फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   home isholated patients not getting medicine kit from control room

लखनऊ में होम आइसोलेशन वाले मरीजों को दवाएं नहीं भेज रहा कंट्रोल रूम

Tue, 04 May 2021 01:58 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 04 May 2021 01:58 AM IST
विज्ञापन
home isholated patients not getting medicine kit from control room
लखनऊ। लखनऊ में इस समय 36 हजार लोग होम आइसोलेशन में हैं। कोविड कंट्रोल रूम इन मरीजों के लगातार संपर्क में होने का दावा कर रहा है। लेकिन हकीकत ये है कि कई मरीजों के पास न तो कंट्रोल रूम से फोन आ रहा है न उन्हें दवाएं ही भेजी जा रही हैं। इससे मरीजों की हालत गंभीर हो रही है।
विज्ञापन

होम आइसोलेशन के मरीजों की मदद के लिए कागजी व्यवस्थाएं तो बहुत हैं, लेकिन धरातल की तस्वीर एकदम अलग है। दवाओं की किट तो दूर उन्हें कोविड कंट्रोल रूम से फोन तक नहीं किया जा रहा है। होम आइसोलेशन वाले मरीजों को दवाओं की किट दी जानी है। इसका प्रचार-प्रसार तो बड़े शोर शराबे से हुआ, लेकिन सुविधा देने के मामले में लापरवाही ही सामने दिख रही है। कुछ मरीजों को फीवर क्लीनिक से दो या तीन दवाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा मरीज मेडिकल स्टोर जाकर दवाएं खरीद रहे हैं। ऐसे में इन मरीजों से दूसरों को भी संक्रमण की आशंका है। अभी कुछ दिन पहले फ्लिपकार्ट से दवाएं पहुंचाने की शुरुआत की गई, लेकिन उसका भी विशेष फायदा नहीं दिख रहा है।
विज्ञापन

परिचित डॉक्टर से ले रहे सलाह
त्रिवेणी नगर निवासी नवीन सिंह पिछले एक सप्ताह से कोरोना पॉजिटिव हैं। वह होम आइसोलेशन में हैं, लेकिन अभी तक उनके पास कंट्रोल रूम से न तो काल आई है और न दवाएं भेजी गई हैं। ऐसे में वह अपने एक परिचित डॉक्टर से फोन पर सलाह लेकर दवाएं ले रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

न किट मिली न फोन आया
नक्खास निवासी विपिन गुप्ता के पिता की 15 दिन पहले कोरोना से मौत हो चुकी है। होम आइसोलेशन के दौरान उनको शुरुआत में बेड नहीं मिला। जब तक बेड मिलता तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पिता की मौत के बाद विपिन भी संक्रमित हैं, लेकिन उनको अभी तक न तो दवा की किट मिली है न कोई फोन आया है।
निजी अस्पताल में भर्ती होना पड़ा
चौपटिया निवासी सुधीर जैन 10 दिन से होम आइसोलेशन में हैं। उन्हें भी अब तक न फोन आया है न दवाएं ही भेजी गई हैं। यही नहीं ऑक्सीजन लेवल 35 तक गिर जाने पर उनकी हालत बहुत खराब हो गई तो कंट्रोल रूम फोन किया, फिर भी मदद नहीं मिली। ऐसे में निजी अस्पताल में भर्ती हुए तो जान बची।

मरीजों की संख्या ज्यादा
सीएमओ डॉ. संजय भटनागर का कहना है कि मरीजों की संख्या ज्यादा है। इसके बावजूद सभी से संपर्क किया जा रहा है। सभी को दवाएं भी दी जा रही हैं। इसके बावजूद यदि किसी को दवाएं नहीं मिल पाई हैं तो इसे देखा जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed