसे चुकाने की जिम्मेदारी बता देता है। उधर, जब इंजीनियर राज्य संपत्ति विभाग पहुंचते हैं तो कहा जाता है कि जिनके नाम से कनेक्शन है, बिल उनसे ही वसूलें। इस खींचतान के बीच वीआईपी बिना बिल जमा किए खूब बिजली फूंक रहे हैं।
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केस - 1 : दो वर्ष से जमा नहीं हुआ बिल
मंत्री आवास के एक वीआईपी आवास पर 4.66 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है। आखिरी बार इस आवास का दो वर्ष पहले जुलाई, 2023 में 11,225 रुपये का बिल जमा हुआ था।
केस दो : 6.29 लाख रुपये के बिल की देनदारी
मंत्री आवास के एक आवास पर 6.29 लाख रुपये के बिजली बिल की देनदारी है। इस आवास का 8.5 किलोवाट का कनेक्शन है। वर्ष 2021 में इस कनेक्शन का महज 4442 रुपये का बिल जमा हुआ था।
सवाल : आखिर कहां गया बजट?
वीआईपी आवासों में जलने वाली बिजली के बिल का भुगतान लोक निर्माण व राज्य संपत्ति विभाग करता है। इसके लिए हर वर्ष बजट का प्रावधान होता है। बिल के समान बजट जारी किया जाता है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि बिजली बिल भरने के लिए मिला बजट गया कहां? इस संबंध में जब अमर उजाला ने दोनों विभागों के जिम्मेदारों से बात करनी चाही तो वे कुछ भी बोलने से कतराते रहे।
Iनेहरू एन्क्लेव व मंत्री आवास के बकायेदारों पर 45 लाख रुपये से ज्यादा के बिजली बिल की देनदारी है। लोक निर्माण व राज्य संपत्ति विभाग के आपसी विवाद से भुगतान नहीं हो पा रहा है। इस कारण जोन के राजस्व का ग्राफ भी गिर रहा है। ऐसे बकायेदारों को नोटिस जारी किया जाएगा। I
I- सुशील गर्ग, मुख्य अभिंयता गोमतीनगर जोन लेसाI